{"_id":"6a81d4e4449e303d4400af3c","slug":"maheshwar-dispute-over-honour-at-independence-day-celebrations-2026-08-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maheshwar: स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मान को लेकर विवाद, दोनों पक्षों के दावों से सामने आई अलग-अलग तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maheshwar: स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मान को लेकर विवाद, दोनों पक्षों के दावों से सामने आई अलग-अलग तस्वीर
Sun, 16 Aug 2026 08:49 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 16 Aug 2026 08:49 PM IST
सार
स्वतंत्रता दिवस समारोह में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर विवाद सामने आया। नगर परिषद अध्यक्ष अलका गजराज यादव ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस पार्षद गजेंद्र मकवाने का नाम सम्मान सूची से छूटने के बाद कहासुनी हुई। प्रशासन ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया, जबकि प्रोटोकॉल पर सवाल उठे।
विज्ञापन
समारोह में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर उपजा विवाद अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर आयोजित समारोह में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर उपजा विवाद अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। मामले में सामने आए अलग-अलग पक्षों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि विवाद की शुरुआत केवल बैठक व्यवस्था को लेकर नहीं हुई थी, बल्कि कांग्रेस पार्षद का नाम एवं सम्मान समारोह में उनकी उपस्थिति को लेकर स्थिति बिगड़ी।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार समारोह के दौरान नप अध्यक्ष अलका गजराज यादव को मंच से तथा व्यक्तिगत रूप से पहली पंक्ति में बैठने का आग्रह किया गया था, लेकिन उन्होंने वहां बैठना स्वीकार नहीं किया। विद्यालय प्राचार्य का कहना है कि उनके तथा स्टाफ की ओर से नगर अध्यक्ष को लिखित व मौखिक रूप से भी आमंत्रित किया गया था। विधायक राजकुमार मेव ने भी आगे बैठने का आग्रह किया और मंच से माइक द्वारा निवेदन किया गया। विद्यालय पक्ष के अनुसार ध्वजारोहण के बाद सम्मान समारोह शुरू होने तक किसी प्रकार का विवाद नहीं हुआ।
विवाद उस समय सामने आया, जब नगर परिषद अध्यक्ष एवं पार्षदों के स्वागत-सम्मान की बारी आई। इसी दौरान एक कांग्रेस पार्षद गजेंद्र मकवाने का नाम छूट जाने को लेकर आपत्ति सामने आई। इसके बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद संचालक और पार्षद के बीच कहासुनी की स्थिति बनी। खाली कुर्सी पर बाद में विधायक प्रतिनिधि एवं एक व्यापारी को बैठाए जाने की बात भी सामने आई, जिसे लेकर राजनीतिक स्तर पर सवाल उठे।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- AI का गजब उपयोग: महाकाल आए युवक ने जूता खो जाने पर ली चैटजीपीटी की मदद, चंद सेकंड में मिल गई सफलता
अध्यक्ष अलका गजराज यादव ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को प्रभावित किए जाने का आरोप लगाया गया है। मामला केवल बैठक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। नगर परिषद द्वारा राष्ट्रीय पर्व के आयोजन में टेंट, मिष्ठान एवं अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग किए जाने को लेकर भी बैठकों में मतभेद सामने आने की बात कही जा रही है। बताया गया कि इन व्यवस्थाओं का खर्च नगर परिषद उठाती है तो उसका स्रोत जनता से प्राप्त करों और परिषद के सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ा होता है। दूसरी ओर विद्यालयों में ऐसे आयोजन की व्यवस्थाओं के लिए अलग से कोई नियमित बजट या पैकेज नहीं होने तथा खर्च विद्यालय स्तर पर उठाने की स्थिति में बच्चों की फीस पर भार पड़ने की बात भी सामने आती है।
कार्यक्रम में मौजूद व्याख्याता शर्मा का कहना है कि वे संबंधित पार्षद को व्यक्तिगत रूप से पहचानते नहीं थे और न ही उन्हें उनका नाम मालूम था। उनका कहना है कि यदि नगर परिषद की ओर से कार्यक्रम में शामिल जनप्रतिनिधियों की सूची उपलब्ध करा दी जाती तो सम्मान में किसी प्रकार की चूक नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किसी प्रकार का दुर्व्यवहार करने का उद्देश्य नहीं था और यदि किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है।
