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MP Foundation Day: जब नेहरू MP गठन पर हुए थे नाराज, बोले थे-इतना लंबा-चौड़ा और बेढंगा प्रदेश कैसे बन सकता है?
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सार
मध्यप्रदेश में कुछ चीजें आज की नई जनरेशन के लिए आश्चर्य पैदा करती हैं जैसे कि राजधानी भोपाल में तो हाईकोर्ट जबलपुर में क्यों है? पर इन सबके पीछे वजहें हैं। इनके पीछे लंबी बहस और किस्से हैं जो उन लोगों के बीच घटित हुए जिन्होंने मध्यप्रदेश को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसी घटनाएं किस्सों के रूप में सामने आईं । आइए जानते हैं ऐसे क्या रहे।
जब नए मध्य प्रदेश के निर्माण पर विचारविमर्श किया गया था
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में कुछ चीजें आज की नई जनरेशन के लिए आश्चर्य पैदा करती हैं जैसे कि राजधानी भोपाल में तो हाईकोर्ट जबलपुर में क्यों है? पर इन सबके पीछे वजहें हैं। इनके पीछे लंबी बहस और किस्से हैं जो उन लोगों के बीच घटित हुए जिन्होंने मध्यप्रदेश को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसी घटनाएं किस्सों के रूप में सामने आईं । आइए जानते हैं ऐसे क्या रहे।
एकीकृत मध्य प्रदेश के लिए पं. द्वारका प्रसाद मिश्र ने लिखा था पं. नेहरू को पत्र
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बने इसके लिए काफी विवाद था। पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र के ने लिखा था कि मुझे लगा कि मध्य प्रदेश के गठन की योजना रह जाएगी। आखिर परेशान होकर मैंने पंडित नेहरू को पत्र लिखा कि अलग-अलग राज्य बनेंगे तो महाकौशल और मध्य भारत दोनों ही आर्थिक दृष्टि से घाटे वाले राज्यों में होंगे, परंतु एक साथ आने पर नया मध्य प्रदेश सभी प्रकार की संपदा से परिपूर्ण होगा। ऐसा राज्य विकसित होने के पश्चात अन्य राज्यों के लिए एक आधार स्तंभ का काम करेगा। यह पत्र मैंने पं. रविशंकर शुक्ल को दिखा कर भेजा। तीन-चार दिनों के बाद शुक्ल जी ने मुझे टेलीफोन पर बधाई देकर कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महामंत्री मन्नालाल अग्रवाल ने सूचित किया है कि आयोग की सिफारिश पर निर्णय लेने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक प्रारंभ हुई, उसी समय तत्काल प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने नए मध्य प्रदेश के गठन की सिफारिश स्वीकार की और भोपाल को राजधानी बना दिया जाए इस निर्णय से भी सूचित किया।
मिश्र के आग्रह पर जबलपुर को मिली हाईकोर्ट
भोपाल को राजधानी बनाए जाने की सूचना पर पंडित द्वारका प्रसाद मिश्रा। पंडित रविशंकर शुक्ल से मिले तब उनसे कहा की राजधानी के संबंध में मेरी और जबलपुर के निवासियों की निराशा को समझा जाए और कहा कि कम से कम हाईकोर्ट की स्थापना जबलपुर में होनी चाहिए।
पणिक्कर नाराज हो गए
मध्य प्रदेश के नेताओं से बातचीत के दौरान कुछ जिलों और अलग क्षेत्र की मांग पर राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य के. एम. पणिक्कर नाराज हो गए और कहा कि कुछ राज्यों के जिले मध्य प्रदेश को नहीं देने का अधिकार आयोग के सदस्यों का है ना कि गोविंद वल्लभ पंत जी का।
विशाल हिंदी प्रदेश की रचना हो
