Indore News: छात्रों के लिए प्रदर्शन करने वाले दंपति को भेजा जेल, मंत्री विजयवर्गीय के घर जाना पड़ा भारी
दंपती ने प्रदर्शन के लिए सोशल मीडिया और टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन से भीड़ जुटाने का प्रयास किया था। सूचना मिलने के 1 घंटे के भीतर पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को हिरासत में लिया और धारा 151 के तहत कार्रवाई की।
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पुलिस प्रशासन को इस प्रदर्शन की भनक करीब 1 घंटे पहले ही लग गई थी। सूचना मिलते ही सुरक्षा अमले ने मौके पर पहुंचकर मंत्री निवास के आसपास घेराबंदी मजबूत कर दी थी। पुलिस के मुताबिक दोनों ने विरोध प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी। इंदौर के पांडे दंपती ने छात्र आंदोलन के समर्थन में पहले सांसद शंकर लालवानी के घर के बाहर धरना दिया, इसके बाद दोनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर धरना देने पहुंच गए थे।
सोशल मीडिया और धरना स्थलों से भीड़ जुटाने का प्रयास
पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। दंपती ने इस प्रदर्शन को बड़ा रूप देने के लिए सोशल मीडिया पर कई संदेश प्रसारित किए थे। इसके अलावा टंट्याभील चौराहे पर जारी विद्यार्थियों के आंदोलन में पहुंचकर भी उन्होंने छात्रों से मंत्री निवास के घेराव में शामिल होने की अपील की थी। तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों के साथ कोई भी अन्य व्यक्ति प्रदर्शन स्थल पर नहीं पहुंचा और दोनों को अकेले ही विरोध दर्ज कराना पड़ा।
समझाइश के बाद भी नहीं माने, पुलिस ने हिरासत में लिया
जब दंपती मौके पर पहुंचे तो मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने और रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद जब प्रहलाद पाण्डेय सड़क पर बैठकर विरोध जताने लगे, तब पुलिस बल ने उन्हें उठाकर अपनी गाड़ी में बैठाया। साथ ही उनकी पत्नी को भी महिला पुलिस की मदद से थाने ले जाया गया। थाना प्रभारी आर.डी.कानवा के अनुसार पूछताछ में दंपती ने माना कि उनसे नियम उल्लंघन की भूल हुई है।
धारा 151 के तहत केस दर्ज कर भेजा जेल
बिना किसी पूर्व अनुमति के संवेदनशील क्षेत्र में प्रदर्शन करने और शांति व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोप में पुलिस ने दंपती के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने धारा 151 एवं बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन करने की धाराओं में मामला पंजीकृत कर दोनों को जेल भेज दिया है।
कैलाश विजयवर्गीय के बयान से खफा थे दंपती
पांडे दंपति ने पुलिस को बताया कि विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा यह कहना कि NEET परीक्षा घोटाला प्रदेश का विषय नहीं है, फिर छात्र आंदोलन को प्रायोजित बताना और अब छात्रों के संदर्भ में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने से युवाओं और अभिभावकों में गहरा आक्रोश है। इसके विरोध में वे धरना देने पहुंचे थे।
