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एमपी में कांग्रेस को झटका: दतिया विधायक राजेंद्र भारती दोषी, 25 साल पुराने बैंक घोटाले से जुड़ा है मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया Published by: दतिया ब्यूरो Updated Wed, 01 Apr 2026 05:01 PM IST
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सार

दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने बैंक घोटाले में दिल्ली की विशेष कोर्ट ने दोषी ठहराया। फर्जी दस्तावेज और FD गड़बड़ी से बैंक को नुकसान पहुंचाने के आरोप साबित हुए हैं।

MP News Congress MLA Rajendra Bharti Convicted, Sent to Jail in Bank Scam Case
दतिया विधायक राजेंद्र भारती को जेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने दोषी करार दिया है। करीब 25 साल पुराने बैंक घोटाले मामले में दिल्ली की विशेष MP/MLA कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उन्हें दोषी मानते हुए तिहाड़ जेल भेजने के निर्देश दिए हैं। सजा की अवधि का एलान कोर्ट कल करेगा।

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यह मामला जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक, दतिया से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक अध्यक्ष रहते हुए राजेंद्र भारती ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर और रिकॉर्ड में हेरफेर कर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में गड़बड़ी की। उन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर 13.5 प्रतिशत की ऊंची ब्याज दर का अनुचित लाभ लिया और FD की अवधि को अवैध रूप से बढ़ाकर बैंक को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया। 

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अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत दोषी माना है, जिनमें धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 120B (आपराधिक साजिश) शामिल हैं। इस मामले में उन्हें पहले ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी थी।


मामले का आसान तरीके से समझें 

1- 24 अगस्त 1998 को आरोपी राजेन्द्र भारती की मां सावित्री श्याम ने, श्याम सुंदर श्याम संस्थान की अध्यक्ष रहते हुए, जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक दतिया में 10 लाख रुपये की एफडी 3 साल के लिए 13.50% वार्षिक ब्याज दर पर कराई थी।

2- 1998 से 2001 के बीच आरोपी राजेन्द्र भारती उसी बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे।

3- साथ ही, वह श्याम सुंदर श्याम जनसहयोग एवं सामुदायिक विकास संस्थान दतिया के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य भी थे। यानी दोनों संस्थाओं में उनका सीधा हित जुड़ा हुआ था।

4- आरोप है कि राजेन्द्र भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर साजिश की। दोनों ने बैंक के दस्तावेजों (लेजर बुक, एफडी स्लिप और रसीद) में काट-छांट कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 10 और फिर 15 साल कर दी, ताकि लंबे समय तक 13.50% ब्याज का फायदा मिलता रहे।

5- इस तरह 1999 से 2011 तक हर साल 1,35,000 रुपये का गलत फायदा उनकी मां और उनकी संस्था को मिलता रहा, जिससे बैंक को नुकसान हुआ।

6- जब राजेन्द्र भारती अध्यक्ष पद से हटे, तब बैंक ऑडिट में यह गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्था के निर्देश पर 29 जुलाई 2015 को यह मामला सीजेएम दतिया की अदालत में दर्ज किया गया।

7- विशेष न्यायालय ग्वालियर ने राजेन्द्र भारती पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120(बी) के तहत आरोप तय किए। वहीं, रघुवीर शरण प्रजापति को भी बाद में धारा 319 सीआरपीसी के तहत आरोपी बनाया गया और उस पर 420, 467, 468, 471, 409 और 120(बी) के आरोप लगाए गए। इन आरोपों की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने क्रिमिनल अपील 2764/2024 में भी की।

8- अभियोजन द्वारा पेश साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपों को संदेह से परे साबित माना और 1 अप्रैल 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया।

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