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इंदौर में और भी भागीरथपुरा बनने की आहट: उद्योगों के केमिकल वेस्ट से जहरीला हुआ भूजल, घरों तक पहुंचा गंदा पानी

Arjun Richhariya अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 01 Feb 2026 07:11 AM IST
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सार

Indore: इंदौर के औद्योगिक इलाकों में उद्योगों के केमिकल वेस्ट से भूजल दूषित हो रहा है। बोरिंग का पानी पीने योग्य नहीं रहा। लापरवाही जारी रही तो भागीरथपुरा जैसी बड़ी त्रासदी की आशंका है।

The possibility of more Bhagirathpura emerging in Indore Groundwater poisoned chemical waste from industries
दूषित पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्वच्छता में देश में अव्वल रहने वाला इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के कारण दुनिया भर में शर्मसार हो चुका है। इसके बावजूद शहर में नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही। औद्योगिक क्षेत्रों और उनसे सटी रिहायशी बस्तियों में हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे की चेतावनी दे रहे हैं।

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उद्योगों के दूषित जल से हजारों लोग प्रभावित
सांवेर रोड, एमआर-10 और पालदा जैसे औद्योगिक इलाकों में उद्योगों से निकलने वाला केमिकल युक्त अपशिष्ट जल अब सीधे भूजल में मिल रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि स्थानीय निवासियों के बोरिंग से निकलने वाला पानी न तो पीने योग्य बचा है और न ही नहाने या कपड़े धोने लायक। सड़कों पर बहता ज़हरीला पानी और गंदगी जलजनित बीमारियों को न्योता दे रही है, वहीं मच्छरों की भरमार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।

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घरों तक पहुंचा उद्योगों का ज़हर
स्थानीय लोगों का कहना है कि उद्योगों का अपशिष्ट पानी नालियों के बजाय सड़कों पर बहाया जा रहा है। यही पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसकर बोरिंग के जल को दूषित कर रहा है। कई इलाकों में बोरिंग का पानी पीले रंग का हो गया है और उसमें तेज बदबू आ रही है।

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स्थानीय निवासियों की पीड़ा
सांवेर रोड क्षेत्र के निवासी चेतन सिंह बताते हैं, हमारे घर के बोरिंग का पानी अब काला पड़ चुका है। इसे पीने से बच्चों को पेट के इन्फेक्शन और त्वचा की गंभीर बीमारियां हो रही हैं। कई बार शिकायत की, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। गृहिणी सुनीता बाई का कहना है कि सड़कों पर जमा केमिकल युक्त पानी से इतनी बदबू आती है कि घर में बैठना मुश्किल हो गया है। मच्छरों के कारण रात-दिन चैन नहीं है।  


महामारी का रूप ले सकती है लापरवाही
स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीषा मिश्रा ने बताया कि केमिकल युक्त भूजल का सेवन कैंसर, किडनी की बीमारी और गंभीर त्वचा रोगों का कारण बन सकता है। सड़कों पर जमा दूषित पानी से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या महामारी का रूप ले सकती है।



प्रशासन के दावे
सीएमएचओ माधव हसानी ने बताया कि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार बोरिंग के पानी की सैंपलिंग कर रही हैं। औद्योगिक इकाइयों की भी जांच की जा रही है। भागीरथपुरा की घटना के बाद जांच और सख्त की गई है। वहीं, वार्ड पार्षद सोनाली विजय परमार का कहना है कि क्षेत्र में तेजी से औद्योगिक विकास हो रहा है। जहां से भी दूषित पानी बहने की शिकायत मिलती है, वहां तुरंत समाधान किया जाता है।

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