फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Relief for Army officer in wife's death case

Jabalpur News: पत्नी की मौत के मामले में सैन्य अधिकारी को हाईकोर्ट से राहत, पूर्व आदेश वापस

Wed, 12 Aug 2026 09:44 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 12 Aug 2026 09:44 PM IST
सार

पत्नी की मौत के मामले में सैन्य अधिकारी मेजर ओम नागार्जुन को हाईकोर्ट से राहत मिली। कोर्ट ने पाया कि पहले दायर याचिका में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए थे। इसके चलते सक्षम प्राधिकारी को अभ्यावेदन देने की अनुमति वाला पूर्व आदेश निरस्त कर दिया।

विज्ञापन
Relief for Army officer in wife's death case
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पत्नी की मौत के मामले में उसके परिजनों को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देने वाले अपने पूर्व आदेश के खिलाफ एक सैन्य अधिकारी द्वारा दायर रिव्यू याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राहत दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने पाया कि पहले दायर याचिका में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया था। इसके बाद कोर्ट ने अपना पूर्व आदेश वापस लेते हुए उसे निरस्त कर दिया।

विज्ञापन

रिव्यू याचिका मेजर ओम नागार्जुन की ओर से दायर की गई थी। याचिका में बताया गया कि स्थानांतरण के बाद वह 9 जुलाई 2025 को अपनी पत्नी कविता के साथ जबलपुर पहुंचे थे और ऑफिसर्स मेस में ठहरे थे। रात में भोजन के बाद उनकी पत्नी बाथरूम में गिरकर बेहोश हो गईं। इसके बाद उन्होंने एक अन्य सैन्य अधिकारी की मदद से पत्नी को मिलिट्री अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान 10 जुलाई 2025 को उनकी मृत्यु हो गई।

विज्ञापन

मृतका के पिता पी. दक्षिणामूर्ति ने बेटी की मौत की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में उन्होंने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस ले ली थी। इसी स्वतंत्रता को चुनौती देते हुए मेजर ओम नागार्जुन ने रिव्यू याचिका दायर की।

विज्ञापन
विज्ञापन


पढे़ं:  स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के खाते से 1.76 लाख की साइबर ठगी, बिना मैसेज उड़ गई रकम 

रिव्यू याचिका में कहा गया कि मूल याचिका में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया। मृतका के पिता की शिकायत पर जबलपुर पुलिस अधीक्षक, सेना के सक्षम अधिकारियों (जिसमें राइफल्स रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर के विधि अधिकारी भी शामिल थे) तथा तमिलनाडु के डिंडीगुल पुलिस अधिकारियों ने जांच की थी। जांच में किसी संज्ञेय अपराध की पुष्टि नहीं हुई। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु का कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर (हृदय और श्वसन क्रिया बंद होना) पाया गया।

याचिका में यह भी बताया गया कि मृतका के पिता ने मेजर ओम नागार्जुन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए जेएमएफसी कोर्ट, जबलपुर में आवेदन दिया था। पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद जेएमएफसी ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने सत्र न्यायालय में चुनौती दी, जहां मामला लंबित है।

रिव्यू याचिका के अनुसार, सत्र न्यायालय में मामला लंबित रहने के बावजूद मृतका के पिता ने जबलपुर हाईकोर्ट से सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन देने की अनुमति प्राप्त कर ली। साथ ही, इससे पहले उन्होंने इसी मामले में मद्रास हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था, लेकिन इन तथ्यों का उल्लेख जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका में नहीं किया गया। इसे महत्वपूर्ण तथ्य छिपाना मानते हुए हाईकोर्ट ने अपना पूर्व आदेश निरस्त कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed