Satna News: मृत पुलिस जवान को मिला प्रमोशन, पदोन्नति सूची में नाम आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यवाहक उप निरीक्षक पदोन्नति सूची में दिवंगत पुलिसकर्मी राकेश सिंह बघेल का नाम शामिल होने से विभागीय लापरवाही उजागर हुई है। पिछले वर्ष निधन के बावजूद उनका नाम सूची में होने से रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यवाहक उप निरीक्षक पदोन्नति सूची में दिवंगत पुलिसकर्मी राकेश सिंह बघेल का नाम शामिल होने से विभागीय लापरवाही उजागर हुई है। पिछले वर्ष निधन के बावजूद उनका नाम सूची में होने से रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
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मध्य प्रदेश पुलिस विभाग की ओर से जारी कार्यवाहक उप निरीक्षकों (ASI से कार्यवाहक SI) की पदोन्नति सूची में एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। विभाग ने जिस सूची में 2035 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी है, उसमें एक ऐसे पुलिस जवान का नाम भी शामिल है जिनका पिछले वर्ष ही बीमारी के कारण निधन हो चुका था। मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
पदोन्नति सूची में मृत पुलिसकर्मी का नाम
जारी पदोन्नति सूची में क्रमांक 1115 पर राकेश सिंह बघेल का नाम दर्ज है। जबकि राकेश सिंह बघेल का पिछले वर्ष पन्ना जिले के देवेन्द्रनगर थाना में पदस्थापना के दौरान बीमारी के चलते कार्डियक अरेस्ट से निधन हो चुका था। इसके बावजूद उनका नाम पदोन्नति सूची में शामिल होने से विभागीय लापरवाही उजागर हुई है।
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सतना के रहने वाले थे राकेश सिंह बघेल
जानकारी के अनुसार राकेश सिंह बघेल मूल रूप से सतना जिले के कोठी थाना क्षेत्र के दिदौंध गांव के निवासी थे। वे मध्य प्रदेश पुलिस में सेवाएं दे रहे थे और पन्ना जिले में पदस्थ थे। बीमारी के कारण उनका असामयिक निधन हो गया था।
सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
मृत कर्मचारी का नाम पदोन्नति सूची में शामिल होने से यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि पदोन्नति आदेश जारी करने से पहले कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों, मृत्यु, सेवानिवृत्ति और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड का समुचित सत्यापन किया गया था या नहीं। सामान्यतः पदोन्नति से पूर्व संबंधित कर्मचारियों की सेवा स्थिति का मिलान किया जाता है।
विभागीय चूक बनी चर्चा का विषय
विभागीय सूत्रों के अनुसार पदोन्नति जैसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया में रिकॉर्ड का सटीक सत्यापन अनिवार्य होता है। ऐसे में एक दिवंगत पुलिसकर्मी का नाम सूची में शामिल होना गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना होगा कि विभाग इस त्रुटि पर क्या स्पष्टीकरण देता है और पदोन्नति सूची में आवश्यक संशोधन कब तक किया जाता है।
