MP: महाशिवरात्रि पर 12 घंटे के लिए खुलेंगे रायसेन किले के प्राचीन शिव मंदिर के द्वार, मेले की भी खास तैयारी
Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर रायसेन किले स्थित प्राचीन शिव मंदिर वर्ष में एक दिन के लिए 12 घंटे खुलता है। हजारों श्रद्धालु पैदल चढ़कर दर्शन करते हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं।
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रायसेन किला एक बार फिर आस्था और श्रद्धा का विशाल केंद्र बनने जा रहा है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर किले में स्थित प्राचीन शिव मंदिर के द्वार वर्ष में केवल एक दिन के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। पूरे 364 दिन ताले में बंद रहने वाले भगवान भोलेनाथ को इस दिन 12 घंटे के लिए “कैद से आजादी” मिलती है। प्रशासन की देखरेख में सुबह 6 बजे मंदिर के ताले खोले जाएंगे और शाम 6 बजे पुनः बंद कर दिए जाएंगे।
परमारकालीन 12वीं शताब्दी में निर्मित यह किला ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल यात्रा करनी पड़ती है। महाशिवरात्रि के दिन हजारों भक्त “बम-बम भोले” के जयकारों के साथ पहाड़ी चढ़ते हैं। मार्ग में जगह-जगह लंगर, पंडाल और भंडारों की व्यवस्था की जाती है, जहां गाजर का हलवा, साबूदाने की खिचड़ी सहित अन्य प्रसाद वितरित किया जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार 1955 में सांप्रदायिक तनाव के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने किले और मंदिर को अपने संरक्षण में लेकर ताले लगा दिए थे। इसके बाद मंदिर वर्षभर बंद रहने लगा। वर्ष 1972 में पंडित रामनारायण चतुर्वेदी के नेतृत्व में “चलो रायसेन किले की ओर” नाम से व्यापक जनआंदोलन हुआ। आंदोलन इतना व्यापक हुआ कि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने स्वयं रायसेन पहुंचकर महाशिवरात्रि के दिन मंदिर के ताले खुलवाए और पूजा-अर्चना की। तभी से परंपरा चली आ रही है कि मंदिर वर्ष में केवल महाशिवरात्रि पर 12 घंटे के लिए खोला जाता है।
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रायसेन किले का संबंध रानी दुर्गावती के इतिहास से भी जोड़ा जाता है। माना जाता है कि इसी किले से जुड़ी घटनाओं में रानी दुर्गावती और उनकी सैकड़ों सहेलियों ने आत्मबलिदान दिया था। इस कारण यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक गौरव का भी प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष मेले को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। स्वास्थ्य, पेयजल और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग में बैरिकेडिंग, नियंत्रण कक्ष और अस्थायी चिकित्सा शिविर बनाए गए हैं।
जिला कलेक्टर कुलदीप पटेल ने बताया कि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग करवाई गई है। किले के जिन हिस्सों में दीवारों के क्षतिग्रस्त होने या टूटने की आशंका है, वहां सुरक्षा कारणों से प्रवेश प्रतिबंधित कर बैरिकेड लगाए गए हैं, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर तैनात रहेगी। कोटवार और पुलिस बल भी पर्याप्त संख्या में व्यवस्था संभालेंगे।
इधर, कुछ हिंदूवादी संगठनों ने मांग उठाई है कि मंदिर को वर्षभर के लिए खोला जाए, ताकि नियमित पूजा-अर्चना संभव हो सके। फिलहाल प्रशासन ने शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन का दावा किया है। महाशिवरात्रि पर रायसेन किला एक बार फिर भक्ति, इतिहास और परंपरा का अद्भुत संगम बनेगा, जहां हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ भोलेनाथ के दर्शन करेंगे।

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