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Indore News: NEET के नाम पर करोड़ों की लूट कर रहे अधिकारी?, सरकार की "आकांक्षा योजना" पर गंभीर आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 13 May 2026 03:26 PM IST
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सार
Indore News: इंदौर में आकांक्षा योजना के तहत नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों ने 20 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें बिना सुविधाएं और कोचिंग दिए उनके नाम पर लाखों के फर्जी बिल पास कराए जा रहे हैं।
छात्रों के नाम पर 20 करोड़ का खेल, आकांक्षा योजना पर बड़े आरोप।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
मध्यप्रदेश में NEET, JEE और CLAT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करवाने वाली आकांक्षा योजना सवालों के घेरे में आ गई है। सैकड़ों छात्रों ने इस योजना में करोड़ों रुपए के घोटाले के आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि फर्जी बिल लगाकर अधिकारी फंड निकाल रहे हैं और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।
इंदौर प्रेस क्लब में विद्यार्थियों ने एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान आकांक्षा योजना के क्रियान्वयन में बरती गई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए। युवा कांग्रेस नेता निखिल वर्मा, जिला कांग्रेस सेवादल कार्यवाहक अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल और गिरीश जोशी के नेतृत्व में आयोजित इस वार्ता में लगभग 70 से 80 छात्र अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। यह सभी छात्र इंदौर के आसपास के कई जिलों से इंदौर में पढ़ाई करने के लिए आए हैं।
अधिकारियों ने लाखों रुपए खर्च दिखाया, नहीं मिले टैबलेट
प्रेस वार्ता में शामिल विद्यार्थियों ने खुलासा किया कि आकांक्षा योजना के तहत उनके नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये तक का खर्च दिखाया गया है। यह राशि कोचिंग, टैबलेट, परिवहन, स्टेशनरी और अन्य सुविधाओं के नाम पर दर्ज की गई है। हालांकि, छात्रों का दावा है कि वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है। उन्हें न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिली और न ही टैबलेट जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके बावजूद विभाग फर्जी बिल लगाकर भुगतान की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है।
20 करोड़ के भ्रष्टाचार का अंदेशा
युवा कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों और एक निजी कोचिंग संचालकों की मिलीभगत से करीब 20 करोड़ रुपये हड़पने की तैयारी की गई है। नेताओं का कहना है कि गरीब और होनहार छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाकर केवल कागजों पर सुविधाएं दिखाई गई हैं ताकि सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त किया जा सके।
सत्र में देरी की गई
विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनका चयन सितंबर माह में ही हो गया था, लेकिन उन्हें समय पर इंदौर नहीं बुलाया गया। अक्टूबर से शुरू होने वाली कक्षाएं दिसंबर में बुलाई गईं और नियमित पढ़ाई जनवरी से प्रारंभ हुई। इस देरी के कारण NEET जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें पढ़ाने के लिए अनुभवी शिक्षक नहीं दिए गए, जिससे 11वीं का पाठ्यक्रम अप्रैल तक भी पूरा नहीं हो पाया।
कई छात्रों को छात्रवृत्ति भी नहीं मिली
प्रेस वार्ता में यह तथ्य भी सामने आया कि सरकार द्वारा घोषित टैबलेट, मॉड्यूल और छात्रवृत्ति केवल घोषणाओं तक सीमित रही। कई विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिली और आवश्यक सामग्री का खर्च भी वापस नहीं किया गया। जब छात्रों ने इन अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई, तो कथित तौर पर संस्थान प्रबंधन और अधिकारियों द्वारा उन्हें डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया।
निष्पक्ष जांच और आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने फर्जी बिलों की जांच करने और दोषी अधिकारियों व संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि छात्रों को उनकी लंबित सुविधाएं जल्द नहीं मिलीं और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो युवा कांग्रेस प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन छेड़ेगी।
क्या है आकांक्षा योजना
