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Indore News: इंदौर में 18 भाषाओं का महासंगम, चिमनबाग मैदान में 22 फरवरी को होगा आयोजन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 16 Feb 2026 08:08 AM IST
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सार
Indore News: इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में संस्कृत, मालवी, निमाड़ी और भोजपुरी सहित कुल 18 भारतीय भाषाओं का प्रदर्शन होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य देश की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता का जश्न मनाना है।
संघ कार्यालय सुदर्शन भवन
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के रामबाग स्थित पंत वैध कॉलोनी में संघ कार्यालय सुदर्शन भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान आगामी 22 फरवरी को शहर में होने वाले भारतीय भाषा पर्व के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया गया। इस विशेष अवसर पर विभिन्न भाषाओं के प्रतिनिधि और अनेक समाजों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस विमोचन कार्यक्रम ने शहर में होने वाले इस अनूठे भाषाई उत्सव की तैयारियों को एक नई गति प्रदान की है।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक हैं भारतीय भाषाएं
पोस्टर विमोचन के अवसर पर संघ के विभाग संघ चालक मुकेश मोड़ ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की समस्त भाषाएं हमारी साझा सांस्कृतिक पहचान और देश की अटूट एकता का जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास और हमारी प्राचीन संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सभी भारतीय भाषाओं का सशक्त और समृद्ध होना अत्यंत अनिवार्य है। मुकेश मोड़ ने आगे कहा कि भाषाएं ही वास्तव में किसी भी राष्ट्र की नींव को मजबूती प्रदान करने का कार्य करती हैं।
भावी पीढ़ी के लिए भाषाई विरासत का संरक्षण
कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को एक अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली भाषाई विरासत सौंपना है। इसके लिए निरंतर रूप से भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन करना समय की मांग है। इसी दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से 22 फरवरी को इंदौर की धरा पर इस विशाल कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। आयोजन समिति का मानना है कि अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति प्रेम ही राष्ट्रीय एकता को प्रगाढ़ करेगा।
चिमनबाग मैदान में जुटेगा 18 भाषाओं का संगम
कार्यक्रम के संयोजक रवींद्र देशपांडे, अभय सिंह राठौड़ और अश्विन खरे ने आयोजन की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मुख्य आयोजन 22 फरवरी, रविवार को प्रातः 10 बजे से चिमनबाग फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक उत्सव में कुल 18 प्रमुख भाषाएं और बोलियां सम्मिलित होंगी, जिनमें संस्कृत, निमाड़ी, मालवी, भीली, जनजाति भाषाएं, मैथिली, भोजपुरी, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी, सिंधी, गुजराती, नेपाली, हिंदी और गढ़वाली शामिल हैं। इंदौर के इतिहास में पहली बार इस तरह का व्यापक भाषाई समागम होने जा रहा है।
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सांस्कृतिक एकता का प्रतीक हैं भारतीय भाषाएं
पोस्टर विमोचन के अवसर पर संघ के विभाग संघ चालक मुकेश मोड़ ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की समस्त भाषाएं हमारी साझा सांस्कृतिक पहचान और देश की अटूट एकता का जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास और हमारी प्राचीन संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सभी भारतीय भाषाओं का सशक्त और समृद्ध होना अत्यंत अनिवार्य है। मुकेश मोड़ ने आगे कहा कि भाषाएं ही वास्तव में किसी भी राष्ट्र की नींव को मजबूती प्रदान करने का कार्य करती हैं।
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भावी पीढ़ी के लिए भाषाई विरासत का संरक्षण
कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को एक अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली भाषाई विरासत सौंपना है। इसके लिए निरंतर रूप से भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन करना समय की मांग है। इसी दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से 22 फरवरी को इंदौर की धरा पर इस विशाल कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। आयोजन समिति का मानना है कि अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति प्रेम ही राष्ट्रीय एकता को प्रगाढ़ करेगा।
चिमनबाग मैदान में जुटेगा 18 भाषाओं का संगम
कार्यक्रम के संयोजक रवींद्र देशपांडे, अभय सिंह राठौड़ और अश्विन खरे ने आयोजन की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मुख्य आयोजन 22 फरवरी, रविवार को प्रातः 10 बजे से चिमनबाग फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक उत्सव में कुल 18 प्रमुख भाषाएं और बोलियां सम्मिलित होंगी, जिनमें संस्कृत, निमाड़ी, मालवी, भीली, जनजाति भाषाएं, मैथिली, भोजपुरी, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी, सिंधी, गुजराती, नेपाली, हिंदी और गढ़वाली शामिल हैं। इंदौर के इतिहास में पहली बार इस तरह का व्यापक भाषाई समागम होने जा रहा है।

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