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Rewa News: मऊगंज में 'सुपर गवाह' का खेल उजागर, 6 लोगों से 1000 केस निपटाने की कोशिश, उठे सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा Published by: रीवा ब्यूरो Updated Tue, 13 Jan 2026 10:05 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां सैकड़ों मामलों में चंद चुनिंदा लोगों को ही सरकारी गवाह बनाया गया, जिससे निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ा।

mauganj police super witness scam fake government witnesses investigation
न्याय व्यवस्था कटघरे में - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जो सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं बल्कि पूरे आपराधिक न्याय तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यहां पुलिस ने “निष्पक्ष गवाह” के सिद्धांत को नजरअंदाज कर दिया। लौर और नईगढ़ी थानों में दर्ज 1000 से अधिक मामलों में केवल 6 लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया, जिसमें से एक व्यक्ति 500 से ज्यादा मामलों में गवाही देता पाया गया।
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CCTNS रिकॉर्ड ने खोला फर्जीवाड़ा

CCTNS पोर्टल के रिकॉर्ड की जांच में खुलासा हुआ कि आबकारी, मारपीट, चोरी और NDPS जैसे गंभीर अपराधों में भी वही छह लोग गवाह बनते रहे। आरोप है कि ये गवाह आम नागरिक नहीं बल्कि थाने से जुड़े कर्मचारी या थाना प्रभारी के करीबी थे। इसमें थाने का ड्राइवर, रसोइया और अन्य सहयोगी शामिल थे। कुछ गवाहों को यह भी नहीं पता था कि वे किस केस में गवाह हैं।
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सबसे चौंकाने वाला नाम अमित कुशवाहा का सामने आया, जिसे 500 से अधिक मामलों में सरकारी गवाह बताया गया। पुलिस ने RTI के जवाब में दावा किया कि वह वाहन चालक नहीं है, लेकिन लोगों और सीसीटीवी की पड़ताल में यह दावा गलत साबित हुआ। कैमरे में अमित कुशवाहा नईगढ़ी थाने की गाड़ी चलाते हुए दिखाई दिया, जिससे पुलिस के आधिकारिक बयान पर सवाल उठ गए।

कानून स्पष्ट करता है कि गवाह स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे। लेकिन मऊगंज में हालात ऐसे बने कि एक ही दिन में छह–सात मामलों के “चश्मदीद” तैयार कर दिए गए। यह अदालतों को गुमराह करने की कोशिश के समान है और सैकड़ों मामलों में पीड़ित और आरोपियों दोनों के साथ अन्याय की आशंका पैदा करती है।

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इस पूरे ‘गवाह सिंडिकेट’ के केंद्र में नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर का नाम आया। उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा मामलों में फर्जी गवाह बनाए गए। मामला उजागर होने के बाद उन्हें थाने से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया। मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने कहा कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक गिरीश गौतम ने इसे जनता के विश्वास के साथ बड़ा धोखा बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। तथाकथित सरकारी गवाहों के बयान भी फर्जीवाड़े की पुष्टि करते नजर आए। राहुल विश्वकर्मा ने कहा कि उसे कई मामलों में जबरन गवाह बनाया गया, जबकि दिनेश कुशवाहा ने स्वीकार किया कि पुलिस के कहने पर सिर्फ हस्ताक्षर कराए गए और केस की कोई जानकारी नहीं दी गई। यह मामला मऊगंज पुलिस और पूरे न्याय तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और प्रशासन के लिए चेतावनी भी है कि ऐसे फर्जीवाड़ों की जड़ें तुरंत उजागर की जाएँ।

 

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