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MP News: 'हम सभी सनातनी; अंग्रेजों ने हमें टूटा दर्पण दिखाकर अलग किया', सतना में भागवत बोले-वापस लेना होगा PoK

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 05 Oct 2025 06:28 PM IST
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सार

सतना में कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पीओके को भारत के घर का “कब्जा हुआ कमरा” बताया और उसे वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूरा भारत एक है, सभी सनातनी हैं। भागवत ने एकता, पारंपरिक मूल्यों, भाषा और संस्कृति को बनाए रखने पर ज़ोर दिया। 

RSS chief Mohan Bhagwat reached Satna, said- PoK is our part, we have to take it back.
सतना में एक आयोजन में शामिल हुए मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को भारत नामक घर का एक कमरा बताया है, लेकिन उसमें अजनबी लोग घुस आए हैं। एएनआई के मुताबिक मध्य प्रदेश के सतना में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस कमरे को वापस लेना होगा।
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अपने दो दिवसीय प्रवास पर सतना पहुंचे संघ संचालक डॉ. मोहन भागवत रविवार की दोपहर सिंधी कैंप में मेहरशाह दरबार के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने एकता और हिंदुत्व पर ज़ोर देते हुए सिंधी समाज के इतिहास और पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पूरा भारत एक घर है, लेकिन किसी ने हमारे घर का एक कमरा हटा दिया है। जहां मेरी मेज, कुर्सी और कपड़े रखे रहते थे। उन्होंने उस पर कब्ज़ा कर लिया है। कल, मुझे उसे वापस लेना होगा...। 
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डॉ. भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम सब एक हैं, सभी सनातनी और हिंदू हैं।" उन्होंने विभाजन के लिए अंग्रेजों को दोषी ठहराते हुए कहा कि "एक अंग्रेज ने हमें टूटा हुआ दर्पण दिखाकर अलग-अलग कर दिया था।" उन्होंने लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि अब हमें "अच्छे दर्पण में देखकर एक होने की आवश्यकता है," और जब हम "आध्यात्मिक परंपरा वाला दर्पण देखेंगे तो एक दिखेंगे।" उन्होंने गुरुओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें अपना अहंकार छोड़कर खुद को देखना चाहिए। 

RSS प्रमुख ने सिंधी समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि सिंधी भाई पाकिस्तान नहीं गए, वे अविभाजित भारत गए थे। उन्होंने कहा कि यह बात नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए, क्योंकि "हमारा घर तो है, परिस्थितियों ने हमें भेजा था। वह घर और यह घर अलग नहीं है, पूरा भारतवर्ष एक घर है।" उन्होंने कहा कि "हमारे घर में किसी ने कब्जा कर लिया। हमें एकजुट होकर अपना घर वापस लेना होगा।

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डॉ. भागवत ने लोगों से अपनी पारंपरिक वेशभूषा, भाषा और रहन-सहन को याद रखने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो जीवन भर इनका पालन करें। वरना कम से कम त्योहारों और विशेष दिनों पर अपनी पारंपरिक पोशाक ज़रूर पहनें। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति के लिए तीन भाषाओं का ज्ञान आवश्यक बताया, जिनमें राष्ट्रभाषा और क्षेत्रीय भाषा शामिल होनी चाहिए। अंत में उन्होंने लोगों से भारत के 'स्व' और स्वयं के 'स्व' को फिर से जागृत करने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में कई संत और राजनेता भी उपस्थित रहे। 
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