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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Goa trip in the name of searching for wife, two head constables line attached in Satna

'तुम्हारी पत्नी की लोकेशन गोवा में है': पीड़ित से कहकर सतना पुलिस के दो कांस्टेबल ने खूब घूमा शहर, लाइन अटैच

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना Published by: सतना ब्यूरो Updated Wed, 06 May 2026 03:20 PM IST
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सार

हद तो तब हो गई जब इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद महिला का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद भी पुलिसकर्मियों ने उसे दोबारा गोवा चलने का दबाव बनाया, जिससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो गया।

Goa trip in the name of searching for wife, two head constables line attached in Satna
थाना सिविल लाइन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सतना जिले से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। गुमशुदा महिला की तलाश के नाम पर उसके पति को गोवा ले जाकर हजारों रुपये खर्च कराने के आरोप में दो प्रधान आरक्षकों को लाइन अटैच कर दिया गया है। मामला मीडिया में आने के बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है।

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मामला कैसे सामने आया?
जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज एक गुमशुदगी मामले की जांच के दौरान पदस्थ प्रधान आरक्षक निरंजन मेहरा और रंजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित पति का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी पत्नी की लोकेशन गोवा में होने की बात कही और उसे वहां जाकर तलाश करने के लिए राजी किया। भरोसा दिलाया गया कि गोवा जाने से पत्नी का पता चल सकता है।
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पीड़ित से कराए गए हजारों रुपये खर्च
आरोप है कि दोनों प्रधान आरक्षकों ने पीड़ित को अपने साथ गोवा ले जाकर करीब 65 हजार रुपये का खर्च उसी से करवाया। इसमें आने-जाने का किराया, होटल में ठहरने और अन्य खर्च शामिल थे। पीड़ित के मुताबिक, इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद महिला का कोई सुराग नहीं मिला, इसके बाद भी पुलिसकर्मियों ने उसे दोबारा गोवा चलने का दबाव बनाया, जिससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो गया। जब पीड़ित को स्थानीय स्तर पर राहत नहीं मिली, तो उसने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। मामला सुर्खियों में आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई की और दो आरक्षकों पर कार्रवाई की है।

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दोनों प्रधान आरक्षक लाइन अटैच, जांच जारी
पुलिस विभाग ने प्राथमिक कार्रवाई करते हुए दोनों प्रधान आरक्षकों को लाइन अटैच कर दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या किसी गुमशुदा मामले में पीड़ित से इस तरह निजी खर्च कराना नियमों के खिलाफ नहीं है। क्या पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया, क्या इस मामले में और भी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं? इस तरह की घटनाएं न सिर्फ विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी कमजोर करती हैं। गुमशुदगी जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित परिवार पहले ही मानसिक तनाव से गुजर रहा होता है, ऐसे में इस तरह के आरोप और भी गंभीर हो जाते हैं।

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