Jabalpur News: दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर रोक, हाईकोर्ट ने डीईओ से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
जबलपुर में दिव्यांग बच्चों को स्कूलों से निकाले जाने के मामले में हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए डीईओ को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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जबलपुर में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण स्कूलों से दिव्यांग बच्चों को निकाले जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकाले जाने पर रोक लगा दी है। युगलपीठ ने जबलपुर के विभिन्न स्कूलों में अध्ययनरत दिव्यांग यानी विशेष बच्चों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए हैं।
जबलपुर निवासी सौरभ सुबैया की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर में लगभग 50 शासकीय और 200 निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें काफी संख्या में दिव्यांग बच्चे पढ़ते हैं। विशेष बच्चों में कई बोल नहीं पाते, तो कई सुन नहीं सकते हैं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के अंतर्गत विशेष शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है। इसके बावजूद स्कूलों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। इस तरह कानून का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है।
'मौलिक अधिकार का उल्लंघन'
विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण दिव्यांग बच्चों को स्कूलों से बाहर कर दिया जाता है, जो उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। सरकारी स्कूलों के अलावा निजी स्कूलों में भी विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती है। याचिका में कहा गया था कि दो निजी स्कूलों ने दिव्यांग बच्चों को स्कूल से बाहर कर दिया है।
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याचिका में यह भी कहा गया था कि निजी स्कूलों की मनमानी पर ठोस अंकुश सुनिश्चित किया जाए और शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए समुचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिए। युगलपीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी, जबलपुर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 29 अप्रैल को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेन्द्र पांडे ने पैरवी की।

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