पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Bhopal News: Smart City project demolishes 140 shops; promise of new ones remains unfulfilled after six years,

Bhopal News: स्मार्ट सिटी ने उजाड़ीं 140 दुकानें, नई देने का वादा छह साल से अधूरा, दर-दर भटक रहे व्यापारी

Tue, 30 Jun 2026 06:47 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 30 Jun 2026 06:47 PM IST
सार

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वर्ष 2020 में हटाए गए टीटी नगर के जवाहर चौक के 140 व्यापारी छह साल बाद भी नई दुकानों का इंतजार कर रहे हैं। बजट स्वीकृत होने और निर्माण शुरू होने के बावजूद काम बीच में रोक दिया गया। आर्थिक संकट से जूझ रहे व्यापारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर निर्माण दोबारा शुरू करने और जल्द स्थाई दुकानें आवंटित करने की मांग की है।

विज्ञापन
Bhopal News: Smart City project demolishes 140 shops; promise of new ones remains unfulfilled after six years,
व्यापारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वर्ष 2020 में टीटी नगर के जवाहर चौक से हटाए गए 140 व्यापारी आज भी स्थाई दुकानों का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने विस्थापन के समय नई दुकानें देने का भरोसा दिया था, इसके लिए व्यापारियों से राशि भी जमा कराई गई और निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन बीच में ही रोक दिया गया। छह साल बाद भी दुकानें नहीं मिलने से व्यापारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।  आदर्श जवाहर चौक व्यापारी संघ ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से भी गुहार लगाई और जल्द दुकानें आवंटित करने की मांग की।
विज्ञापन


1983 से चला रहे थे कारोबार, 2020 में हटा दी गईं दुकानें
व्यापारी संघ के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने बताया कि जवाहर चौक के व्यापारी वर्ष 1983 से नगर निगम को नियमित किराया देकर कारोबार कर रहे थे। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अटल पथ निर्माण के लिए 8 जनवरी 2020 को 140 दुकानें हटा दी गईं। उस समय प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया था कि प्लॉट क्रमांक 47 और 49 पर सभी विस्थापित व्यापारियों को स्थायी दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी।
विज्ञापन


पहली किस्त जमा कराई, फिर भी नहीं मिला हक
व्यापारियों का कहना है कि नई दुकानों के लिए प्रत्येक व्यापारी से 25-25 हजार रुपए जमा कराए गए। शुरुआत में छह लाख रुपए में दुकान देने की बात कही गई थी। बाद में योजना में बदलाव करते हुए आवास और दुकानों का संयुक्त परिसर बनाने का प्रस्ताव दिया गया, जिस पर व्यापारी सहमत भी हो गए। इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें दुकानें नहीं मिलीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बजट स्वीकृत, टेंडर हुआ, काम भी शुरू, फिर अचानक रुका निर्माण
व्यापारियों के अनुसार तत्कालीन प्रशासन के प्रयासों से करीब 140 करोड़ रुपए की परियोजना स्वीकृत हुई। निर्माण के लिए टेंडर जारी हुआ और ठेकेदार ने करीब छह महीने तक काम भी किया, लेकिन इसके बाद बिना किसी स्पष्ट कारण के निर्माण रोक दिया गया। व्यापारियों का आरोप है कि आज तक उन्हें यह नहीं बताया गया कि काम क्यों बंद हुआ।

यह भी पढ़ें-मानसून की रफ्तार थमी, लेकिन बारिश का दौर जारी, आज 50 जिलों में अलर्ट, 2 जुलाई से नया सिस्टम



रोजगार छिना, कई परिवार आर्थिक संकट में
दुकानें हटने के बाद अधिकांश व्यापारियों की आजीविका प्रभावित हुई। कई लोग किराए की छोटी दुकानों से काम चला रहे हैं, जबकि कुछ को दूसरे प्रतिष्ठानों पर काम करना पड़ रहा है। व्यापारी संघ का दावा है कि कोरोना काल के दौरान 11 व्यापारियों की मृत्यु भी हो चुकी है और कई परिवार गंभीर आर्थिक परेशानियों से गुजर रहे हैं।

यह भी पढ़ें-जुलाई में रेलवे का बदलाव: 6 ट्रेनें रद्द, 34 ट्रेनों के रूट बदलेंगे, हैदराबाद-गोरखपुर स्पेशल के बढ़े 10 फेरे


अब जनसुनवाई से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार
राकेश गुप्ता ने बताया कि व्यापारी जनसुनवाई में शिकायत कर चुके हैं। अब मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से मिलने का समय भी मांगा जा रहा है। उनका कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं निकला। व्यापारियों ने प्रशासन से जल्द निर्माण शुरू कर सभी विस्थापितों को स्थाई दुकानें देने की मांग की है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed