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Amit Shah: रीवा से शाह का बड़ा संदेश-'केमिकल छोड़ो, प्रकृति से नाता जोड़ो', बसामन मामा गोधाम बनेगा देश का मॉडल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा Published by: रीवा ब्यूरो Updated Thu, 25 Dec 2025 07:24 PM IST
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सार

Amit Shah in Rewa: रीवा दौरे पर अमित शाह ने बसामन मामा गोधाम का निरीक्षण कर प्राकृतिक खेती और गौ-संरक्षण को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने, पीपल लगाने और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय मॉडल बताया।

Amit Shah: Shah's big message from Rewa - 'Leave chemicals, connect with nature'
अमित शाह ने रीवा में आयोजित कृषक सम्मेलन को संबोधित किया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को एक दिवसीय प्रवास पर रीवा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बसामन मामा गोधाम का दौरा कर प्राकृतिक खेती और गौ-संरक्षण के अनूठे मॉडल का अवलोकन किया। मंच से संबोधन करते हुए अमित शाह ने किसानों, प्रशासन और समाज को स्पष्ट संदेश दिया अब खेती को केमिकल से मुक्त कर प्रकृति के अनुरूप आगे बढ़ाने का समय आ गया है।

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अमित शाह ने कहा कि डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने उन्हें बसामन मामा गोधाम के बारे में विस्तार से बताया था, तभी उन्होंने यहां आने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती है और अटल जी का रीवा से विशेष लगाव रहा है। बघेली बोली से उनका गहरा जुड़ाव था और वे जो कहते थे, उसे करके दिखाने में विश्वास रखते थे। गृह मंत्री ने कहा कि रीवा पहले ही एशिया के सबसे बड़े सोलर प्लांट के लिए पहचाना जाता है और अब बसामन मामा गोधाम प्राकृतिक खेती का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है। यहां गाय के गोबर और गोमूत्र से बिना रासायनिक खाद के दलहन, चावल, चना और सरसों जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। यदि इस मॉडल को प्रकल्प के रूप में पूरे विंध्य क्षेत्र में लागू किया जाए, तो किसानों की आय में बड़ा उछाल संभव है।
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अमित शाह ने कहा कि एक देशी गाय से 21 एकड़ तक प्राकृतिक खेती संभव है। केमिकल फर्टिलाइजर से बीपी, शुगर और कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं, जबकि प्राकृतिक खेती जमीन के साथ-साथ इंसान की सेहत को भी सुरक्षित रखती है। उन्होंने बताया कि देशभर में 40 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं और उन्होंने स्वयं अपने खेत में इसका प्रयोग किया है। 52 एकड़ में फैला बसामन मामा गौ-अभ्यारण्य आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत केंद्र बन चुका है। यहां 9 हजार से अधिक बेसहारा और बीमार गायों की सेवा 100 से ज्यादा कर्मचारी कर रहे हैं। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद, गो-काष्ठ और गोनाइल जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिससे रोजगार भी सृजित हो रहा है। इस पहल से प्रेरित होकर आसपास के 50 गांवों के करीब पांच हजार किसान केमिकल खेती छोड़ प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। 

पीपल लगाएं
शाह ने कहा कि हम सब यह संकल्प लें कि अपने गांव में अगली बरसात के मौसम में कम से कम पांच पीपल के वृक्ष अवश्य लगाएं। पीपल का वृक्ष सबसे अधिक ऑक्सीजन प्रदान करता है। यह एक पुण्य कार्य भी है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है - वृक्षों में मैं पीपल हूं।

शाह ने कहा कि मोदी जी ने सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से दो बड़ी सहकारी संस्थाओं की स्थापना की है, जो प्राकृतिक खेती की उपज का सर्टिफिकेशन, विश्वस्तरीय आधुनिक लैब में उसका परीक्षण, पैकेजिंग, मार्केटिंग और निर्यात का कार्य कर रही हैं। आने वाले समय में देशभर में 400 से अधिक प्रयोगशालाएं किसानों को सर्टिफिकेट प्रदान करेंगी, जिससे किसानों की आय लगभग डेढ़ गुना तक बढ़ेगी।

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देश में लगभग 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके
शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा पारंपरिक प्रयोग है, जिसे हम समय के साथ भूलते चले गए। एक ही देशी गाय से 21 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती की जा सकती है। किसान की मेहनत से जो अनाज उत्पन्न होता है, वही पूरी दुनिया का पेट भरता है। आज अनेक प्रकार की बीमारियों की जड़ रासायनिक उर्वरक हैं। दुनिया में प्राकृतिक खेती का बहुत बड़ा बाजार है। वैश्विक बाजार में हमारे किसानों की उपज बेहतर तरीके से पहुंच सके, इसके लिए भूमि परीक्षण से लेकर सर्टिफिकेशन, उपज की प्रयोगशाला जांच और पैकेजिंग तक की पूरी व्यवस्था विकसित की जा रही है। देश में लगभग 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। मैंने स्वयं अपने खेत में यह प्रयोग किया है और इससे उत्पादन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। 

शाह ने कहा कि मैं आज बसावन मामा गोवंश प्रोजेक्ट को देख कर आया। यह एक बहुत ही अच्छा प्रयोग है, जो अनेक किसानों और गोपालकों को आगे बढ़ने की दिशा में मार्गदर्शन कर सकता है। यहां गौशाला भी है और गाय के गोबर से निर्मित प्राकृतिक खेती की पूरी शृंखला भी विकसित की गई है।  एक एकड़ भूमि में सवा लाख रुपये तक की आय देने वाला यह प्रयोग निश्चित रूप से छोटे किसानों के लिए एक बड़ा आशीर्वाद सिद्ध होगा। 

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