{"_id":"6a3aa87334b5d9be8a0858b0","slug":"mandsaur-thewa-artist-rakesh-soni-creates-special-brooch-for-pm-modi-thewa-art-gaining-global-recognition-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: मंदसौर के राकेश सोनी ने पीएम मोदी के लिए तैयार किया विशेष ब्रोच, उनकी थेवा कला को मिली वैश्विक पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: मंदसौर के राकेश सोनी ने पीएम मोदी के लिए तैयार किया विशेष ब्रोच, उनकी थेवा कला को मिली वैश्विक पहचान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंदसौर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Tue, 23 Jun 2026 10:04 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को थेवा कला से बने कफलिंक भेंट किए जाने के बाद यह पारंपरिक कला वैश्विक चर्चा में है। मंदसौर के कलाकार राकेश सोनी 25 वर्षों से इस कला को संवार रहे हैं। 400 वर्ष पुरानी थेवा कला में रंगीन कांच पर 23 कैरेट सोने की बारीक नक्काशी की जाती है।
विज्ञापन
मंदसौर के कलाकार ने बनाया खास उपहार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान के प्रतापगढ़ की विश्व प्रसिद्ध थेवा कला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान इस पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर विशेष सम्मान मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को थेवा कला से निर्मित विशेष कफलिंक भेंट किए। रंगीन कांच पर सोने की बारीक नक्काशी से तैयार इन कफलिंक्स ने भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।
थेवा कला में मप्र का योगदान?
मध्य प्रदेश के मंदसौर निवासी कलाकार राकेश सोनी पिछले लगभग 25 वर्षों से इस दुर्लभ और पारंपरिक कला को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं। अपनी मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट कारीगरी के दम पर उन्होंने थेवा कला को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राकेश सोनी ने बताया कि उन्होंने यह कला अपने मामा से सीखी, जो राजस्थान के प्रतापगढ़ में रहते हैं और लंबे समय से इस परंपरागत शिल्प से जुड़े हुए हैं। आज थेवा कला से बने आभूषण और कलाकृतियां कला प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं तथा यह क्षेत्र रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।
ये भी पढ़ें- मिलेगा इंसाफ?: लाचार वृद्धा हजार किमी दूर से पहुंची इंदौर, उखड़ती सांसें-नाक में डली नली भी नहीं रोक सकी राह
विज्ञापन
थेवा कला की क्या है विशेषता?
थेवा कला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बेहद महीन नक्काशी है। इसमें रंगीन कांच की सतह पर 23 कैरेट सोने से अत्यंत सूक्ष्म डिजाइन उकेरे जाते हैं, जो इसे अन्य हस्तकलाओं से अलग बनाते हैं। राकेश सोनी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से भारतीय पारंपरिक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए विशेष रूप से थेवा कला का एक ब्रोच भी तैयार किया है और आशा जताई कि उन्हें यह भेंट प्रधानमंत्री को सौंपने का अवसर मिलेगा।
कब से शुरू हुई थेवा कला?
उन्होंने कहा कि मैं पिछले 25 वर्षों से इस कला से जुड़ा हूं। इसे सीखने और निखारने में काफी मेहनत लगी। यह बेहद बारीक काम है और एक सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लगता है। थेवा कला करीब 400 वर्ष पुरानी है, जिसकी शुरुआत मुगल काल में हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा थेवा कला को वैश्विक पहचान दिलाने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए उनका आभार भी जताया।
क्या है थेवा कला?
गौरतलब है कि थेवा कला राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की लगभग 400 वर्ष पुरानी विश्व प्रसिद्ध हस्तकला है। इसमें बहुरंगी कांच पर 23 कैरेट सोने की बारीक नक्काशी की जाती है। आज यह कला भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुकी है।
विज्ञापन
थेवा कला में मप्र का योगदान?
मध्य प्रदेश के मंदसौर निवासी कलाकार राकेश सोनी पिछले लगभग 25 वर्षों से इस दुर्लभ और पारंपरिक कला को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं। अपनी मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट कारीगरी के दम पर उन्होंने थेवा कला को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राकेश सोनी ने बताया कि उन्होंने यह कला अपने मामा से सीखी, जो राजस्थान के प्रतापगढ़ में रहते हैं और लंबे समय से इस परंपरागत शिल्प से जुड़े हुए हैं। आज थेवा कला से बने आभूषण और कलाकृतियां कला प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं तथा यह क्षेत्र रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- मिलेगा इंसाफ?: लाचार वृद्धा हजार किमी दूर से पहुंची इंदौर, उखड़ती सांसें-नाक में डली नली भी नहीं रोक सकी राह
विज्ञापन
थेवा कला की क्या है विशेषता?
थेवा कला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बेहद महीन नक्काशी है। इसमें रंगीन कांच की सतह पर 23 कैरेट सोने से अत्यंत सूक्ष्म डिजाइन उकेरे जाते हैं, जो इसे अन्य हस्तकलाओं से अलग बनाते हैं। राकेश सोनी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से भारतीय पारंपरिक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए विशेष रूप से थेवा कला का एक ब्रोच भी तैयार किया है और आशा जताई कि उन्हें यह भेंट प्रधानमंत्री को सौंपने का अवसर मिलेगा।
कब से शुरू हुई थेवा कला?
उन्होंने कहा कि मैं पिछले 25 वर्षों से इस कला से जुड़ा हूं। इसे सीखने और निखारने में काफी मेहनत लगी। यह बेहद बारीक काम है और एक सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लगता है। थेवा कला करीब 400 वर्ष पुरानी है, जिसकी शुरुआत मुगल काल में हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा थेवा कला को वैश्विक पहचान दिलाने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए उनका आभार भी जताया।
क्या है थेवा कला?
गौरतलब है कि थेवा कला राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की लगभग 400 वर्ष पुरानी विश्व प्रसिद्ध हस्तकला है। इसमें बहुरंगी कांच पर 23 कैरेट सोने की बारीक नक्काशी की जाती है। आज यह कला भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुकी है।
