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एमपी: गुरु पूर्णिमा पर उमड़ेगी श्रद्धा की धारा, ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की तैयारी पूर्ण

Tue, 28 Jul 2026 02:18 PM IST
खंडवा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला,ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,ओंकारेश्वर Published by: खंडवा ब्यूरो Updated Tue, 28 Jul 2026 02:18 PM IST
सार

गुरु पूर्णिमा महापर्व पर भगवान श्री ओंकारेश्वर और श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं।

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श्रद्धालुओं का सैलाब साधारण द्वारा दर्शन के लिए लाइन में लगे भोलेनाथ के भक्त। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुरु पूर्णिमा महापर्व को लेकर भगवान श्री ओंकारेश्वर एवं श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की नगरी पूरी तरह भक्तिमय हो गई है। खंडवा स्थित दादाजी धाम में दर्शन करने के बाद मंगलवार से ही श्रद्धालुओं का ओंकारेश्वर पहुंचना प्रारंभ हो गया। बैतूल, छिंदवाड़ा, मुलताई, विदर्भ तथा मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर एवं ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर ओंकार पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। मंदिर परिसर, नर्मदा घाटों और आश्रमों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
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मंदिर ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। ओंकारेश्वर श्रीजी मंदिर ट्रस्ट के प्रबंध ट्रस्टी राजा राव पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सामान्य दर्शन मार्ग पर शुद्ध पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है, ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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नगर में यातायात व्यवस्था से व्यापारियों की बढ़ी चिंता
गुरु पूर्णिमा की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शुक्रवार से आदि गुरु शंकराचार्य तिराहे से चार पहिया वाहनों के नगर प्रवेश पर रोक लगाकर उन्हें ओंकारेश्वर बांध के सामने स्थित कुबेर भंडारी क्षेत्र की पार्किंग में भेजना शुरू किया। इस व्यवस्था से जहां श्रद्धालुओं को पैदल अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है, वहीं मुख्य बाजार, पुराना बस स्टैंड, बालवाड़ी, नागरघाट और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों के व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
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स्थानीय व्यापारी चेतन खडेलवाल ने बताया कि शुक्रवार से दुकान पर ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है। उनका कहना है कि अत्यधिक भीड़ होने पर बाहरी पार्किंग की व्यवस्था उचित है, लेकिन सामान्य दिनों में भी सभी वाहनों को एक ही दिशा में भेजने से मुख्य बाजार का व्यापार लगभग ठप हो जाता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा नागरघाट से मौनी बाबा आश्रम तक निर्मित सड़क का उपयोग करते हुए छोटे वाहनों के लिए अतिरिक्त पार्किंग विकसित की जाए। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और नगर के व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित नहीं होगा।

गुरु पूर्णिमा पर आश्रमों में होंगे विशेष धार्मिक आयोजन
29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ओंकारेश्वर के सभी प्रमुख अखाड़ों, मठों, मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजन, गुरु दीक्षा, चरण वंदन, सत्संग और भंडारों का आयोजन होगा।
महानिर्वाणी अखाड़े में महंत कैलाश भारती सेक्रेटरी मृत्युंजय भारती महाराज, निरंजनी अखाड़े में दिलीप पुरी  महाराज, जूना अखाड़े में महामंडलेश्वर धर्मेंद्रपुरी जी महाराज, गोदड़ अखाड़े में अजयपुरी  महाराज, मार्कण्डेय संन्यास आश्रम में स्वामी प्रणवानंद  महाराज, अन्नपूर्णा आश्रम में महामंडलेश्वर सच्चिदानंद जी महाराज, ओंकार पर्वत स्थित श्री ओंकारेश्वर षट् दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी  महाराज, नरसिंह टेकरी में महंत श्यामसुंदर दास  महाराज तथा अन्य अनेक आश्रमों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु  अपने-अपने गुरुओं के आश्रमों में पहुंचने लगे हैं।

