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Sagar News: एम्स भोपाल में हुआ पद्मश्री भगवानदास रैकवार का निधन, खेल और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2026 11:23 AM IST
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सार
बुंदेलखंड की अखाड़ा परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने वाले पद्मश्री भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ का एम्स भोपाल में 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया, जिससे प्रदेश के खेल और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है।
पद्मश्री स्वर्गीय भगवानदास रैकवार। फाइल फोटो
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विस्तार
बुंदेलखंड की माटी के लाल और पारंपरिक अखाड़ा कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले पद्मश्री भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ अब हमारे बीच नहीं रहे। शनिवार रात करीब 9:30 बजे भोपाल के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। 83 वर्षीय दाऊ लंबे समय से श्वास संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही सागर सहित पूरे प्रदेश के खेल और सांस्कृतिक जगत में शोक व्याप्त हो गया है।
एम्स भोपाल में चल रहा था उपचार
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, दाऊ की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले सागर में प्राथमिक उपचार दिया गया था। सुधार न होने पर सात अप्रैल को उन्हें भोपाल स्थित एम्स में भर्ती कराया गया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
शस्त्र कला को दी वैश्विक पहचान
भगवानदास रैकवार ने अपना पूरा जीवन बुंदेली अखाड़ा और लाठी कला के संरक्षण में समर्पित कर दिया। उन्होंने न केवल युवाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए, बल्कि विलुप्त होती इस प्राचीन शस्त्र विद्या को आधुनिक दौर में प्रासंगिक बनाए रखा। उनकी इसी तपस्या का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार ने इसी वर्ष 25 जनवरी को उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान के लिए चुना था।
आज होगा अंतिम संस्कार
दाऊ की अंतिम यात्रा आज यानी रविवार दोपहर 12 बजे उनके निवास स्थान रामपुरा वार्ड स्थित छत्रसाल अखाड़े से निकाली जाएगी। यहाँ से उनकी पार्थिव देह को नरयावली नाका मुक्तिधाम ले जाया जाएगा, जहाँ राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा।
ये भी पढ़ें- MP News: सीएम हेल्पलाइन की बैठक में हंसी व पान चबाना पड़ा भारी, बालाघाट में दो ASI समेत छह पुलिसकर्मी सस्पेंड
बुंदेलखंड ने खोया एक और सितारा
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व ही बुंदेली लोक संस्कृति के ध्वजवाहक पद्मश्री रामसहाय पांडे का निधन हुआ था। उनके बाद अब दाऊ भगवानदास रैकवार का जाना बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत के लिए एक बड़ी क्षति है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों और खेल प्रेमियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
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पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, दाऊ की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले सागर में प्राथमिक उपचार दिया गया था। सुधार न होने पर सात अप्रैल को उन्हें भोपाल स्थित एम्स में भर्ती कराया गया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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शस्त्र कला को दी वैश्विक पहचान
भगवानदास रैकवार ने अपना पूरा जीवन बुंदेली अखाड़ा और लाठी कला के संरक्षण में समर्पित कर दिया। उन्होंने न केवल युवाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए, बल्कि विलुप्त होती इस प्राचीन शस्त्र विद्या को आधुनिक दौर में प्रासंगिक बनाए रखा। उनकी इसी तपस्या का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार ने इसी वर्ष 25 जनवरी को उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान के लिए चुना था।
आज होगा अंतिम संस्कार
दाऊ की अंतिम यात्रा आज यानी रविवार दोपहर 12 बजे उनके निवास स्थान रामपुरा वार्ड स्थित छत्रसाल अखाड़े से निकाली जाएगी। यहाँ से उनकी पार्थिव देह को नरयावली नाका मुक्तिधाम ले जाया जाएगा, जहाँ राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा।
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