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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Narwar Fort robbed; 400-year-old cannon missing; armed criminals leave guards at the mercy of sticks.

MP: एमपी के इस एतिहासिक किले में लूट, हथियारों से लैस बदमाश करोड़ों की तोप उड़ा ले गए; चौकीदार देखते रह गए

Fri, 17 Jul 2026 01:14 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी Published by: शिवपुरी ब्यूरो Updated Fri, 17 Jul 2026 01:14 PM IST
सार

शिवपुरी के एतिहासिक नरवर किले से 16वीं सदी की एक बेशकीमती तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 25-30 हथियारबंद बदमाशों ने सुरक्षाकर्मी को धमकाकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी 12 दिन पहले रेकी कर चुके थे और दूसरी बार पूरी तैयारी के साथ लौटकर तोप ले गए।

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Narwar Fort robbed; 400-year-old cannon missing; armed criminals leave guards at the mercy of sticks.
400 साल पुरानी तोप चोरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिवपुरी में भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की कहानियों को सीने में संजोए नरवर किला अब इतिहास की लूट का गवाह बन गया है। 15-16 जुलाई की रात हथियारबंद बदमाशों ने किले की सुरक्षा को तार-तार कर 16वीं सदी की एक बेशकीमती तोप पार कर दी। हैरानी ये कि चोरों ने 12 दिन पहले ही इस वारदात की रिहर्सल कर ली थी।
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आधी रात को 25-30 लोग अचानक पीछे के रास्ते से घुस आए
ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन की आंखों में अब भी दहशत है। वे बताते हैं, आधी रात को 25-30 लोग अचानक पीछे के रास्ते से घुस आए। सबके हाथों में हथियार थे। हमारे पास बचाव के लिए सिर्फ एक लाठी थी, टॉर्च तक नहीं। उन्होंने घेरकर जान से मारने की धमकी दी। जान बची तो लाखों पाए।
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पांच जुलाई को पहली बार आए थे बदमाश
बदमाश किले की ओपन कचहरी तक पहुंचे जहां सिंधिया काल की 14 तोपें रखी थीं। उनमें से एक को उठाकर ले गए। पहले गिराई फिर पूरी तैयारी से ले गए पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पांच जुलाई को बदमाश पहली बार आए थे। उन्होंने एक तोप को जगह से हिलाकर नीचे गिरा दिया, लेकिन वजन ज्यादा होने से उसे ले नहीं जा सके। 15-16 जुलाई को इस बार वे पूरी तैयारी के साथ लौटे। साथ में लोडिंग वाहन थे। किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर मिले गहरे टायरों के निशान इस बात की गवाही दे रहे हैं।
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ऐसी तोप 2 से 5 करोड़ रुपये तक में बिकती है
16 जुलाई को सुबह केयरटेकर ने थाने पहुंचकर शिकायत दी। पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक ये तोपें सिर्फ लोहे के टुकड़े नहीं हैं। ये पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु के मिश्रण से बनी हैं। इन पर फारसी और देवनागरी में राजचिह्न उकेरे हुए हैं। आधिकारिक तौर पर इनका कोई मोल नहीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय काला बाजार में 16वीं सदी की ऐसी तोप 2 से 5 करोड़ रुपये तक में बिकती है। लंदन-न्यूयॉर्क के अवैध नीलामी घरों में इनकी भारी मांग है। इसी वजह से पुलिस अब किसी अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह के जुड़े होने की आशंका जता रही है।

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14 में से अब 13 तोपें ही बची हैं
घटना के बाद एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने कहा, मामले की गहराई से जांच होगी। नरवर जाकर पूछताछ की जाएगी। किसी बड़े गिरोह से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने भी किले का दौरा करने की बात कही है। उनका कहना है, यह बेहद गंभीर है। सुरक्षा का आकलन कर तोप की बरामदगी के लिए पुलिस पर दबाव बनाया जाएगा। नरवर किला कभी अजेय माना जाता था।

आज उसी किले में गार्ड बिना टॉर्च और हथियार के ड्यूटी कर रहे हैं। 14 में से अब 13 तोपें ही बची हैं। सवाल ये है कि जब 5 जुलाई को तोप गिराने की कोशिश हुई थी, तब अलर्ट क्यों नहीं हुआ? क्या किसी को भनक नहीं लगी? अगर समय रहते नींद नहीं टूटी तो किले की बाकी धरोहरें भी एक-एक कर गायब हो जाएंगी।
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