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विश्व आदिवासी दिवस: उमंग सिंघार बोले-आदिवासी कोड की लड़ाई 100 बार लड़ेंगे, भोपाल में हजारों का शक्ति प्रदर्शन
Sun, 09 Aug 2026 05:53 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sun, 09 Aug 2026 05:53 PM IST
सार
भोपाल में विश्व आदिवासी दिवस पर हजारों आदिवासी समाज के लोग दशहरा मैदान में जुटे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, आदिवासी भीख नहीं, अपना अधिकार मांगता है। आदिवासी कोड की लड़ाई एक बार नहीं, 100 बार लड़ेंगे। छह स्थानों से निकली रैलियों में 22 से अधिक संगठनों ने हिस्सा लिया।
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भोपाल में आदिवासी रैली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विश्व आदिवासी दिवस पर रविवार को राजधानी भोपाल में आदिवासी समाज ने अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया। टीटी नगर दशहरा मैदान में आयोजित विशाल सम्मेलन में 22 से अधिक आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हजारों लोग शामिल हुए। अलग-अलग इलाकों से निकली रैलियां ढोल-मांदल और पारंपरिक वेशभूषा के साथ दशहरा मैदान पहुंचीं। सम्मेलन में मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी कोड की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज भीख नहीं मांगता, बल्कि अपना अधिकार मांगता है। आदिवासी कोड की लड़ाई एक बार नहीं, 100 बार लड़ी जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष नहीं, समाज का हिस्सा बनकर आया हूं
उमंग सिंघार ने कहा कि वे कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज का हिस्सा होने के नाते शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आदिवासी समाज की आबादी 22 प्रतिशत से अधिक है, इसके बावजूद समाज को उसके अधिकार नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। सिंघार ने कहा कि वे खुद आदिवासी समाज से आते हैं और गांवों में लोगों के सामने मौजूद कठिन परिस्थितियों से परिचित हैं।
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अंग्रेजों के समय अलग कोड था तो अब क्यों नहीं?
सिंघार ने आदिवासी कोड की मांग को सम्मेलन के मंच से प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय आदिवासियों के लिए अलग कोड की व्यवस्था थी, तो आज आदिवासी समाज को अपना कोड क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी कोड की मांग प्रदेश के आदिवासी समाज की आवाज है और इसे मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को आदिवासी कोड दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
भोपाल में छह स्थानों से निकली रैलियां
विश्व आदिवासी दिवस पर भोपाल के अलग-अलग इलाकों से आदिवासी समाज की रैलियां निकाली गईं। युवा पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। न्यू मार्केट और आसपास के इलाकों में रैली के दौरान युवा ढोल-मांदल और संगीत की धुन पर नाचते-गाते नजर आए। केकड़िया से नीलबड़ और अटल पथ होते हुए रैली दशहरा मैदान पहुंची। वहीं झिरी से कजलीखेड़ा, कोलार रोड, चूना भट्टी, कोलार तिराहा, मैनिट और माता मंदिर होते हुए रैली पहुंची। महाबली नगर स्थित सतपुड़ा भवन से शौर्य स्मारक, लिंक रोड, रोशनपुरा और रंगमहल चौराहे होते हुए भी बड़ी संख्या में लोग दशहरा मैदान पहुंचे।
यह भी पढ़ें-स्कूलों में बच्चों की हाजिरी भी होगी ऑनलाइन: 9वीं से 12वीं तक नई व्यवस्था लागू,कम उपस्थिति वाले छात्रों पर नजर
ढोल-मांदल की थाप पर दिखा आदिवासी गौरव
दशहरा मैदान में आयोजित सम्मेलन में आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। पारंपरिक परिधान, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच हजारों लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को बड़ा रूप दिया। सिंघार ने कहा कि आदिवासी युवा अब अपने अधिकार, पहचान और भविष्य को लेकर जागरूक है। उन्होंने समाज से अपनी संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।
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नेता प्रतिपक्ष नहीं, समाज का हिस्सा बनकर आया हूं
उमंग सिंघार ने कहा कि वे कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज का हिस्सा होने के नाते शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आदिवासी समाज की आबादी 22 प्रतिशत से अधिक है, इसके बावजूद समाज को उसके अधिकार नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। सिंघार ने कहा कि वे खुद आदिवासी समाज से आते हैं और गांवों में लोगों के सामने मौजूद कठिन परिस्थितियों से परिचित हैं।
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अंग्रेजों के समय अलग कोड था तो अब क्यों नहीं?
सिंघार ने आदिवासी कोड की मांग को सम्मेलन के मंच से प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय आदिवासियों के लिए अलग कोड की व्यवस्था थी, तो आज आदिवासी समाज को अपना कोड क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी कोड की मांग प्रदेश के आदिवासी समाज की आवाज है और इसे मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को आदिवासी कोड दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
भोपाल में छह स्थानों से निकली रैलियां
विश्व आदिवासी दिवस पर भोपाल के अलग-अलग इलाकों से आदिवासी समाज की रैलियां निकाली गईं। युवा पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। न्यू मार्केट और आसपास के इलाकों में रैली के दौरान युवा ढोल-मांदल और संगीत की धुन पर नाचते-गाते नजर आए। केकड़िया से नीलबड़ और अटल पथ होते हुए रैली दशहरा मैदान पहुंची। वहीं झिरी से कजलीखेड़ा, कोलार रोड, चूना भट्टी, कोलार तिराहा, मैनिट और माता मंदिर होते हुए रैली पहुंची। महाबली नगर स्थित सतपुड़ा भवन से शौर्य स्मारक, लिंक रोड, रोशनपुरा और रंगमहल चौराहे होते हुए भी बड़ी संख्या में लोग दशहरा मैदान पहुंचे।
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ढोल-मांदल की थाप पर दिखा आदिवासी गौरव
दशहरा मैदान में आयोजित सम्मेलन में आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। पारंपरिक परिधान, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच हजारों लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को बड़ा रूप दिया। सिंघार ने कहा कि आदिवासी युवा अब अपने अधिकार, पहचान और भविष्य को लेकर जागरूक है। उन्होंने समाज से अपनी संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।
