भोपाल ATS का बड़ा खुलासा! पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर सक्रिय था जिहादी मॉड्यूल, ई-बुक्स से घोल रहे थे जहर
मध्य प्रदेश एटीएस ने भोपाल से गिरफ्तार दो आरोपियों की जांच में बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि दोनों पिछले छह वर्षों से एक पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए 225 जिहादी ई-पुस्तकों का आदान-प्रदान कर रहे थे। एटीएस अब पूरे नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों की जांच में जुटी है।
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देश की जड़ों को खोखला करने और युवाओं के दिमाग में कट्टरता का जहर घोलने की एक बड़ी और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। राजधानी भोपाल के काजीकैंप से मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा गिरफ्तार मोहम्मद फराज और उत्तर प्रदेश के देवबंद (सहारनपुर) निवासी नईम अब्दुल्ला पूरे देश में उग्र जिहाद फैलाने के नेटवर्क पर काम कर रहे थे।
एमपी एटीएस द्वारा तैयार किए गए ताजा डोजियर और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन दोनों ने युवाओं का ब्रेनवॉश करने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने के लिए एक-दूसरे को पीडीएफ फॉर्मेट में करीब 225 उग्र जिहादी किताबें भेजी थीं।
छह साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे आरोपी
जांच में सामने आया है कि फराज और नईम पिछले छह साल से भी अधिक समय से एक ही पाकिस्तानी हैंडलर के सीधे संपर्क में थे। नईम ने ही फराज का परिचय उस पाकिस्तानी हैंडलर से करवाया था। ये दोनों उसी हैंडलर के इशारे पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी हैंडलर भी इन्हें लगातार कट्टरपंथी साहित्य और अन्य लिखित सामग्री भेजता था। नईम को किताबें पढ़ने का बेहद शौक था और फराज को पूरी तरह कट्टर बनाने के लिए वह उसे लगातार यह डिजिटल सामग्री उपलब्ध करा रहा था। इस सिलसिले में नईम वर्ष 2025 में भोपाल भी आया था और फराज के घर पर रुका था।
पांच राज्यों से दबोचे गए छह कट्टरपंथी, भोपाल जेल में बंद
एटीएस ने जून महीने में एक बड़े ऑपरेशन के तहत देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पांच अलग-अलग राज्यों के छह कट्टरपंथी युवकों को गिरफ्तार किया था। ये सभी आरोपी फिलहाल भोपाल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। पकड़े गए आरोपियों में नईम व फराज के अलावा अलवर (राजस्थान) निवासी शाकिर मेव, मधुबनी (बिहार) निवासी इजहार उल हक, मध्य प्रदेश के धार निवासी हाजी अजहर और हरियाणा के नूंह निवासी शाकिर शामिल हैं। एटीएस की जांच में पता चला है कि हरियाणा का रहने वाला शाकिर करीब छह साल पहले देवबंद में धार्मिक शिक्षा लेने गया था, जहां उसकी मुलाकात नईम से हुई थी।
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सिमी और पीएफआई से था संपर्क, गिरफ्तारी से बचने बदलते थे सिम कार्ड
एटीएस को मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह के तार प्रतिबंधित संगठन सिमी और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सक्रिय सदस्यों से जुड़े होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इसके साथ ही तकनीकी जांच में आरोपियों की बड़ी चालाकी भी सामने आई है। एटीएस को नईम के पास से 10 से अधिक मोबाइल नंबर और फराज व इजहार उल हक के पास से 5 से 6 अलग-अलग मोबाइल नंबर मिले हैं।
अंदेशा जताया जा रहा है कि देश विरोधी और संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देते समय सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए ये लगातार अपने सिम कार्ड बदलते रहते थे। एटीएस इनके पूरे डिजिटल फुटप्रिंट और वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी है, ताकि इस स्लीपर सेल के बाकी नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया जा सके।
