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MP News: मातृत्व अधिकार पर हाईकोर्ट सख्त! गेस्ट फैकल्टी को भी मिलेगा पूरा वेतन, 26 हफ्ते की छुट्टी का आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: Ashutosh Pratap Singh Updated Thu, 09 Apr 2026 11:01 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि महिला गेस्ट फैकल्टी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता। जबलपुर हाईकोर्ट की जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 का हवाला देते हुए डॉ प्रीति साकेत को 26 सप्ताह का सवैतनिक अवकाश देने का निर्देश दिया।

mp high court maternity leave guest faculty paid 26 weeks dr preeti saket case maternity benefit act 1961
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए कहा है कि महिला गेस्ट फैकल्टी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय देते हुए 26 सप्ताह का सवैतनिक अवकाश देने के निर्देश दिए हैं।
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जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के प्रावधानों का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन का अधिकार है।
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डॉ प्रीति साकेत ने लगाई थी याचिका
कटनी के शासकीय तिलक पीजी कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के पद पर कार्यरत डॉ प्रीति साकेत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता हितेंद्र गोल्हानी और काजल विश्वकर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता को पहले 6 महीने का मातृत्व अवकाश वेतन सहित स्वीकृत किया गया था।

कॉलेज ने बाद में बदला आदेश
16 जून 2023 को कॉलेज प्रशासन ने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि अवकाश अवधि में कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा। इस संशोधित आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत हर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन पाने का अधिकार है। प्रशासन द्वारा आदेश में संशोधन कर मानदेय रोकना कानून के खिलाफ है और महिला कर्मचारी के अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता को उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है।

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राज्य सरकार का पक्ष
वहीं राज्य की ओर से कहा गया कि गेस्ट फैकल्टी एक अस्थायी नियुक्ति होती है। संबंधित शासकीय सर्कुलर के अनुसार उन्हें मानदेय देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए पहले के आदेश में संशोधन किया गया। सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारी के अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए याचिकाकर्ता को 26 सप्ताह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया।
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