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Sehore News: हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों के लिए नहीं मिला इंजेक्शन, लाचार पिता ने परिवार संग किया चक्काजाम
Mon, 22 Jun 2026 11:02 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 11:02 PM IST
सार
हीमोफीलिया से जूझ रहे दो बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए एक पिता सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन समाधान नहीं मिला। आखिर उसने अस्पताल के सामने परिवार समेत सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया।
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हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के लिए इंजेक्शन की मांग को लेकर पिता ने किया चक्काजाम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीहोर जिला अस्पताल में हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के लिए आवश्यक फैक्टर VIII इंजेक्शन की कमी को लेकर सोमवार को हंगामे की स्थिति बन गई। पिछले 21 दिनों से इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने से परेशान एक पिता ने परिवार के साथ जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
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जानकारी के अनुसार आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचंद्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में शरीर में रक्त का थक्का सामान्य रूप से नहीं बनता, जिसके कारण मरीजों को नियमित रूप से ‘फैक्टर VIII’ इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।
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पीड़ित पिता का कहना है कि डॉक्टरों ने समय पर इंजेक्शन लगना जरूरी बताया है लेकिन जिला अस्पताल में पिछले 21 दिनों से इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कई बार अस्पताल के चक्कर लगाए लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। श्रवण कुमार ने 19 जून को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर भी मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने प्रशासन को दिए आवेदन में बताया था कि वे बेरोजगार हैं और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बाजार से महंगा इंजेक्शन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी।
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लगातार प्रयासों के बावजूद जब समाधान नहीं निकला, तो सोमवार को श्रवण कुमार अपने परिवार के साथ जिला अस्पताल के सामने सड़क पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल प्रशासन और अधिकारी मौके पर पहुंचे। सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव ने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी। पीड़ित पिता ने बच्चों की स्थिति और अपनी आर्थिक मजबूरी से अधिकारियों को अवगत कराया।
सिविल सर्जन ने परिवार को आश्वासन दिया कि आवश्यक ‘फैक्टर VIII’ इंजेक्शन की जल्द व्यवस्था की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश के बाद परिवार ने विरोध प्रदर्शन समाप्त किया और स्थिति सामान्य हुई। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को समय पर उपचार मिलने के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
