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Narmadapuram News: नर्मदा जयंती पर कैदियों की अनोखी पहल, पत्तों से बने इको-फ्रेंडली दीपकों से होगा दीपदान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम
Published by: नर्मदापुरम ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 06:39 PM IST
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सार
नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में कैदियों ने नर्मदा जयंती पर दीपदान के लिए प्राकृतिक पत्तों से बने दीपक तैयार किए हैं। कैदियों की इस पहल से मां नर्मदा रोशन तो होंगी, लेकिन प्रदूषित नहीं।
नर्मदा जयंती पर होगा ईको फ्रेंडली दीपों का दान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नर्मदा जयंती पर इस बार आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत मिसाल सामने आई है। नर्मदापुरम सेंट्रल जेल के कैदियों द्वारा दीपदान के लिए ऐसे दीप तैयार किए जा रहे हैं, जो नर्मदा को रोशन करेंगे लेकिन प्रदूषित नहीं।
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करीब 30 एकड़ के विशाल जेल परिसर में लगे बरगद, पलाश, सिंदूर, बादाम सहित अन्य प्रजाति के बड़े पेड़ों के पत्ते अब दीपक का रूप ले चुके हैं। कैदियों के हाथों बने ये इको-फ्रेंडली दीपक न केवल जेल परिसर में तैयार किए जा रहे हैं, बल्कि 25 जनवरी को नर्मदा जयंती के दिन सेठानी घाट पर मां नर्मदा की लहरों में प्रवाहित होकर नदी को रोशन करेंगे।
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दरअसल प्लास्टिक और सिंथेटिक कागज से बने दीपक से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए जेल के कैदियों ने अपने हाथों से पूरी तरह प्राकृतिक पत्तों के दीपक और ट्रे बनानी शुरू की है। जेल परिसर में कैदियों की टोलियां रोज बादाम, पलाश, सिंदूर के पत्तों से दीपक बना रही हैं। चार से पांच घंटे की मेहनत में रोजाना करीब 500 से 1000 दीपक तैयार हो रहे हैं। अब तक 5000 से ज्यादा दीपक बन चुके हैं और नर्मदा जयंती तक 10 से 15 हजार दीपक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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जेल प्रबंधन की ओर से पत्तों और अन्य जरूरी सामग्री की पूरी व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा जयंती के दिन सेठानी घाट पर जेल प्रशासन द्वारा नगर पालिका को ये दीपक प्रदान किए जाएंगे और नगर पालिका के द्वारा श्रद्धालुओं को ये पत्तों से बने दीपक निःशुल्क दिए जाएंगे। इन दीपकों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि नर्मदा में प्रवाहित होने के बाद बुझने पर ये नदी के जल को प्रदूषित नहीं करते। बल्कि पानी में गलकर जलीय जीवों के लिए आहार बन जाते हैं।
कैदियों ने पत्तों से बनी विशेष ट्रे भी तैयार की हैं, जिनमें एक साथ कई दीपक रखकर दीपदान किया जा सकेगा। ये ट्रे बहते हुए दूर तक जाएगी और किसी भी तरह का कचरा नहीं छोड़ेगी। जेल प्रबंधन का कहना है कि ऐसी गतिविधियां कैदियों के भीतर हृदय परिवर्तन और सामाजिक जिम्मेदारी को जन्म देती हैं। मां नर्मदा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि जीवन रेखा हैं और उनके संरक्षण के लिए कैदी पूरे समर्पण से इस कार्य में जुटे हैं।
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