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Jabalpur News: प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट सख्त, 60 दिन में जांच पूरी करने के आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 24 Apr 2026 05:56 PM IST
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सार

प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाईकोर्ट ने समयबद्ध जांच के आदेश दिए हैं। अदालत के निर्देश के बाद अब उच्च स्तरीय समिति को तय अवधि में पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

Jabalpur News: High Court Gets Tough in Pratima Bagri Caste Certificate Case, Orders Probe Within 60 Days
प्रतिमा बागड़ी के जाति प्रमाण पत्र पर हाईकोर्ट के सख्त आदेश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री तथा सतना के रैगांव विधानसभा से विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एके सिंह ने प्रदेश स्तरीय हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को निर्देशित किया है कि वह 60 दिनों के अंदर राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की जांच करते हुए आदेश पारित करे। कमेटी निर्धारित समय अवधि में आदेश का पालन नहीं करती है तो याचिकाकर्ता पुनः याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र है।

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बता दें कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार (इटारसी) की तरफ से याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने सतना जिले में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रैगवां सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। चुनाव लडने के लिए उनकी तरफ से एससी वर्ग के होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया था। याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति में नहीं आती हैं। उन्होंने गलत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था।

30 जून तक होगा आदेश पारित
याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश दिया गया कि हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी अनावेदक को सुनवाई का अवसर प्रदान करे और नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 60 दिनों में फैसला लेकर याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी प्रदान करे। सरकार की तरफ से इस बात पर सहमति व्यक्त की गई। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि कमेटी 30 जून 2026 तक आदेश पारित नहीं करती है तो याचिकाकर्ता याचिका को पुन: दायर करने के लिए स्वतंत्र है।

समय सीमा में पूरी होगी जांच
याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से अनुसूचित जाति वर्ग का लाभ लेता है, तो इससे वास्तविक पात्र लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं। फिलहाल कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले की जांच तय समय सीमा में पूरी की जाएगी।
 

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