तीन अगस्त को निकलेगी प्रथम श्रावण सोमवार की भव्य सवारी
श्रावण मास के प्रथम सोमवार तीन अगस्त को भगवान श्री ओंकारेश्वर एवं श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की पारंपरिक शाही सवारी पूरे धार्मिक वैभव के साथ निकाली जाएगी। सवारी प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह ने  बताया कि भगवान श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पालकी सायं 4:30 बजे मुख्य मंदिर से रवाना होगी। मंदिर में विधिवत पूजन के बाद पंचमुखी मुखौटा पालकी में विराजमान कर आदिगुरु शंकराचार्य गुफा मार्ग से कोटितीर्थ घाट ले जाया जाएगा। वहां विद्वान ब्राह्मणों द्वारा नर्मदा स्नान, पंचामृत अभिषेक तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजन संपन्न होगा।

इसके पश्चात भगवान की पालकी नर्मदा में नौका विहार करेगी और महानिर्वाणी घाट पहुंचने के बाद व लगभग नौ बजे पुनः मुख्य मंदिर पहुंचेगी, जहां  सायकालिन आरती के साथ सवारी का समापन होगा।

इसी प्रकार भगवान श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी भी अपराह्न लगभग चार बजे मंदिर से प्रस्थान कर गोमुख घाट पहुंचेगी। वहां नर्मदा स्नान एवं विशेष अभिषेक के बाद नौका विहार कर नगर भ्रमण करेगी। दोनों ज्योतिर्लिंगों की सवारियों के एक साथ नगर भ्रमण से संपूर्ण ओंकारेश्वर भक्तिमय वातावरण में डूब जाएगा।

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प्रशासन ने किए व्यापक प्रबंध
गुरु पूर्णिमा और प्रथम श्रावण सोमवार पर लाखों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए प्रशासन, पुलिस, मंदिर ट्रस्ट और नगर परिषद ने सुरक्षा, यातायात, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पार्किंग तथा भीड़ प्रबंधन की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विभिन्न स्थानों पर अतिरिक्त कर्मचारियों और पुलिस बल की तैनाती की जा रही है।

धार्मिक आस्था, गुरु परंपरा और सावन की शिवभक्ति का अद्भुत संगम इस बार भी ओंकारेश्वर में देखने को मिलेगा, जहां देशभर से आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के साथ अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करेंगे।

गुरु के भीतर इन सबका गहन ज्ञान होना चाहिए- महंत कैलाश भारती
नर्मदा तट पर स्थित भगवान श्री ओंकारेश्वर की पावन नगरी सदियों से गुरु-शिष्य परंपरा की महान तपोभूमि रही है। यही वह स्थान है, जहां जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने अपने गुरु श्री गोविंदपादाचार्य से दीक्षा ग्रहण कर अद्वैत वेदांत का दिव्य ज्ञान प्राप्त किया। बाद में उन्होंने इसी ज्ञान का प्रकाश पूरे भारत में फैलाया और सनातन धर्म को नई चेतना प्रदान की। इसलिए ओंकारेश्वर केवल एक ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान की अमर भूमि भी माना जाता है।

महानिर्वाणी अखाड़े के महंत कैलाश भारती जी महाराज का कहना है कि गुरु वही है, जो अपने शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य और आत्मज्ञान के प्रकाश तक पहुंचा दे। उनके अनुसार, गुरु के भीतर समत्व, धैर्य, करुणा और वेदों का गहन ज्ञान होना चाहिए। सच्चा गुरु किसी के साथ भेदभाव नहीं करता, बल्कि प्रत्येक जीव में परमात्मा का स्वरूप देखता है।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल गुरु बनाने की नहीं, बल्कि योग्य शिष्य बनने की भी है। गुरु की कृपा तभी फलित होती है, जब शिष्य में श्रद्धा, अनुशासन, सेवा और समर्पण का भाव हो। प्राचीन गुरुकुल परंपरा में शिष्य वर्षों तक गुरु के सान्निध्य में रहकर केवल शास्त्रों का ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संयम और जीवन जीने की कला का भी अभ्यास करता था।

झूणा गणपति हनुमान मंदिर के महंत मंगलदास जी त्यागी का कहना है कि गुरु द्वारा दिया गया मंत्र तभी सिद्ध होता है, जब उसे जीवन में उतारा जाए। गुरु के बताए मार्ग पर चलने वाला शिष्य स्वयं भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है।




 
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