चाय दिवस आज: इंदौर में चुस्की के साथ चर्चा के कई हैं सदाबहार ठिये, नए स्टार्टअप अमृततुल्य बताकर बेच रहे
विश्व चाय दिवस पर इंदौर में चाय के इतिहास, संस्कृति और बदलते स्वरूप की चर्चा हो रही है। आजादी आंदोलन से जुड़ी पुरानी चाय दुकानों से लेकर आधुनिक टी-कॉफी स्टार्टअप तक, शहर में चाय सामाजिक मेलजोल और व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
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विश्व चाय दिवस गुरुवार को मनाया जाएगा। इस मौके पर इतिहास के पन्ने पलटाएं तो पाते हैं कि भारत में चाय का चलन 200 वर्ष से ज्यादा पुराना नहीं है। भारत में अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के बाद देश में चाय का चलन आरंभ हुआ। चायपत्ती का विधिवत उत्पादन (1820-30) के मध्य शुरू हुआ। देश में चाय के व्यावसायिक उत्पादन का श्रीगणेश 1840 में आसाम टी कंपनी ने किया था।
कहते हैं कि अंग्रेजों ने ही भारतीयों को चाय का शौक लगाया और वे चले गए लेकिन करोड़ों भारतीयों को इसकी लत लगा गए। कहा तो यह भी जाता है कि करोड़ों लोगों को इसकी ऐसी आदत लग चुकी है कि इसके बगैर उन्हें उनका जीवन अधूरा लगता है। कई फिल्मी गीतों में चाय को पीने और पिलाने को बढ़ावा दिया गया है। कई फिल्मी गीत चाय की गीतों के लिए प्रसिद्ध हुए हैं। चाय दुकानों के नए स्टार्टअप अब तो इसे अमृततुल्य बताकर बेच रहे हैं।
इंदौर में मेल मुलाकात के ठिये थे ये
देश आजाद होने के पूर्व इंदौर की कई चाय की दुकानें प्रसिद्ध थीं। ये आजादी के आंदोलनकारियों की चर्चा और मेल-मुलाकात का केंद्र हुआ करती थीं। बजाज खाना चौक में न्यू इंडिया चाय हाउस और नरसिंह बाजार चौराहे पर मामासाहब के कुएं के पास सेंट्रल इंडिया टी हाउस प्रसिद्ध चाय दुकानें रही हैं। बजाज खाना चौक आजादी के दीवानों का मुख्य मिलन स्थान था। इस कारण यह दुकान काफी प्रसिद्ध थी।
अन्य दुकानें जो चर्चा में रही
बॉम्बे बाजार चौराहे पर आगरा टी हाउस और चेतना टी हाउस काफी प्रसिद्ध रहे। साठ के दशक में चंदगीराम के आगमन पर इंदौर में हुए सांप्रदायिक विवाद की केंद्र बिंदु रही चेतना होटल और वहीं पास में स्थित आगरा टी हाउस काफी प्रसिद्ध थी। मल्हारगंज के टोरी कार्नर पर गिरि और ओंकार विजय की चाय की दुकानें काफी प्रसिद्ध थीं। टोरी कार्नर नगर की राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का स्थान रहा।
रंगपंचमी की गेर की जन्मस्थली यही स्थान रहा है। राजबाड़े की राज टी हाउस और कोहिनूर चाय की दुकानें चौबीस घंटे चालू रहती थीं। इमली बाजार चौराहे पर 1922 में खासकर कपड़ा मिलों के मजदूरों के लिए स्वर्गीय चंपालाल सेवाराम जोशी अपनी चाय की दुकान 24 घंटे चालू रखते थे। इसी तरह इंडियन कॉफी हाउस नगर के बुद्धिजीवियों और राजनीतिज्ञों के मिलने के स्थान हुआ करते थे। कई तो आज भी हैं।
मिल क्षेत्र में अधिक थी चाय दुकानें
इंदौर का सूती वस्त्र उद्योग देश भर में प्रसिद्ध था। हजारों की संख्या में कपड़ा मिलों में मजदूर कार्य करते थे। वे अक्सर अपने आपको तरो-ताजा रखने के लिए चाय पिया करते थे, इसलिए मिल क्षेत्रों में चाय की दुकानें अधिक हुआ करती थीं।
अब चाय दुकानों ने आधुनिक रूप लिया
आमतौर पर कॉर्नर या चौराहे की चाय दुकानें अब नए स्वरूप में सामने आई हैं। अब ये युवा वर्ग के मिलने-जुल्ने का स्थान हो गया है। इंदौर में चाय-काफी के 200 से अधिक स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। एक अनुमान के अनुसार इंदौर में 10 से 12 हजार छोटी-बड़ी चाय-कॉफी की दुकानें हैं। चाय-काफी की दुकानें नए और आधुनिक साज-सज्जा के साथ आरंभ हो रही हैं। शहर में प्रदेश के बाहर की भी कई प्रसिद्ध चाय की दुकानें अपना कारोबार कर रही हैं।
चाय के कई फ्लेवर आ गए
आमतौर पर हम अदरक, इलायची और मसालें की चाय पी जाती है, लेकिन अब चाय कई फ्लेवर में जैसे केसर, चॉकलेट, नीबू, पान, पुदीना, आदी बाजार में उपलब्ध है, अब तो गुड़ की चाय भी काफी प्रसिद्ध हो गई है। चाय कप, गिलास और डिस्पोजल में दुकानों पर मिलती है, पर अब कुल्हड़ की चाय काफी बाजार में चलन में है।
बुजुर्गों की राय...अंग्रेजों ने लगाया चस्का
चाय को लेकर हमारे बुजुर्ग अलग ही विचार रखते हैं। 1932 में जन्मे 94 वर्षीय रामराव कुरकुटे, जो पुलिस सेवा में कार्यरत रहे, का कहना है कि उस दौर में चाय पीना प्रचलन में नहीं था। यह तो विदेशी कंपनियों ने हम भारतीयों को चाय का चस्का लगा दिया। वहीं अस्सी वर्षीय प्रकाश जैन का कहना है कि हमारे घर में बचपन में चाय नहीं पी जाती थी। अब तो किसी आगंतुक को चाय नहीं पिलाओ तो कहता है कि खाना तो छोड़ो, हमें चाय तक का नहीं पूछा?
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर कार्यक्रम
चाय दिवस पर इंदौर टी मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा गुरुवार को 56 दुकान पर शाम पांच से छह बजे तक मुफ्त हॉट टी सैंपलिंग का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमे आंगतुक विभिन्न प्रकार की चाय का स्वाद ले सकेंगे।
कब से मनाया जाता है चाय दिवस?
दिसंबर 2019 को पारित एक प्रस्ताव के तहत संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के नेतृत्व में हर साल 21 मई को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य चाय के इतिहास और उसके सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

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