MP: घर-घर छिपी विरासत खोजेगा प्रशासन, सीहोर में शुरू हुआ धरोहर बचाने का डिजिटल मिशन; पांडुलिपियों को मिला कवच
सीहोर में 101 प्राचीन पांडुलिपियों और सारू-मारू गुफाओं के ऐतिहासिक शिलालेख का “ज्ञान भारतम” एप पर डिजिटल दस्तावेजीकरण किया गया। इस पहल से जिले की सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित होगी और शोधकर्ताओं व नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
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इतिहास के पन्नों में सिमटी सदियों पुरानी अमूल्य धरोहर को अब डिजिटल सुरक्षा कवच मिल गया है। जिले की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया। कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देश पर श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, छावनी में संरक्षित 101 प्राचीन पांडुलिपियों का विवरण “ज्ञान भारतम” एप पर दर्ज किया गया। इसके साथ ही सारू-मारू गुफाओं में स्थित ऐतिहासिक शिलालेख को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर सीहोर की विरासत को नया संरक्षण दिया गया।
101 पांडुलिपियों का डिजिटल दस्तावेजीकरण बना ऐतिहासिक क्षण
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में वर्षों से सुरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियां जिले की ज्ञान-संपदा का अनमोल खजाना मानी जाती हैं। इन पांडुलिपियों का सूक्ष्म परीक्षण कर उनकी विषय-वस्तु, भाषा, ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की स्थिति और अन्य आवश्यक जानकारियां “ज्ञान भारतम” एप पर अपलोड की गईं। इन प्राचीन पांडुलिपियों में भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्म, दर्शन, संस्कृति और सामाजिक जीवन से जुड़े दुर्लभ तथ्य संजोए गए हैं। इनमें ऐसी सामग्री भी शामिल है, जो समय के साथ नष्ट होने की कगार पर पहुंच सकती थी। डिजिटल संरक्षण के बाद अब यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रहेगी और शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों व इतिहासकारों के लिए अध्ययन का मजबूत आधार बनेगी।
सारू-मारू गुफाओं का शिलालेख भी हुआ डिजिटाइज
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विशेषज्ञों के अनुसार कागज और हस्तलिखित दस्तावेज समय के साथ नमी, तापमान और अन्य प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। कई बार अमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेज हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में “ज्ञान भारतम” एप जैसी पहलें इतिहास को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने का सशक्त माध्यम बन रही हैं। इससे दस्तावेजों का मूल स्वरूप सुरक्षित रहेगा और उनकी प्रतियां लंबे समय तक संरक्षित की जा सकेंगी।
नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने की पहल
डिजिटल दस्तावेजीकरण केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम बन रहा है। अब विद्यार्थी और शोधकर्ता आधुनिक तकनीक के जरिए इन प्राचीन स्रोतों तक पहुंचकर अध्ययन कर सकेंगे। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान मिलने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
कलेक्टर की अपील- घर-घर से सामने आएं धरोहर संरक्षक
कलेक्टर बालागुरू के. ने जिलेवासियों से अपील की कि यदि उनके घरों, मंदिरों या निजी संग्रहों में प्राचीन दस्तावेज, पांडुलिपियां या अन्य ऐतिहासिक सामग्री सुरक्षित है, तो वे आगे आकर उन्हें डिजिटल संरक्षण के लिए उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को बचाने का जनआंदोलन है। इस अवसर पर श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर छावनी सीहोर के राजकुमार जैन, गौरव अंकुर जैन, ई-दक्ष केंद्र से डॉ. गणेश लाल जैन तथा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस सीहोर की डॉ. प्रमिला जैन सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को सीहोर की सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर बताया।

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