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Indore News: कितने और भागीरथपुरा? नलों में आता है मटमैला पानी, खरीदकर प्यास बुझाते खातीपुरा के लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Wed, 04 Feb 2026 03:00 PM IST
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सार
इंदौर की खातीपुरा बस्ती में लोगों को नलों से गंदा पानी मिलता है, जिससे उन्हें रोजाना पीने का पानी खरीदना पड़ता है। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 32 मौतों के बाद बस्तीवाले सतर्क हैं।
खातीपुरा के लोग मजबूरी में खरीद रहे साफ पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर की खातीपुरा बस्ती में रहने वाले लोग भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 32 मौतों के बाद अब पीने के पानी को लेकर सतर्क हो गए हैं। इस बस्ती में ज्यादातर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार रहते हैं। लोग अपनी आमदनी का एक हिस्सा पानी पर खर्च करने को मजबूर हैं, क्योंकि नलों का पानी अक्सर गंदा आता है। यहां के लोग रोजाना तीस रुपये खर्च कर पानी की केन खरीदकर प्यास बुझाते हैं।
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पानी लेकर जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
नर्मदा लाइन की समस्याएं और मजबूरी
रहवासी बताते हैं कि जिनके घरों में बोरिंग है, उन्हें पानी की चिंता नहीं होती, लेकिन जो नर्मदा नल पर निर्भर हैं, उन्हें पानी खरीदना ही पड़ता है। खातीपुरा का एक हिस्सा नाले के ढलान पर स्थित है। कई वर्षों तक यहां नर्मदा की लाइन नहीं थी। जब बिछाई गई, तो ढलान के कारण पानी ठीक से नहीं आता। नल में शुरुआत के दस मिनट मटमैला पानी आता है और साफ पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। शादी या अन्य आयोजनों में बस्तीवाले अब साफ पानी की केन खरीदकर ही पानी का इंतजाम करते हैं।
रहवासी बताते हैं कि जिनके घरों में बोरिंग है, उन्हें पानी की चिंता नहीं होती, लेकिन जो नर्मदा नल पर निर्भर हैं, उन्हें पानी खरीदना ही पड़ता है। खातीपुरा का एक हिस्सा नाले के ढलान पर स्थित है। कई वर्षों तक यहां नर्मदा की लाइन नहीं थी। जब बिछाई गई, तो ढलान के कारण पानी ठीक से नहीं आता। नल में शुरुआत के दस मिनट मटमैला पानी आता है और साफ पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। शादी या अन्य आयोजनों में बस्तीवाले अब साफ पानी की केन खरीदकर ही पानी का इंतजाम करते हैं।
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लोगों ने बताई अपनी समस्या
- फोटो : अमर उजाला
लोगों की प्रतिक्रिया
महेश पाठक ने बताया कि हमने घर पर आरओ लगा रखा है ताकि हमारी तबीयत खराब न हो। नर्मदा का पानी ऊंचाई वाले हिस्सों में नहीं आता। मोटर से पानी खींचने के अलावा कोई चारा नहीं है। लाइनों में जमा मटमैला पानी आता है। हमारा पूरा परिवार आरओ से पानी साफ करके पीता है। श्यामा बाई कहती हैं, “कब तक पानी खरीदकर पिएं? मजबूरी में मन कड़ा करके पानी पी लेते हैं। कई बार इतना गंदा पानी आता है कि पीने का पानी खरीदना ही पड़ता है।”
महेश पाठक ने बताया कि हमने घर पर आरओ लगा रखा है ताकि हमारी तबीयत खराब न हो। नर्मदा का पानी ऊंचाई वाले हिस्सों में नहीं आता। मोटर से पानी खींचने के अलावा कोई चारा नहीं है। लाइनों में जमा मटमैला पानी आता है। हमारा पूरा परिवार आरओ से पानी साफ करके पीता है। श्यामा बाई कहती हैं, “कब तक पानी खरीदकर पिएं? मजबूरी में मन कड़ा करके पानी पी लेते हैं। कई बार इतना गंदा पानी आता है कि पीने का पानी खरीदना ही पड़ता है।”
समस्या बताते निवासी
- फोटो : अमर उजाला
महेश यादव कहते हैं, “अब नल का पानी सीधे पीने में डर लगता है। सरकारी टंकी से पास वाले लोग पानी भर लेते हैं, लेकिन हमें कई बार पीने का पानी खरीदना पड़ता है।” सरिता पांडे ने कहा, “हमारी गली में तो गंदा पानी आता है। पीने से बीमारी का खतरा रहता है। कई बार पानी इधर-उधर से मांगना पड़ता है। रोज पानी का इंतजाम करना चिंता का कारण बन गया है।”
'पुरानी लाइनों को बदलने का काम जारी है'
जलकार्य समिति के प्रभारी अभिषेक बबलू शर्मा ने बताया कि शहर में जिन इलाकों में पुरानी लाइनें हैं और रिसाव की समस्या है, वहां प्राथमिकता के आधार पर लाइनों को बदला जा रहा है। रहवासी अपनी हौज के नलों में टोटियां नहीं लगाते हैं, जिससे हौज का गंदा पानी लाइनों में चला जाता है और पानी दूषित होता है।
जलकार्य समिति के प्रभारी अभिषेक बबलू शर्मा ने बताया कि शहर में जिन इलाकों में पुरानी लाइनें हैं और रिसाव की समस्या है, वहां प्राथमिकता के आधार पर लाइनों को बदला जा रहा है। रहवासी अपनी हौज के नलों में टोटियां नहीं लगाते हैं, जिससे हौज का गंदा पानी लाइनों में चला जाता है और पानी दूषित होता है।

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