गैस संकट ने बदली सागर की तस्वीर: 25 साल बाद फिर धधकी कोयले की भट्टियां, पश्चिम एशिया के तनाव का दिखा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सागर में एलपीजी गैस की कमी हो गई है। इससे छोटे दुकानदारों का काम प्रभावित हुआ है और वे मजबूरी में लकड़ी और कोयले की भट्टियों का उपयोग करने लगे हैं।
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पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों का असर अब सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी आहट मध्य प्रदेश के सागर शहर की गलियों तक पहुंच गई है। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे शहर में गैस की किल्लत गहराने लगी है।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स पर पड़ा है। चाट, समोसा, चाय और अन्य फास्ट फूड बेचने वाले दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई दुकानों के चूल्हे गैस की कमी के कारण ठंडे पड़ गए, जिसके चलते व्यापारियों को मजबूरी में विकल्प तलाशने पड़े।
ऐसे हालात में व्यापारी अब ‘बैक टू बेसिक्स’ की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। वर्षों से लगभग बंद पड़ी लकड़ी और कोयले की भट्टियों की मांग अचानक बढ़ गई है। नया बाजार क्षेत्र के हार्डवेयर व्यापारी मोहम्मद जावेद के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों पहली बार भट्टियों का कारोबार इतनी तेजी से बढ़ा है।
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उन्होंने बताया कि भट्टियों की मांग में 10 गुना तक उछाल आया है। उनकी दुकान से रोजाना 10 से 15 बड़ी और करीब 10 छोटी भट्टियाँ बिक रही हैं, जबकि पूरे शहर में प्रतिदिन लगभग 100 बड़ी भट्टियों की बिक्री हो रही है। हालांकि, इस बढ़ती मांग का असर कीमतों पर भी साफ दिख रहा है। भट्टियों के दाम बढ़ने से छोटे व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। एक तरफ गैस की कमी और दूसरी तरफ महंगे विकल्प, आम दुकानदारों पर दोहरी मार डाल रहे हैं।

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