तहसीलदार कैलाश सस्तिया द्वारा मामला शांत कराने के प्रयास और माफी मांगने का वीडियो भी सामने आया है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राष्ट्रीय पर्व के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल और सम्मान की व्यवस्था को लेकर पहले से स्पष्ट समन्वय क्यों नहीं हुआ। यदि विद्यालय आयोजन की जिम्मेदारी निभा रहा था और नगर परिषद के निर्वाचित जनप्रतिनिधि अतिथि के रूप में शामिल थे, तो सभी जनप्रतिनिधियों की सूची, मंचीय कार्यक्रम और सम्मान का क्रम पहले से तय किया जाना चाहिए था।
विज्ञापन
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार समारोह के दौरान नप अध्यक्ष अलका गजराज यादव को मंच से तथा व्यक्तिगत रूप से पहली पंक्ति में बैठने का आग्रह किया गया था, लेकिन उन्होंने वहां बैठना स्वीकार नहीं किया। विद्यालय प्राचार्य का कहना है कि उनके तथा स्टाफ की ओर से नगर अध्यक्ष को लिखित व मौखिक रूप से भी आमंत्रित किया गया था। विधायक राजकुमार मेव ने भी आगे बैठने का आग्रह किया और मंच से माइक द्वारा निवेदन किया गया। विद्यालय पक्ष के अनुसार ध्वजारोहण के बाद सम्मान समारोह शुरू होने तक किसी प्रकार का विवाद नहीं हुआ।
विज्ञापन
विवाद उस समय सामने आया, जब नगर परिषद अध्यक्ष एवं पार्षदों के स्वागत-सम्मान की बारी आई। इसी दौरान एक कांग्रेस पार्षद गजेंद्र मकवाने का नाम छूट जाने को लेकर आपत्ति सामने आई। इसके बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद संचालक और पार्षद के बीच कहासुनी की स्थिति बनी। खाली कुर्सी पर बाद में विधायक प्रतिनिधि एवं एक व्यापारी को बैठाए जाने की बात भी सामने आई, जिसे लेकर राजनीतिक स्तर पर सवाल उठे।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- AI का गजब उपयोग: महाकाल आए युवक ने जूता खो जाने पर ली चैटजीपीटी की मदद, चंद सेकंड में मिल गई सफलता
अध्यक्ष अलका गजराज यादव ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को प्रभावित किए जाने का आरोप लगाया गया है। मामला केवल बैठक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। नगर परिषद द्वारा राष्ट्रीय पर्व के आयोजन में टेंट, मिष्ठान एवं अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग किए जाने को लेकर भी बैठकों में मतभेद सामने आने की बात कही जा रही है। बताया गया कि इन व्यवस्थाओं का खर्च नगर परिषद उठाती है तो उसका स्रोत जनता से प्राप्त करों और परिषद के सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ा होता है। दूसरी ओर विद्यालयों में ऐसे आयोजन की व्यवस्थाओं के लिए अलग से कोई नियमित बजट या पैकेज नहीं होने तथा खर्च विद्यालय स्तर पर उठाने की स्थिति में बच्चों की फीस पर भार पड़ने की बात भी सामने आती है।
कार्यक्रम में मौजूद व्याख्याता शर्मा का कहना है कि वे संबंधित पार्षद को व्यक्तिगत रूप से पहचानते नहीं थे और न ही उन्हें उनका नाम मालूम था। उनका कहना है कि यदि नगर परिषद की ओर से कार्यक्रम में शामिल जनप्रतिनिधियों की सूची उपलब्ध करा दी जाती तो सम्मान में किसी प्रकार की चूक नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किसी प्रकार का दुर्व्यवहार करने का उद्देश्य नहीं था और यदि किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है।
तहसीलदार कैलाश सस्तिया द्वारा मामला शांत कराने के प्रयास और माफी मांगने का वीडियो भी सामने आया है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राष्ट्रीय पर्व के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल और सम्मान की व्यवस्था को लेकर पहले से स्पष्ट समन्वय क्यों नहीं हुआ। यदि विद्यालय आयोजन की जिम्मेदारी निभा रहा था और नगर परिषद के निर्वाचित जनप्रतिनिधि अतिथि के रूप में शामिल थे, तो सभी जनप्रतिनिधियों की सूची, मंचीय कार्यक्रम और सम्मान का क्रम पहले से तय किया जाना चाहिए था।
