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Jabalpur News: जज को फोन करने के मामले में विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट में उपस्थित होकर मांगी माफी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Tue, 21 Apr 2026 08:22 PM IST
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सार
भाजपा विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट जज को फोन करने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगी है। विधायक ने इसे अनजाने में हुई गलती बताया।
(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के कद्दावर भाजपा विधायक संजय पाठक मंगलवार को न्यायपालिका के सम्मान में हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे। जस्टिस विशाल मिश्रा को फोन करने के चलते शुरू हुई आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही में विधायक ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 14 मई तय की है।
'गलती से लग गया था जज को फोन': विधायक की दलील
हाईकोर्ट की युगलपीठ के सामने पेश हुए विधायक संजय पाठक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनसे 'गलती' से हाईकोर्ट जज को फोन लग गया था। उन्होंने अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने के किसी भी इरादे से इनकार करते हुए अपनी भूल स्वीकार की। बता दें कि पिछली सुनवाई में विधायक की ओर से हलफनामा भी पेश किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे कानून का सम्मान करते हैं और यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते जनहित याचिका का रूप ले चुका है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित ने एक याचिका दायर की। याचिका के अनुसार, विधायक संजय पाठक की कंपनी से जुड़े अवैध उत्खनन के मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच में सुनवाई होनी थी। 1 सितंबर 2025 को जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को इस केस से यह कहते हुए अलग कर लिया था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की है। उन्होंने निष्पक्षता का हवाला देते हुए मामले को चीफ जस्टिस के पास भेजने का निर्देश दिया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने इसे आपराधिक अवमानना माना।
हाईकोर्ट ने पूर्व में 2 अप्रैल को इस मामले का संज्ञान लेते हुए भाजपा विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित के हस्तक्षेपकर्ता (Intervener) बनने के आवेदन को निरस्त कर दिया, हालांकि उन्हें अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली पेशी यानी 14 मई को भी विधायक संजय पाठक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर रहना होगा।
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'गलती से लग गया था जज को फोन': विधायक की दलील
हाईकोर्ट की युगलपीठ के सामने पेश हुए विधायक संजय पाठक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनसे 'गलती' से हाईकोर्ट जज को फोन लग गया था। उन्होंने अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने के किसी भी इरादे से इनकार करते हुए अपनी भूल स्वीकार की। बता दें कि पिछली सुनवाई में विधायक की ओर से हलफनामा भी पेश किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे कानून का सम्मान करते हैं और यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते जनहित याचिका का रूप ले चुका है।
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क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित ने एक याचिका दायर की। याचिका के अनुसार, विधायक संजय पाठक की कंपनी से जुड़े अवैध उत्खनन के मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच में सुनवाई होनी थी। 1 सितंबर 2025 को जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को इस केस से यह कहते हुए अलग कर लिया था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की है। उन्होंने निष्पक्षता का हवाला देते हुए मामले को चीफ जस्टिस के पास भेजने का निर्देश दिया था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने इसे आपराधिक अवमानना माना।
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हाईकोर्ट का कड़ा रुख और अगली सुनवाईहाईकोर्ट ने पूर्व में 2 अप्रैल को इस मामले का संज्ञान लेते हुए भाजपा विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित के हस्तक्षेपकर्ता (Intervener) बनने के आवेदन को निरस्त कर दिया, हालांकि उन्हें अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली पेशी यानी 14 मई को भी विधायक संजय पाठक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर रहना होगा।

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