नागपुर में प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल और महाकौशल के नेताओं ने निर्णय लिया कि महाकौशल, मध्य भारत, भोपाल एवं विंध्य प्रदेश का एकीकरण करके एक विशाल हिंदी प्रदेश की रचना की जाए, जो उत्तर प्रदेश, बिहार एवं राजस्थान के बराबर हो। शुक्ल ने इस विषय के संबंध में सभी बातों का अध्ययन करने के लिए दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्त और द्वारिका प्रसाद मिश्र को नियुक्त किया। पुनर्गठन आयोग नागपुर आया तो नए मध्य प्रदेश के निर्माण के संबंध में आयोग के सामने सभी बातें रखी गईं। आयोग में सर्वाधिक प्रभावशाली सदस्य पणिक्कर थे, उन्होंने पूछा कि उत्तर प्रदेश में शामिल बुंदेलखंड के चार जिले झांसी, बांदा, हमीरपुर एवं जालौन को हम लोगों ने क्यों नहीं मांगा तब पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र ने उत्तर दिया कि इन जिलों के प्रस्तावित नए मध्य प्रदेश में आ जाने से समस्त बुंदेलखंड एक ही राज्य में आ जाएगा परंतु गोविंद वल्लभ पंत झांसी की एक तहसील ललितपुर को वहां के लोगों के चाहने पर भी हमें नहीं देना चाहते।
इतना लंबा चौड़ा और बेढंगा प्रदेश कैसे बनेगा?
मध्य भारत के प्रथम मुख्यमंत्री रहे लीलाधर जोशी के अनुसार राजधानी जबलपुर के बजाय भोपाल होना चाहिए यह बात पहले हो चुकी थी। प्रशासनिक दृष्टि से राजधानी भोपाल में होना चाहिए थी, पंडित नेहरू से मिलने जब दिल्ली पहुंचे तब नेहरू जी प्रस्तावित मध्य प्रदेश के विरोधियों को आश्वासन दे चुके थे, तब हमने उनसे राज्य पुनर्गठन आयोग द्वारा प्रस्तावित नए मध्य प्रदेश की बात कही, तो पंडित जी नाराज हो गए। उनकी पहली प्रतिक्रिया यह थी कि इतना लंबा चौड़ा और बेढंगा प्रदेश कैसे बन सकता है?
ललितपुर नहीं देने पर अड़े जीबी पंत
पं. द्वारका प्रसाद मिश्र ने राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य पणिक्कर को कहा कि जब गोविंद वल्लभ पंत मध्य प्रदेश को ललितपुर तहसील का छोटा सा क्षेत्र, जो उत्तर प्रदेश में होने की वजह से मध्य प्रदेश के डाकुओं का शरण स्थल बन गया है, देने को तैयार नहीं हुए तो बुंदेलखंड के चार जिलों की मांग करने में क्या अक्लमंदी होगी।
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एकीकृत मध्य प्रदेश के लिए पं. द्वारका प्रसाद मिश्र ने लिखा था पं. नेहरू को पत्र
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बने इसके लिए काफी विवाद था। पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र के ने लिखा था कि मुझे लगा कि मध्य प्रदेश के गठन की योजना रह जाएगी। आखिर परेशान होकर मैंने पंडित नेहरू को पत्र लिखा कि अलग-अलग राज्य बनेंगे तो महाकौशल और मध्य भारत दोनों ही आर्थिक दृष्टि से घाटे वाले राज्यों में होंगे, परंतु एक साथ आने पर नया मध्य प्रदेश सभी प्रकार की संपदा से परिपूर्ण होगा। ऐसा राज्य विकसित होने के पश्चात अन्य राज्यों के लिए एक आधार स्तंभ का काम करेगा। यह पत्र मैंने पं. रविशंकर शुक्ल को दिखा कर भेजा। तीन-चार दिनों के बाद शुक्ल जी ने मुझे टेलीफोन पर बधाई देकर कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महामंत्री मन्नालाल अग्रवाल ने सूचित किया है कि आयोग की सिफारिश पर निर्णय लेने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक प्रारंभ हुई, उसी समय तत्काल प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने नए मध्य प्रदेश के गठन की सिफारिश स्वीकार की और भोपाल को राजधानी बना दिया जाए इस निर्णय से भी सूचित किया।
