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Indore News: अंतरराष्ट्रीय घुड़सवार के 1.62 करोड़ साइबर सेल ने कराए रिफंड, घोड़ा खरीदने के दौरान हुई थी ठगी
Fri, 03 Jul 2026 11:04 PM IST
इंदौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: इंदौर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 11:04 PM IST
सार
इंदौर की एक अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी खिलाड़ी से घोड़ा खरीदने के दौरान ईमेल स्पूफिंग के जरिए 1.62 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई। राज्य साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई कर राशि होल्ड करवाई और पूरी रकम वापस दिलाई। खिलाड़ी जापान में होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी कर रही हैं।
इंदौर की एक अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी खिलाड़ी से घोड़ा खरीदने के दौरान ईमेल स्पूफिंग के जरिए 1.62 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई। राज्य साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई कर राशि होल्ड करवाई और पूरी रकम वापस दिलाई। खिलाड़ी जापान में होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी कर रही हैं।
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इंदौर सायबर सेल ने वापस दिलाए डेढ़ करोड़
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विस्तार
इंदौर शहर में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस बार साइबर अपराधियों ने इंदौर की एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की घुड़सवारी खिलाड़ी को निशाना बनाया। विदेश से प्रतियोगिता के लिए घोड़ा खरीदने के दौरान ईमेल स्पूफिंग के जरिए उनसे 1 करोड़ 62 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। हालांकि, राज्य साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से पूरी राशि पीड़िता के खाते में वापस करा दी गई।
जानकारी के अनुसार, इंदौर की अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी खिलाड़ी सितंबर-अक्टूबर 2026 में जापान में होने वाले एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने एक विदेशी कंपनी से "बिडेन" नाम का घोड़ा खरीदने का अनुबंध किया था। मार्च 2026 से खिलाड़ी और कंपनी के बीच नियमित वित्तीय लेनदेन चल रहा था। तय कीमत का लगभग 45 प्रतिशत भुगतान कंपनी के अधिकृत बैंक खाते में किया जा चुका था, जिसकी पुष्टि कंपनी ने भी कर दी थी।
ये भी पढ़ें- जहरीले सिरप से तीस बच्चों की मौत के मामले में डॉ. प्रवीण सोनी की दूसरी जमानत याचिका खारिज
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इसी बीच 29 मई 2026 को साइबर ठगों ने कंपनी के संचालक के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर खिलाड़ी को ईमेल भेजा। ईमेल में बताया गया कि तकनीकी कारणों से पुराने बैंक खाते में भुगतान स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसलिए शेष राशि नए बैंक खाते में जमा की जाए। ईमेल को सही मानकर खिलाड़ी ने 1 करोड़ 62 लाख रुपये अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन के बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्होंने कंपनी से भुगतान की पुष्टि की, तब कंपनी ने बताया कि उनके खाते में कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। इसके बाद खिलाड़ी को साइबर ठगी का एहसास हुआ।
पीड़िता ने तत्काल राज्य साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही साइबर सेल ने संबंधित बैंक से संपर्क कर राशि को होल्ड कराया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पूरी रकम पीड़िता के खाते में वापस रिफंड करा दी। साइबर सेल अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले ईमेल की प्रामाणिकता की पुष्टि अवश्य करें। विशेष रूप से बैंक खाते में बदलाव संबंधी ईमेल मिलने पर संबंधित संस्था से सीधे संपर्क कर जानकारी सत्यापित करें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से इस मामले में बड़ी आर्थिक क्षति टल गई।
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जानकारी के अनुसार, इंदौर की अंतरराष्ट्रीय घुड़सवारी खिलाड़ी सितंबर-अक्टूबर 2026 में जापान में होने वाले एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने एक विदेशी कंपनी से "बिडेन" नाम का घोड़ा खरीदने का अनुबंध किया था। मार्च 2026 से खिलाड़ी और कंपनी के बीच नियमित वित्तीय लेनदेन चल रहा था। तय कीमत का लगभग 45 प्रतिशत भुगतान कंपनी के अधिकृत बैंक खाते में किया जा चुका था, जिसकी पुष्टि कंपनी ने भी कर दी थी।
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इसी बीच 29 मई 2026 को साइबर ठगों ने कंपनी के संचालक के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर खिलाड़ी को ईमेल भेजा। ईमेल में बताया गया कि तकनीकी कारणों से पुराने बैंक खाते में भुगतान स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसलिए शेष राशि नए बैंक खाते में जमा की जाए। ईमेल को सही मानकर खिलाड़ी ने 1 करोड़ 62 लाख रुपये अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन के बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्होंने कंपनी से भुगतान की पुष्टि की, तब कंपनी ने बताया कि उनके खाते में कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। इसके बाद खिलाड़ी को साइबर ठगी का एहसास हुआ।
पीड़िता ने तत्काल राज्य साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही साइबर सेल ने संबंधित बैंक से संपर्क कर राशि को होल्ड कराया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पूरी रकम पीड़िता के खाते में वापस रिफंड करा दी। साइबर सेल अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले ईमेल की प्रामाणिकता की पुष्टि अवश्य करें। विशेष रूप से बैंक खाते में बदलाव संबंधी ईमेल मिलने पर संबंधित संस्था से सीधे संपर्क कर जानकारी सत्यापित करें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से इस मामले में बड़ी आर्थिक क्षति टल गई।
