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Jabalpur: दहेज प्रताड़ना केस में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, समझौते के बाद मुकदमा जारी रखना कानून का दुरुपयोग
Wed, 22 Jul 2026 01:55 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 01:55 PM IST
सार
जबलपुर में दहेज प्रतिषेध अधिनियम के एक मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने समझौते के बाद दर्ज एफआईआर निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि सक्षम न्यायालय में समझौते के बाद आपराधिक मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और उत्पीड़न है।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जबलपुर में घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत समक्ष न्यायालय के समक्ष लंबित मुकदमे वापस लेने की शर्त पर आपसी समझौता हुआ था। आपसी समझौते के बाद भी पत्नी दहेज एक्ट के तहत पति तथा ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज प्रकरण वापस लेने को तैयार नही थी। हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने दहेज एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त करते हुए अपने आदेष में कहा है कि सक्षम अदालत में समझौते के बाद आपराधिक मुकदमा जारी रखना उत्पीड़न है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायतकर्ता ने खिलाफ सामान्य आरोप लगाये है। याचिकाकर्ता सास व ननद के खिलाफ आरोप बहुत सामान्य प्रकृति के हैं। याचिकाकर्ता ननंद शादीशुदा है और जबलपुर में अपने पति के साथ अलग रहती है। ऐसा लगता है कि उसे केवल पति के साथ उसके रिश्ते के कारण फंसाया गया है। आपराधिक मुकदमे को पति के साथ रिश्ते की वजह से रिश्तेदारों के खिलाफ जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
जानें कब दर्ज हुआ था प्रकरण?
पन्ना निवासी तौसीफ राइन व अन्य की तरफ की से दहेज एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त किये जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि तौसीफ की विवाह 25 दिसम्बर 2017 को हुआ था। पत्नी के द्वारा साल 2020 में पति सहित सासःससुर सहित विवाहित ननद तथा देवर के खिलाफ दहेज एक्ट का प्रकरण दर्ज करवा दिया। पत्नी के द्वारा ससुराल छोड़कर जाने के बाद उनके खिलाफ दहेज एक्ट का प्रकरण दर्ज करवाया था,जो न्यायालय में लंबित है।
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दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद काफी हद तक खत्म हो चुका
एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि सक्षम अदालत में घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत कार्यवाही के दौरान आपसी समझौते को मंजूरी दी थी। जिसमें शिकायतकर्ता ने उल्लेख किया था कि उसे अपना सारा स्त्रीधन, शादी का सामान, मेहर की रकम और कार मिल गई है और वह सभी लंबित मुकदमे वापस ले लेगी। समझौते में शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर है। शिकायतकर्ता ने याचिका का विरोध किया पर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। समझौते में उल्लेख किया गया है कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद काफी हद तक खत्म हो चुका है। ऐसे हालात में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से न्याय नहीं होगा। दोनेा पक्षों के बीच मुकदमेबाजी लंबी खिंचेगी।
ये भी पढ़ें- Indore: विपिन रघुवंशी ने कहा-सोनम ने मेरे भाई की हत्या की, लेकिन कोर्ट में हमेशा झूठ बोला
चार्ज.शीट में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ क्रूरता या दहेज की मांग के विशिष्ट कार्यों को साबित करता हो। विवादों के निपटारे और विशिष्ट आरोपों के अभाव के बावजूद आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से उत्पीड़न होता है। सक्षम अदालत के सामने दोनो के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए आपराधिक मुकदमा जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायतकर्ता ने खिलाफ सामान्य आरोप लगाये है। याचिकाकर्ता सास व ननद के खिलाफ आरोप बहुत सामान्य प्रकृति के हैं। याचिकाकर्ता ननंद शादीशुदा है और जबलपुर में अपने पति के साथ अलग रहती है। ऐसा लगता है कि उसे केवल पति के साथ उसके रिश्ते के कारण फंसाया गया है। आपराधिक मुकदमे को पति के साथ रिश्ते की वजह से रिश्तेदारों के खिलाफ जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
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जानें कब दर्ज हुआ था प्रकरण?
पन्ना निवासी तौसीफ राइन व अन्य की तरफ की से दहेज एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त किये जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि तौसीफ की विवाह 25 दिसम्बर 2017 को हुआ था। पत्नी के द्वारा साल 2020 में पति सहित सासःससुर सहित विवाहित ननद तथा देवर के खिलाफ दहेज एक्ट का प्रकरण दर्ज करवा दिया। पत्नी के द्वारा ससुराल छोड़कर जाने के बाद उनके खिलाफ दहेज एक्ट का प्रकरण दर्ज करवाया था,जो न्यायालय में लंबित है।
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दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद काफी हद तक खत्म हो चुका
एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि सक्षम अदालत में घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत कार्यवाही के दौरान आपसी समझौते को मंजूरी दी थी। जिसमें शिकायतकर्ता ने उल्लेख किया था कि उसे अपना सारा स्त्रीधन, शादी का सामान, मेहर की रकम और कार मिल गई है और वह सभी लंबित मुकदमे वापस ले लेगी। समझौते में शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर है। शिकायतकर्ता ने याचिका का विरोध किया पर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। समझौते में उल्लेख किया गया है कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद काफी हद तक खत्म हो चुका है। ऐसे हालात में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से न्याय नहीं होगा। दोनेा पक्षों के बीच मुकदमेबाजी लंबी खिंचेगी।
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चार्ज.शीट में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ क्रूरता या दहेज की मांग के विशिष्ट कार्यों को साबित करता हो। विवादों के निपटारे और विशिष्ट आरोपों के अभाव के बावजूद आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से उत्पीड़न होता है। सक्षम अदालत के सामने दोनो के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए आपराधिक मुकदमा जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
