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Jabalpur: कांग्रेस आईटी सेल कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, राजस्थान पुलिस ने कोर्ट के सामने गलती मानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 30 Apr 2026 03:30 PM IST
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सार

वसुंधरा राजे के फर्जी वायरल पत्र के मामले में कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को लेकर राजस्थान पुलिस ने हाईकोर्ट में गलती स्वीकार की है।

Jabalpur: Questions raised over arrest of Congress IT cell workers, Rajasthan Police admits lapse in court
जबलपुर हाईकोर्ट
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विस्तार

भोपाल से गिरफ्तार कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई त्रुटि को राजस्थान पुलिस ने हाईकोर्ट में स्वीकार किया है। कोर्ट को बताया गया कि मामले की जांच सक्षम अधिकारी से कराई जाएगी। इस पर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने तीनों युवकों के बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

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मामला पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल फर्जी पत्र से जुड़ा है। इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से भोपाल से तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। इसके खिलाफ खिजर खान की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि 20 अप्रैल 2026 को तड़के तीनों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और समय पर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।
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सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश शासन की ओर से बताया गया कि राजस्थान पुलिस की सूचना पर तीनों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और बाद में परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद एफआईआर दर्ज होने की सूचना मिलने पर उन्हें दोबारा साइबर सेल बुलाया गया और राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया।

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हाईकोर्ट के निर्देश पर तीनों युवकों को युगल पीठ के समक्ष पेश किया गया। राजस्थान पुलिस ने कोर्ट में कहा कि युवकों को 22 अप्रैल को विधिवत गिरफ्तार कर उसी दिन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था। उन्हें जयपुर की अदालत से जमानत मिल चुकी है, लेकिन शर्तें पूरी नहीं होने के कारण वे अभी हिरासत में हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि युवक स्वयं मध्य प्रदेश पुलिस के साथ जयपुर पहुंचे थे।

वहीं युवकों ने पुलिस के दावों को गलत बताते हुए अपनी अलग बात रखी। इस पर कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जबलपुर को निर्देश दिए कि किसी अधिकारी की नियुक्ति कर तीनों के अलग-अलग बयान दर्ज किए जाएं और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जाए। बयान दर्ज होने के बाद युवकों को जयपुर भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

साथ ही कोर्ट ने जयपुर के डीआईजी क्राइम और भोपाल के डीसीपी क्राइम को भी निर्देश दिया है कि वे आपसी बातचीत से लेकर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी तक की पूरी प्रक्रिया का शपथ-पत्र प्रस्तुत करें।

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