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फिर सामने आया भ्रष्टाचार: हाथों से पपड़ी की तरह उखड़ रही डामर की सड़क, 700 मीटर लंबे घटिया निर्माण की पोल खुली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम
Published by: नर्मदापुरम ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 05:27 PM IST
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सार
सिवनी मालवा में पीडब्ल्यूडी की सड़क निर्माण में लापरवाही सामने आई। सड़क की डामर परत हाथों से उखड़ने लगी। ग्रामीणों ने विरोध किया। जांच में खामियां मिलने पर कार्य निरस्त कर डामर हटाने के आदेश दिए गए हैं।
हाथों से सड़क उखाड़कर बताते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में सड़कों के बड़े-बड़े दावे अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है सिवनी मालवा से, जहां पीडब्ल्यूडी द्वारा कराए जा रहे सड़क नवीनीकरण कार्य में गंभीर लापरवाही और घटिया निर्माण उजागर हुआ है। बांकाबेड़ी से झीगनपुर बासनिया गांव तक करीब 5.7 किलोमीटर लंबी सड़क, जिस पर 70 से 73 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं, उसकी डामर की परत इतनी कमजोर निकली कि हाथों से ही उखड़ने लगी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेका कंपनी याराना कंस्ट्रक्शन ने बिना उचित सफाई और तकनीकी मापदंडों का पालन किए 700 मीटर हिस्से में डामर बिछा दिया, जिससे पूरे निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जैसे ही ग्रामीणों को यह घटिया निर्माण दिखाई दिया, वे सरपंच वरुण पटेल के साथ मौके पर पहुंचे और सड़क की परत को हाथों से उखाड़कर वास्तविक हालात दिखा दिए। दृश्य चौंकाने वाला था—डामर की परत इतनी कमजोर थी कि वह बिल्कुल भी टिक नहीं रही थी। जानकारी के अनुसार ठेकेदार ने इस सड़क को जल्दबाजी में रातों-रात तैयार करने की योजना बनाई थी। देर रात करीब 2 बजे तक काम जारी रहा और 700 मीटर सड़क पर डामर बिछा दिया गया। हालांकि, गुणवत्ता पर किसी का ध्यान नहीं था, और अब इसका असर खुलेआम सामने आ गया है।
मामला उजागर होने के बाद पीडब्ल्यूडी एसडीओ अमोद दुराफे ने भी लापरवाही स्वीकार की। उन्होंने बताया कि सरफेसिंग का कार्य तो किया गया था, लेकिन सफाई में कमी रह गई और लोड आने में देरी के कारण देर रात डामर बिछाया गया। एसडीओ ने साफ कहा कि यह कार्य नियमों के खिलाफ था और इसे किसी भी स्थिति में मान्यता नहीं दी जाएगी। एसडीओ अमोद दुराफे ने मौके का निरीक्षण कर पूरे कार्य को तत्काल निरस्त कर दिया और बिछाई गई डामर परत को उखाड़ने के आदेश दे दिए। ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए गए कि आगे का काम सभी इंजीनियर की मौजूदगी में ही किया जाए, ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेका कंपनी याराना कंस्ट्रक्शन ने बिना उचित सफाई और तकनीकी मापदंडों का पालन किए 700 मीटर हिस्से में डामर बिछा दिया, जिससे पूरे निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जैसे ही ग्रामीणों को यह घटिया निर्माण दिखाई दिया, वे सरपंच वरुण पटेल के साथ मौके पर पहुंचे और सड़क की परत को हाथों से उखाड़कर वास्तविक हालात दिखा दिए। दृश्य चौंकाने वाला था—डामर की परत इतनी कमजोर थी कि वह बिल्कुल भी टिक नहीं रही थी। जानकारी के अनुसार ठेकेदार ने इस सड़क को जल्दबाजी में रातों-रात तैयार करने की योजना बनाई थी। देर रात करीब 2 बजे तक काम जारी रहा और 700 मीटर सड़क पर डामर बिछा दिया गया। हालांकि, गुणवत्ता पर किसी का ध्यान नहीं था, और अब इसका असर खुलेआम सामने आ गया है।
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मामला उजागर होने के बाद पीडब्ल्यूडी एसडीओ अमोद दुराफे ने भी लापरवाही स्वीकार की। उन्होंने बताया कि सरफेसिंग का कार्य तो किया गया था, लेकिन सफाई में कमी रह गई और लोड आने में देरी के कारण देर रात डामर बिछाया गया। एसडीओ ने साफ कहा कि यह कार्य नियमों के खिलाफ था और इसे किसी भी स्थिति में मान्यता नहीं दी जाएगी। एसडीओ अमोद दुराफे ने मौके का निरीक्षण कर पूरे कार्य को तत्काल निरस्त कर दिया और बिछाई गई डामर परत को उखाड़ने के आदेश दे दिए। ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए गए कि आगे का काम सभी इंजीनियर की मौजूदगी में ही किया जाए, ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

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