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मिश्र के आग्रह पर जबलपुर को मिली हाईकोर्ट
भोपाल को राजधानी बनाए जाने की सूचना पर पंडित द्वारका प्रसाद मिश्रा। पंडित रविशंकर शुक्ल से मिले तब उनसे कहा की राजधानी के संबंध में मेरी और जबलपुर के निवासियों की निराशा को समझा जाए और कहा कि कम से कम हाईकोर्ट की स्थापना जबलपुर में होनी चाहिए।
पणिक्कर नाराज हो गए
मध्य प्रदेश के नेताओं से बातचीत के दौरान कुछ जिलों और अलग क्षेत्र की मांग पर राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य के. एम. पणिक्कर नाराज हो गए और कहा कि कुछ राज्यों के जिले मध्य प्रदेश को नहीं देने का अधिकार आयोग के सदस्यों का है ना कि गोविंद वल्लभ पंत जी का।
विशाल हिंदी प्रदेश की रचना हो
नागपुर में प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल और महाकौशल के नेताओं ने निर्णय लिया कि महाकौशल, मध्य भारत, भोपाल एवं विंध्य प्रदेश का एकीकरण करके एक विशाल हिंदी प्रदेश की रचना की जाए, जो उत्तर प्रदेश, बिहार एवं राजस्थान के बराबर हो। शुक्ल ने इस विषय के संबंध में सभी बातों का अध्ययन करने के लिए दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्त और द्वारिका प्रसाद मिश्र को नियुक्त किया। पुनर्गठन आयोग नागपुर आया तो नए मध्य प्रदेश के निर्माण के संबंध में आयोग के सामने सभी बातें रखी गईं। आयोग में सर्वाधिक प्रभावशाली सदस्य पणिक्कर थे, उन्होंने पूछा कि उत्तर प्रदेश में शामिल बुंदेलखंड के चार जिले झांसी, बांदा, हमीरपुर एवं जालौन को हम लोगों ने क्यों नहीं मांगा तब पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र ने उत्तर दिया कि इन जिलों के प्रस्तावित नए मध्य प्रदेश में आ जाने से समस्त बुंदेलखंड एक ही राज्य में आ जाएगा परंतु गोविंद वल्लभ पंत झांसी की एक तहसील ललितपुर को वहां के लोगों के चाहने पर भी हमें नहीं देना चाहते।
इतना लंबा चौड़ा और बेढंगा प्रदेश कैसे बनेगा?
मध्य भारत के प्रथम मुख्यमंत्री रहे लीलाधर जोशी के अनुसार राजधानी जबलपुर के बजाय भोपाल होना चाहिए यह बात पहले हो चुकी थी। प्रशासनिक दृष्टि से राजधानी भोपाल में होना चाहिए थी, पंडित नेहरू से मिलने जब दिल्ली पहुंचे तब नेहरू जी प्रस्तावित मध्य प्रदेश के विरोधियों को आश्वासन दे चुके थे, तब हमने उनसे राज्य पुनर्गठन आयोग द्वारा प्रस्तावित नए मध्य प्रदेश की बात कही, तो पंडित जी नाराज हो गए। उनकी पहली प्रतिक्रिया यह थी कि इतना लंबा चौड़ा और बेढंगा प्रदेश कैसे बन सकता है?
ललितपुर नहीं देने पर अड़े जीबी पंत
पं. द्वारका प्रसाद मिश्र ने राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य पणिक्कर को कहा कि जब गोविंद वल्लभ पंत मध्य प्रदेश को ललितपुर तहसील का छोटा सा क्षेत्र, जो उत्तर प्रदेश में होने की वजह से मध्य प्रदेश के डाकुओं का शरण स्थल बन गया है, देने को तैयार नहीं हुए तो बुंदेलखंड के चार जिलों की मांग करने में क्या अक्लमंदी होगी।

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