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Jabalpur News: बेटी की हत्या के अपराध में मां दोषमुक्त, हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा को किया निरस्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Mon, 15 Dec 2025 09:29 PM IST
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सार
हाईकोर्ट ने मासूम बेटी की हत्या के आरोप में मां को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि अस्पताल में दर्ज कथित मृत्युपूर्व बयान के समय महिला मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थी। जिला न्यायालय का आदेश निरस्त कर आजीवन कारावास की सजा रद्द की गई।
मप्र हाईकोर्ट: बेटी की हत्या के अपराध में मां दोषमुक्त
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विस्तार
मां के पक्ष पर राहतकारी आदेश जारी करते हुए मासूम बेटी की हत्या के आरोप में दोषमुक्त कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि अस्पताल में मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किए जाने के संबंध में अपीलकर्ता मां की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। अस्पताल में दिए गए बयान के समय अपीलकर्ता महिला के बिस्तर में बेटी के शव के साथ लेटी हुई थी। इसलिए उसके बयान को कबूलनामा नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ जिला न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता मां को दोषमुक्त कर दिया।
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मुलताई निवासी ज्योति डोंगरदिए उम्र 30 साल की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि उसकी बेटी इशिता 5 मार्च 2023 को कुंए में गिर गई थी। जिसे बचाने के लिए उसने भी कुंए में छलांग लगा दी थी। इस घटना में उसकी बेटी की मौत हो गई थी और उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में उसके मृत्युपूर्व बयान दर्ज किए गए थे। उसमें उसने माना था वह अपनी बेटी के साथ कुंए में कूदी थी। अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया था कि जिला न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई के दौरान सभी अभियोजन साक्षी ने माना था कि वह अपनी बच्चों को बचाने के लिए कुंए मे कूदी थी। इसके बावजूद भी जिला न्यायालय ने तथाकथित मृत्युपूर्व बयान के आधार पर उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया, जो कानून के सिद्धांत के विरुद्ध है।
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युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपीलकर्ता के मृत्युपूर्व बयान अस्पताल में दर्ज किए गए थे। डॉक्टर ने लिखित में दिया था कि मरीज सहमति देने को तैयार है, लेकिन उन्होंने यह नहीं लिखा है कि वह बयान देने के लिए फिट मेंटल कंडीशन में है। वह लंबा जवाब नहीं दे पा रही थी और धीमी आवाज़ में धीरे-धीरे बोल रही थी। बेटी की मौत से वह दुखी थी और अस्पताल में बेटी के शव के साथ बिस्तर में लेटी हुई थी।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दो कारणों से अपीलकर्ता के कानूनी कबूलनामा पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। अभियोजन ने ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं किया है कि बयान को एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल कन्फेशन मानकर उसे दोषी ठहराया जा सके। इसके अलावा प्रकरण में जरूरी तथ्य भी उपलब्ध नहीं हैं कि जिससे यह पता चल सके कि अपीलकर्ता मां अपनी बेटी की हत्या करना चाहती थी। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अपीलकर्ता मां को बेटी की हत्या के आरोप में दोषमुक्त कर दिया।

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