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MP News: SNCU में 40 नवजातों की जान दांव पर, क्या इंदौर जैसे खौफनाक हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
Mon, 22 Dec 2025 09:54 PM IST
सतना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
Published by: सतना ब्यूरो
Updated Mon, 22 Dec 2025 09:54 PM IST
सार
सतना-मैहर जिले के जिला अस्पताल की सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट में चूहों की मौजूदगी का वीडियो वायरल हुआ है। सबसे संवेदनशील वार्ड में 40 नवजात भर्ती हैं। यह घटना अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर करती है। पेस्ट कंट्रोल और स्टाफ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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वार्ड में घूमता चूहा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई। इंदौर और जबलपुर के अस्पतालों में चूहों की धमाचौकड़ी के मामले सामने आने के बाद अब सतना-मैहर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय जिला अस्पताल के सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में चूहों का आतंक देखने को मिला है। इस यूनिट में भर्ती करीब 40 नवजात बच्चों की जान पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
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एसएनसीयू से सामने आया चौंकाने वाला वीडियो
एसएनसीयू में चूहों की भागमभाग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो दो दिन पुराना है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक चूहा मुंह में मुंगौड़ी दबाए कंप्यूटर मॉनिटर के नीचे से निकलता है और वाई-फाई राउटर के ऊपर से भागता हुआ दिखाई देता है। जैसे ही उसे किसी के होने का अहसास हुआ वह मुंगौड़ी छोड़कर तेजी से भाग गया है। इसके अलावा दो अन्य चूहे भी इनबॉर्न यूनिट से बाहर निकलते हुए दौड़ते नजर आते हैं।
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सबसे संवेदनशील वार्ड में लापरवाही
एसएनसीयू अस्पताल का सबसे संवेदनशील और सुरक्षित माना जाने वाला वार्ड होता है। यहां उन नवजातों को भर्ती किया जाता है, जो जन्म के तुरंत बाद गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं या समय से पहले पैदा होते हैं। ऐसे में इस वार्ड में चूहों की मौजूदगी अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों से संक्रमण फैलने और नवजातों को नुकसान पहुंचने का खतरा हमेशा बना रहता है।
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इंदौर में पहले ही हो चुका है दर्दनाक हादसा
गौरतलब है कि इसी वर्ष अगस्त और सितंबर महीने में इंदौर के एमवायएच अस्पताल में चूहों के कुतरने से दो नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है। उस घटना के बाद पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे, लेकिन इसके बावजूद अन्य जिलों में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया, जिसका नतीजा अब सतना में सामने आ रहा है।
पेस्ट कंट्रोल सिर्फ कागजों तक सीमित
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि जिला अस्पताल के सभी वार्डों, खासकर एसएनसीयू में माउस ट्रैप और रैट ट्रैप केज लगाए गए हैं। साथ ही समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल भी कराया जाता है। वायरल वीडियो ने इन दावों की पोल खोल दी है। चूहों का खुलेआम घूमना यह साबित करता है कि पेस्ट कंट्रोल की प्रक्रिया प्रभावी नहीं है। यह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है।
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स्टाफ की लापरवाही भी आई सामने
एसएनसीयू के ऑफिस में मुंगौड़ी मिलने से यह भी साफ हो गया है कि कुछ कर्मचारी वार्ड के भीतर ही खाद्य सामग्री मंगाकर खाते-पीते हैं। खाने के कण इधर-उधर गिरने से चूहों को आसानी से भोजन मिल जाता है, जिससे उनकी आवाजाही बढ़ जाती है। यह आदत नवजातों के लिए संक्रमण का बड़ा कारण बन सकती है।
40 नवजातों की सुरक्षा पर सवाल
फिलहाल एसएनसीयू में करीब 40 नवजात भर्ती हैं। इनमें अधिकांश प्री-मैच्योर या गंभीर रूप से बीमार बच्चे हैं। ऐसे में चूहों की मौजूदगी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तुरंत प्रभावी पेस्ट कंट्रोल, साफ-सफाई और सख्त निगरानी नहीं की गई तो सतना में भी इंदौर जैसी घटना दोहराई जा सकती हैं।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आमजन और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि एसएनसीयू को तत्काल सुरक्षित किया जाए। दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो और पूरे अस्पताल में प्रभावी पेस्ट कंट्रोल अभियान चलाया जाए। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी जांच और आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा।
