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Jabalpur News: दुराचार नहीं नाबालिग का हुआ था यौन उत्पीड़न, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को चार साल में बदला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 03 Jul 2025 05:12 PM IST
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सार

हाईकोर्ट की युगलपीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की उम्रकैद को चार साल के कारावास में बदला। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने दुराचार नहीं किया बल्कि यौन उत्पीड़न किया। मेडिकल रिपोर्ट में कोई चोट नहीं मिली और पीड़िता ने भी ट्रायल कोर्ट में बयान से मुकर गई थी। 

The minor was sexually assaulted, not molested
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद को चार वर्ष के कारावास में तब्दील कर दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी द्वारा पीड़िता के साथ दुराचार नहीं किया गया है। पीड़िता यौन उत्पीड़न का शिकार हुई है। जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में भी पीड़िता को गुप्तांग में अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं है।

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सिंगरौली निवासी विन्द्रोस राव पॉक्सो एक्ट के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा 11 सितम्बर 2023 को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। अपील में कहा गया था कि डीएनए रिपोर्ट के आधार पर सजा दी गई। डीएनए रिपोर्ट का मिलान पीड़िता के टीशर्ट मेंं तथा शरीर के नीचे अंग में मिले धब्बे से किया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर में कहीं भी अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं पाई गई है। पीड़िता तथा उसकी दादी ट्रायल कोर्ट में अपने बयान से मुकर गई थी। उनका कहना था कि उन्होंने पुलिस के दबाव में आकर आरोप लगाया था। इसके कारण उन्हें पक्ष विरोधी घोषित कर दिया गया था।

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युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अभियोक्ता के निजी अंगों पर किसी भी तरह के घर्षण, लालिमा, चोट या किसी अन्य चोट के कोई निशान नहीं थे। प्रवेशात्मक यौन हमला नहीं होने के कारण उसे एक्ट की धारा 5 व 6 के तहत दोषी करार नहीं दिया जा सकता है। यौन उत्पीड़न की शिकार हुई है और अधिनियम की धारा 7 इसके तहत सजा का प्रावधान है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अपीलकर्ता की सजा घटाकर चार साल के कारावास में तब्दील करने के आदेश जारी किए हैं। 

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