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Seoni News: आवारा कुत्तों का आतंक, हर गली में फैला डर, 33 महीनों में 17 हजार से ज्यादा काटने के मामले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिवनी
Published by: सिवनी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 08:17 PM IST
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सार
जिले में आवारा कुत्तों का आतंक आम जनजीवन के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सुबह की सैर से लेकर बच्चों के स्कूल जाने तक हर कदम पर डर का माहौल है। लगातार बढ़ रहे कुत्ते काटने के मामलों ने प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क पर घूमते आवारा कुत्ते
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विस्तार
जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। पिछले 33 महीनों में 17,451 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं लेकिन हालात काबू में लाने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस और निरंतर कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
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हाल ही में सिवनी शहर में एक ही दिन में 20 से अधिक लोगों को कुत्तों ने काट लिया, जिससे दहशत का माहौल बन गया। घटना के बाद नगर पालिका ने 18 कुत्तों को पकड़ा जरूर लेकिन इसके बाद अभियान धीमा पड़ गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई।
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सुबह की सैर भी खतरे से खाली नहीं
भैरोगंज, कॉलेज रोड सहित कई मोहल्लों में सुबह टहलने निकलने वाले लोग डर के साए में रहते हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाएं अधिक सामने आ रही हैं। रात के समय कुत्तों के झुंड राहगीरों और दोपहिया वाहनों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
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ग्रामीण इलाकों में स्थिति और खराब
धनौरा, केवलारी, घंसौर, बरघाट, लखनादौन, छपारा और कुरई जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के पास न तो कुत्तों को पकड़ने की टीम है, न ही बजट उपलब्ध है और न कोई विशेष संसाधन।
बरघाट नगर परिषद के पास वाहन होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। वहीं लखनादौन नगर परिषद में कुत्ता पकड़ने वाला पुराना वाहन अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है।
सिवनी नगर पालिका के सीएमओ विशाल सिंह मस्कोले के अनुसार अब तक 94 कुत्तों का नसबंदी ऑपरेशन किया गया है। इनमें से 77 कुत्तों को वापस छोड़ दिया गया है, जबकि 23 अब भी सेंटर में रखे गए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इन आंकड़ों के बावजूद जमीनी हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है।
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नियमित रूप से कुत्ता पकड़ो अभियान चलाया जाए, नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया तेज की जाए, स्कूलों और रिहायशी इलाकों को प्राथमिकता दी जाए, ग्रामीण निकायों को अलग से बजट और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। जब तक ठोस और सतत कार्रवाई नहीं होती, लोगों में आवारा कुत्तों का डर बना रहेगा।
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