मध्य प्रदेश की 'आकांक्षा योजना' जनजातीय कार्य विभाग द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य मेधावी अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को JEE, NEET, और CLAT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करना है। यह योजना कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्रों को भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से निशुल्क अनुशिक्षण और टैबलेट प्रदान करती है। इसके लिए छात्र को मध्य प्रदेश का मूल निवासी, अनुसूचित जनजाति (ST) का सदस्य होना जरूरी है और कक्षा 10वीं में कम से कम 60% या उससे अधिक अंक होना चाहिए। चयनित 800 विद्यार्थियों को 2 वर्षों के लिए मेडिकल, इंजीनियरिंग या क्लैट की नि:शुल्क कोचिंग मिलती है।
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इंदौर प्रेस क्लब में विद्यार्थियों ने एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान आकांक्षा योजना के क्रियान्वयन में बरती गई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए। युवा कांग्रेस नेता निखिल वर्मा, जिला कांग्रेस सेवादल कार्यवाहक अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल और गिरीश जोशी के नेतृत्व में आयोजित इस वार्ता में लगभग 70 से 80 छात्र अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। यह सभी छात्र इंदौर के आसपास के कई जिलों से इंदौर में पढ़ाई करने के लिए आए हैं।
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अधिकारियों ने लाखों रुपए खर्च दिखाया, नहीं मिले टैबलेट
प्रेस वार्ता में शामिल विद्यार्थियों ने खुलासा किया कि आकांक्षा योजना के तहत उनके नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये तक का खर्च दिखाया गया है। यह राशि कोचिंग, टैबलेट, परिवहन, स्टेशनरी और अन्य सुविधाओं के नाम पर दर्ज की गई है। हालांकि, छात्रों का दावा है कि वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है। उन्हें न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिली और न ही टैबलेट जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके बावजूद विभाग फर्जी बिल लगाकर भुगतान की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है।
20 करोड़ के भ्रष्टाचार का अंदेशा
युवा कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों और एक निजी कोचिंग संचालकों की मिलीभगत से करीब 20 करोड़ रुपये हड़पने की तैयारी की गई है। नेताओं का कहना है कि गरीब और होनहार छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाकर केवल कागजों पर सुविधाएं दिखाई गई हैं ताकि सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त किया जा सके।
सत्र में देरी की गई
विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनका चयन सितंबर माह में ही हो गया था, लेकिन उन्हें समय पर इंदौर नहीं बुलाया गया। अक्टूबर से शुरू होने वाली कक्षाएं दिसंबर में बुलाई गईं और नियमित पढ़ाई जनवरी से प्रारंभ हुई। इस देरी के कारण NEET जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें पढ़ाने के लिए अनुभवी शिक्षक नहीं दिए गए, जिससे 11वीं का पाठ्यक्रम अप्रैल तक भी पूरा नहीं हो पाया।
कई छात्रों को छात्रवृत्ति भी नहीं मिली
प्रेस वार्ता में यह तथ्य भी सामने आया कि सरकार द्वारा घोषित टैबलेट, मॉड्यूल और छात्रवृत्ति केवल घोषणाओं तक सीमित रही। कई विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिली और आवश्यक सामग्री का खर्च भी वापस नहीं किया गया। जब छात्रों ने इन अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई, तो कथित तौर पर संस्थान प्रबंधन और अधिकारियों द्वारा उन्हें डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया।
निष्पक्ष जांच और आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने फर्जी बिलों की जांच करने और दोषी अधिकारियों व संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि छात्रों को उनकी लंबित सुविधाएं जल्द नहीं मिलीं और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो युवा कांग्रेस प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन छेड़ेगी।
क्या है आकांक्षा योजना
मध्य प्रदेश की 'आकांक्षा योजना' जनजातीय कार्य विभाग द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य मेधावी अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को JEE, NEET, और CLAT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करना है। यह योजना कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्रों को भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से निशुल्क अनुशिक्षण और टैबलेट प्रदान करती है। इसके लिए छात्र को मध्य प्रदेश का मूल निवासी, अनुसूचित जनजाति (ST) का सदस्य होना जरूरी है और कक्षा 10वीं में कम से कम 60% या उससे अधिक अंक होना चाहिए। चयनित 800 विद्यार्थियों को 2 वर्षों के लिए मेडिकल, इंजीनियरिंग या क्लैट की नि:शुल्क कोचिंग मिलती है।
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