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MP News: कोयला घोटाले में SECL के चार कर्मचारियों को सजा, सीबीआई कोर्ट ने दो लाख 40 हजार का अर्थदंड भी लगाया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 04 Jun 2026 08:17 AM IST
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सार

अनूपपुर की बहेराबंद भूमिगत खदान में 11,382 मीट्रिक टन कोयले की कमी से जुड़े घोटाले में सीबीआई विशेष न्यायालय ने एसईसीएल के चार कर्मचारियों को दोषी ठहराया। दो आरोपियों को 4-4 वर्ष और दो को 1-1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही कुल 2.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। 

Four SECL employees sentenced in coal scam
सीबीआई के विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोयला घोटाला में एसईसीएल के चार कर्मचारियों को सीबीआई विशेष न्यायालय ने दोषी करार देते हुए सजा से दंडित किया है। सीबीआई विशेष न्यायालय के न्यायाधीश रूपेश कुमार गुप्ता ने विभिन्न धाराओं के तहत दो दोषियों को चार-चार साल तथा दो दोषियों को एक-एक साल की सजा से दंडित किया है। विशेष न्यायालय ने आरोपियों को दो लाख 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से भी दंडित किया है।

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सीबीआई की तरफ पैरवी करते हुए अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने विशेष न्यायालय को बताया कि एसईसीएल हसदेव एरिया के अंतर्गत बहेराबन्द भूमिगत खदान जिला अनूपपुर में कोयले के स्टॉक में घोटाले के संबंध में जानकारी मिली थी। इसके बाद एसईसीएल बिलासपुर के सतर्कता विभाग एवं सीबीआई जबलपुर के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा बहेराबन्द भूमिगत खान के अनुमोदित कोल स्टॉक यार्ड में कोयले की उपलब्ध मात्रा की जांच करने संयुक्त निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में बहेराबन्द कोल स्टॉक यार्ड में बुक स्टॉक की तुलना में लगभग 11382 मीट्रिक टन कोल की मात्रा कम पाई गई थी।
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सीबीआई जबलपुर ने एसईसीएल के चार कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विवेचना के बाद उनके खिलाफ विशेष न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया था। विशेष न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी ए के गोस्वामी एवं आरएल प्रसाद को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 तथा निवारण अधिनियम के अंतर्गत अधिकतम 4 साल के कठोर कारावास तथा 1 लाख 15 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। न्यायालय में प्रकरण में सह आरोपी एमएम शर्मा एवं आरडी दीवान को धारा 218 व 34 के तहत दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास एवं 5 हजार रुपये के जुर्माना से दंडित किया गया है।

 

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