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भोपाल में भी संभव होगा फेफड़ा प्रत्यारोपण: अमेरिका से विशेष प्रशिक्षण लेकर लौटे एम्स के डॉक्टर, तैयारियां तेज
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 25 Jun 2026 06:09 PM IST
सार
एम्स भोपाल के डॉ. विक्रम वट्टी ने अमेरिका के प्रतिष्ठित वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर से लंग ट्रांसप्लांट का विशेष प्रशिक्षण पूरा किया है। एम्स को पहले ही लंग ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है। ऐसे में यह प्रशिक्षण भोपाल में फेफड़ा प्रत्यारोपण सेवाओं की शुरुआत की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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एम्स के निदेशक डॉ. माधवानंद कर के साथ डॉ. विक्रम वट्टी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स भोपाल में जल्द ही लंग ट्रांसप्लांट (फेफड़ा प्रत्यारोपण) सेवाओं का रास्ता और आसान हो सकता है। संस्थान के कार्डियो थोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विक्रम वट्टी अमेरिका के प्रतिष्ठित वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर से विशेष प्रशिक्षण लेकर लौटे हैं। यह प्रशिक्षण ऐसे समय में पूरा हुआ है, जब एम्स भोपाल को पहले ही फेफड़ा प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रशिक्षण से मिली तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी एम्स भोपाल में लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे प्रदेश के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई या हैदराबाद जैसे बड़े केंद्रों पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है।
दुनिया के अग्रणी ट्रांसप्लांट सेंटर में लिया प्रशिक्षण
डॉ. विक्रम वट्टी ने अमेरिका के वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह संस्थान अमेरिका के प्रमुख फेफड़ा प्रत्यारोपण केंद्रों में शामिल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में लंग ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। प्रशिक्षण विश्व प्रसिद्ध थोरेसिक सर्जन और वेंडरबिल्ट लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. कोनराड होएट्सेनेकर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
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लंग ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया को समझा
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. वट्टी ने फेफड़ा प्रत्यारोपण कार्यक्रम के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं का गहन अध्ययन किया। इसमें अंग प्राप्ति प्रक्रिया, मरीजों का चयन और मूल्यांकन, जटिल शल्य तकनीकें, मल्टीडिसिप्लिनरी टीम समन्वय, ऑपरेशन के बाद की देखभाल और दीर्घकालिक प्रबंधन शामिल रहे। विशेषज्ञों के अनुसार लंग ट्रांसप्लांट चिकित्सा विज्ञान की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है, जिसके लिए उच्च प्रशिक्षित टीम, अत्याधुनिक तकनीक और समन्वित चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
यह भी पढ़ें-33.92 लाख हितग्राहियों के खातों में पहुंचे 203 करोड़, CM बोले- बुजुर्ग-दिव्यांग खुद को बेसहारा न समझें
गंभीर मरीजों को मिलेगा बड़ा फायदा
एम्स भोपाल में यह सुविधा शुरू होने से फेफड़ों की अंतिम अवस्था की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। अभी ऐसे मरीजों को इलाज के लिए देश के चुनिंदा ट्रांसप्लांट केंद्रों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। एम्स प्रबंधन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस प्रशिक्षण से संस्थान में भविष्य की ट्रांसप्लांट सेवाओं को विकसित करने और मरीजों को उन्नत उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
एम्स की क्षमताओं में होगा विस्तार
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त विशेषज्ञता न केवल लंग ट्रांसप्लांट सेवाओं को मजबूत करेगी, बल्कि अन्य विशेषीकृत चिकित्सा सेवाओं और नई चिकित्सीय तकनीकों को अपनाने में भी मददगार होगी।
यह भी पढ़ें-भोपाल में छात्रों की गूंज अभियान शुरू: सांसद इमरान मसूद के सामने रो पड़े टॉपर, बोले- मेहनत का नहीं मिला सम्मान
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एम्स भोपाल में लंग ट्रांसप्लांट सेवाएं नियमित रूप से शुरू होती हैं तो यह मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। इससे गंभीर फेफड़ा रोगों से पीड़ित मरीजों को अपने राज्य में ही उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
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दुनिया के अग्रणी ट्रांसप्लांट सेंटर में लिया प्रशिक्षण
डॉ. विक्रम वट्टी ने अमेरिका के वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह संस्थान अमेरिका के प्रमुख फेफड़ा प्रत्यारोपण केंद्रों में शामिल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में लंग ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। प्रशिक्षण विश्व प्रसिद्ध थोरेसिक सर्जन और वेंडरबिल्ट लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. कोनराड होएट्सेनेकर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
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लंग ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया को समझा
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. वट्टी ने फेफड़ा प्रत्यारोपण कार्यक्रम के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं का गहन अध्ययन किया। इसमें अंग प्राप्ति प्रक्रिया, मरीजों का चयन और मूल्यांकन, जटिल शल्य तकनीकें, मल्टीडिसिप्लिनरी टीम समन्वय, ऑपरेशन के बाद की देखभाल और दीर्घकालिक प्रबंधन शामिल रहे। विशेषज्ञों के अनुसार लंग ट्रांसप्लांट चिकित्सा विज्ञान की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है, जिसके लिए उच्च प्रशिक्षित टीम, अत्याधुनिक तकनीक और समन्वित चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
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गंभीर मरीजों को मिलेगा बड़ा फायदा
एम्स भोपाल में यह सुविधा शुरू होने से फेफड़ों की अंतिम अवस्था की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। अभी ऐसे मरीजों को इलाज के लिए देश के चुनिंदा ट्रांसप्लांट केंद्रों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। एम्स प्रबंधन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस प्रशिक्षण से संस्थान में भविष्य की ट्रांसप्लांट सेवाओं को विकसित करने और मरीजों को उन्नत उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
एम्स की क्षमताओं में होगा विस्तार
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त विशेषज्ञता न केवल लंग ट्रांसप्लांट सेवाओं को मजबूत करेगी, बल्कि अन्य विशेषीकृत चिकित्सा सेवाओं और नई चिकित्सीय तकनीकों को अपनाने में भी मददगार होगी।
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प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एम्स भोपाल में लंग ट्रांसप्लांट सेवाएं नियमित रूप से शुरू होती हैं तो यह मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। इससे गंभीर फेफड़ा रोगों से पीड़ित मरीजों को अपने राज्य में ही उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
