सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sehore News: Newborn Loses Battle for Life, Parents Turn Away; Body Lies in Mortuary for Four Days

MP News: 70 हजार के कर्ज में कैद था पिता, इसलिए अस्पताल नहीं पहुंचा; चार दिन मर्चुरी में सड़ती रही बेटी की लाश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Thu, 07 May 2026 04:10 PM IST
विज्ञापन
सार

सीहोर जिला अस्पताल में नवजात बच्ची का शव चार दिन तक मर्चुरी में पड़ा रहा। पिता ने आरोप लगाया कि 70 हजार के कर्ज के बदले किसान ने उसे बंधक बना रखा था, इसलिए वह बेटी की मौत के बाद भी अस्पताल नहीं पहुंच सका। पुलिस अब बंधुआ मजदूरी एंगल से जांच कर रही है।

Sehore News: Newborn Loses Battle for Life, Parents Turn Away; Body Lies in Mortuary for Four Days
चार दिन पहुंचा पिता बेटी का शव लेने - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

सीहोर जिला अस्पताल से गुरुवार को ऐसा दर्दनाक दृश्य सामने आया, जिसने हर देखने वाले को झकझोर दिया। एक गरीब पिता अपनी नवजात बेटी का शव गोद में उठाए अस्पताल से बाहर निकला। बच्ची की मौत चार दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन उसका शव मर्चुरी में पड़ा रहा। वजह बताई गई 70 हजार रुपये का कर्ज और कथित बंधक मजदूरी। पिता का आरोप है कि खेत मालिक ने उसे जबरन रोक रखा था, इसलिए वह बेटी की आखिरी सांसों के वक्त भी उसके पास नहीं पहुंच पाया।

Trending Videos


जानकारी के मुताबिक आष्टा तहसील के ग्राम हकीमाबाद निवासी रवि रघुवंशी और उसकी पत्नी अंजलि के यहां 24 मार्च को जुड़वा बच्चियों का जन्म हुआ था। जन्म के दौरान ही एक नवजात की मौत हो गई थी, जबकि दूसरी बच्ची बेहद कमजोर हालत में पैदा हुई। उसका वजन मात्र 1.4 किलो था। हालत गंभीर होने पर उसे सीहोर जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। करीब 40 दिनों तक डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने की कोशिश की। मशीनों और दवाइयों के सहारे मासूम जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ती रही, लेकिन आखिरकार 3 मई को उसने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


मौत के बाद भी नहीं पहुंचा परिवार
बच्ची की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सूचना देने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। अस्पताल रिकॉर्ड में माता-पिता का मोबाइल नंबर दर्ज नहीं था। सिर्फ खेत मालिक का नंबर दर्ज कराया गया था। अस्पताल कर्मचारियों ने कई बार कॉल किए, लेकिन फोन बंद मिला। चार दिन तक शव मर्चुरी में पड़ा रहा। अस्पताल प्रशासन इंतजार करता रहा कि कोई परिजन आएगा, लेकिन जब कोई नहीं पहुंचा तो मामला पुलिस तक पहुंचा दिया गया।

ये भी पढ़ें- एक विवाह ऐसा भी: जेल की दीवारों में पनपा प्यार, मुस्लिम महिला जेलर ने उम्रकैद काट चुके हिंदू युवक से की शादी

पुलिस ने गांव-गांव तलाशे माता-पिता
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस पहले आष्टा तहसील के हकीमाबाद गांव पहुंची। वहां पता चला कि रवि और उसकी पत्नी मजदूरी के लिए देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र के जालेरिया गांव गए हुए हैं। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और दोनों को अपने साथ सीहोर लेकर आई। गुरुवार को अस्पताल में कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद नवजात का शव माता-पिता को सौंपा गया। अस्पताल से बाहर निकलते वक्त पिता की गोद में बेटी का शव था और आंखों में बेबसी साफ दिखाई दे रही थी।

“कर्ज के बदले बंधक बना रखा था”
पूछताछ में पिता रवि रघुवंशी ने जो कहानी बताई, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। रवि ने आरोप लगाया कि वह किसान मनोज जाट के यहां मजदूरी करता था और उस पर करीब 70 हजार रुपए का कर्ज था। इसी कर्ज के बदले किसान ने उसे और उसके साथी को जबरन अपने पास रोक रखा था। रवि का कहना है कि उसने कई बार अस्पताल जाने की बात कही, लेकिन उसे जाने नहीं दिया गया। वह अपनी बीमार बच्ची से मिलने तक नहीं पहुंच सका। रवि ने पुलिस को बताया कि अगर उसे समय पर अस्पताल जाने दिया जाता तो शायद उसकी बेटी की जान बच सकती थी। उसके आरोपों ने अब इस मामले को बंधुआ मजदूरी और मानव शोषण के एंगल तक पहुंचा दिया है।

डॉक्टर बोले- जन्म से ही बेहद कमजोर थी बच्ची
सीहोर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची प्रीमैच्योर थी और जन्म के समय उसका वजन बहुत कम था। हालत गंभीर होने के कारण उसे आईसीयू में रखा गया था। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची का इलाज लगातार चलता रहा, लेकिन समय से पहले जन्म और अत्यधिक कमजोरी के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इलाज के दौरान बच्ची का पिता केवल एक-दो बार ही अस्पताल आया था।

ये भी पढ़ें- महंगी पड़ी इश्कबाजी: होटल के कमरे में प्रेमिका के संग रंगे हाथों पकड़ाया डॉक्टर पति, पत्नी ने जमकर की धुनाई

अस्पताल रिकॉर्ड में सिर्फ मालिक का नंबर
मामले में एक चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि भर्ती के समय माता-पिता ने अस्पताल में न तो आधार कार्ड जमा कराया और न ही अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराया। अस्पताल रिकॉर्ड में सिर्फ खेत मालिक का नंबर लिखा गया था। इसी कारण बच्ची की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन सीधे परिजनों तक नहीं पहुंच पाया। यह लापरवाही अब सवालों के घेरे में है कि आखिर गरीब मजदूरों की पहचान और संपर्क व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों थी।

पुलिस जांच में बंधुआ मजदूरी का एंगल
जिला अस्पताल के प्रभारी पुलिस अधिकारी नीरज ने बताया कि पूरे मामले की जांच कोतवाली पुलिस द्वारा की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या सचमुच मजदूर को कर्ज के बदले बंधक बनाकर रखा गया था या नहीं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी और अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed