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बीज से बाज़ार तक दलहन क्रांति: अमलाहा में शिवराज सिंह चौहान ने रखी पूरी रूपरेखा; 1,000 दाल मिलों का लक्ष्य तय

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी Updated Sat, 07 Feb 2026 06:27 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में देशव्यापी दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत हुई। बैठक में दलहन उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता खत्म करने और किसानों को बीज से बाज़ार तक लाभ देने की ठोस रणनीति तय की गई।

Union Minister Shivraj Singh Chouhan launches nationwide Pulse Self-Sufficiency Mission in Sehore
देशव्यापी दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह व सीएम डॉ. मोहन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से देश की दलहन नीति और किसान-केंद्रित कृषि विमर्श का नया अध्याय जुड़ा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में यहाँ देशव्यापी दलहन क्रांति का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

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राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, शीर्ष वैज्ञानिक, ICAR-ICARDA के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), बीज कंपनियां और दाल मिल प्रतिनिधि एक मंच पर उपस्थित रहे। बैठक से स्पष्ट संदेश दिया गया कि दलहन में आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप अब खेतों और किसानों के बीच से तय होगा, न कि केवल फाइलों और दफ्तरों में।

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दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का स्पष्ट रोडमैप
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आत्मनिर्भर भारत आवश्यक है और दलहन में आत्मनिर्भरता इसकी एक अहम कड़ी है। उन्होंने कहा कि आज दालें आयात करना हमारे लिए गर्व का विषय नहीं, बल्कि शर्म की बात है। हमारा लक्ष्य है कि भारत आने वाले समय में दालों का निर्यातक देश बने।

उन्होंने बताया कि ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ के तहत बीज से लेकर बाज़ार तक पूरी वैल्यू चेन पर सरकार की निगरानी रहेगी, ताकि उत्पादन बढ़े और किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।


किसानों के हित सर्वोपरि, समझौतों पर विपक्ष को जवाब
अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर उठ रहे सवालों पर शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि किसी भी समझौते में भारत के किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह भ्रम फैलाया गया कि किसान बर्बाद हो जाएंगे, जबकि सच्चाई यह है कि किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं। उन्होंने मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों की ओर से धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश के किसानों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

दलहन के लिए ठोस योजनाएँ: क्लस्टर, बीज ग्राम और दाल मिलें
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया जाएगा। बीज ग्राम विकसित किए जाएंगे और देशभर में 1,000 दाल मिलें स्थापित की जाएंगी। दाल मिल लगाने पर सरकार की ओर से ₹25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग हो और किसानों को वैल्यू एडिशन का लाभ मिल सके। इनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश में स्थापित की जाएंगी।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि अब किसी भी नए बीज को दिल्ली में नहीं, बल्कि सीधे किसानों के बीच राज्यों में जाकर रिलीज़ किया जाएगा। क्लस्टर में शामिल किसानों को बीज किट और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी।

शोध से खेत तक की मजबूत कड़ी
शिवराज सिंह चौहान ने अमलाहा स्थित FLRP, ICAR और ICARDA के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि मसूर, चना, मूंग, उड़द सहित विभिन्न दलहनों की उत्पादकता बढ़ाने, जल्दी पकने वाली और रोग-प्रतिरोधी किस्में विकसित करने पर तेजी से काम हो रहा है, ताकि किसान को दलहन की खेती में अधिक लाभ मिल सके।

अमलाहा से गया स्पष्ट संदेश
अमलाहा में हुई इस राष्ट्रीय बैठक से दो बड़े संदेश सामने आए पहला, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं, और दूसरा, दलहन आत्मनिर्भरता को नीति, विज्ञान, MSP, बीज सुधार और बाज़ार के ज़रिये ज़मीन पर उतारा जाएगा। अमलाहा से निकली यह पहल दलहन आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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