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पदोन्नति में आरक्षण: सभी पद आरक्षण से भरे तो समानता का क्या होगा, सरकारी रिपोर्ट से असंतुष्ट हाईकोर्ट का सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Oct 2025 11:23 PM IST
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सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सरकार ने सीलबंद लिफाफे में क्वांटिफायबल डेटा पेश किया। कोर्ट ने आंकड़ों पर असंतोष जताते हुए कहा कि सभी पद आरक्षित वर्ग से भरे हैं। सरकार से स्पष्टीकरण या संशोधित डेटा मांगा गया, अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सरकार ने सीलबंद लिफाफे में क्वांटिफायबल डेटा पेश किया। कोर्ट ने आंकड़ों पर असंतोष जताते हुए कहा कि सभी पद आरक्षित वर्ग से भरे हैं। सरकार से स्पष्टीकरण या संशोधित डेटा मांगा गया, अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
सभी पद आरक्षण से भरे गये तो सामान्यता का क्या होगा
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सीलबंद लिफाफे में क्वांटिफायबल डाटा पेश किया। हाईकोर्ट ने किसी एक विभाग के आंकड़े देखने के बाद आश्चर्य जताते हुए कहा कि इसमें तो सभी पद आरक्षित वर्ग से भरे हैं, ऐसे में समानता का क्या होगा? चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में प्रथमदृष्टया सरकार के आंकड़ों और जवाब पर असंतोष व्यक्त किया। युगलपीठ ने सरकार को निर्देशित किया कि पेश किए गए क्वांटिफायबल डाटा के संबंध में स्पष्टीकरण पेश करें या संशोधन करें। याचिका पर अगली सुनवाई 12 नवंबर को निर्धारित की है।
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उल्लेखनीय है कि ये मामले भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से दायर किए गए हैं। याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाममात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए। वहीं, मामले में अजाक्स संघ सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की हैं। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था कि नई प्रमोशन पॉलिसी 2016 के बाद के प्रमोशन पर लागू होगी, जबकि 2016 से पहले के प्रमोशन में वर्ष 2002 के नियमों प्रभावी रहेंगे। इसके बाद के प्रमोशन में वर्ष 2025 के नियम प्रभावी होंगे। इस पर न्यायालय ने सरकार को नए नियम के अनुसार क्वांटिफायबल डेटा एकत्र करते हुए सील बंद लिफाफे में पेश करने के निर्देश दिए थे। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद सरकार से पेश आंकड़ों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
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उल्लेखनीय है कि ये मामले भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से दायर किए गए हैं। याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाममात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए। वहीं, मामले में अजाक्स संघ सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की हैं। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था कि नई प्रमोशन पॉलिसी 2016 के बाद के प्रमोशन पर लागू होगी, जबकि 2016 से पहले के प्रमोशन में वर्ष 2002 के नियमों प्रभावी रहेंगे। इसके बाद के प्रमोशन में वर्ष 2025 के नियम प्रभावी होंगे। इस पर न्यायालय ने सरकार को नए नियम के अनुसार क्वांटिफायबल डेटा एकत्र करते हुए सील बंद लिफाफे में पेश करने के निर्देश दिए थे। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद सरकार से पेश आंकड़ों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।

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