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NEET Success Story: रोज सिर्फ चार-पांच घंटे की पढ़ाई, निरंतर मेहनत से आर्यमन सिंह बने मध्य प्रदेश टॉपर
Fri, 17 Jul 2026 11:03 AM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Fri, 17 Jul 2026 11:03 AM IST
सार
NEET UG 2026 Result: जबलपुर के आर्यमन सिंह सोलंकी ने नीट यूजी 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 46 हासिल कर मध्य प्रदेश में टॉप किया है। आर्यमन ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित पढ़ाई, स्पष्ट लक्ष्य और परिवार व शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया।
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आर्यमन सिंह सोलंकी, (नीट यूजी 2026 के एमपी टॉपर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश की शीर्ष मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 का परीक्षा परिणाम एनटीए ने गुरुवार देर रात को जारी किया है। हालांकि इस बार कोटा का फिर से दबदबा रहा। टॉप 10 में कोटा के चार उम्मीदवारों ने जगह बनाई है। वहीं, मध्य प्रदेश के आर्यमन सिंह सोलंकी ने नीट यूजी शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक (AIR) 46 रैंक प्राप्त की है।
इसके साथ ही वह मध्य प्रदेश के स्टेट टॉपर बने हैं। आर्यमन सिंह जबलपुर से हैं। इस सफलता के बाद उनको हर तरफ से बधाईयां मिल रही हैं। परिजन खुश हैं। चलिए जानते हैं इस बीच आर्यमन और उनके माता-पिता ने क्या-क्या बताया है?
'मैं हर दिन लगभग 4 से 5 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करता था'
आर्यमन सिंह सोलंकी ने अपनी सफलता का मंत्र बताते हुए कहा कि मैंने नीट की गंभीर तैयारी कक्षा 11 से शुरू की थी। हालांकि, कक्षा 9 और 10 के दौरान ही मैंने 11वीं और 12वीं के कुछ विषय पढ़ लिए थे, लेकिन वास्तविक और गंभीर तैयारी 11वीं से ही शुरू हुई। मैं रोज 8 या 10 घंटे पढ़ाई नहीं करता था। मैं हर दिन लगभग 4 से 5 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करता था। मेरी सफलता का सबसे बड़ा कारण यही निरंतरता (कंसिस्टेंसी) रही। एक दिन 10 घंटे पढ़कर अगले दिन बिल्कुल न पढ़ने से कोई फायदा नहीं होता। हर दिन लगातार और नियमित पढ़ाई करना ही सफलता की कुंजी है।
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'हमारा सपना हमेशा से एम्स दिल्ली में पढ़ने का था'
इस बीच उनकी मां डॉ. अनुपमा सोलंकी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जब आपके पास आर्यमन जैसा बच्चा हो तो माता-पिता का काम काफी आसान हो जाता है। वह शुरू से ही अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह केंद्रित था। सबसे बड़ी बात यह थी कि उसका उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था।
डॉ. अनुपमा कहती हैं कि हर माता-पिता का सपना होता है कि उनकी पहचान उनके बच्चे के नाम से हो, और आज हमारा वह सपना पूरा हो गया। इसके अलावा हम दोनों डॉक्टर हैं और हमारा सपना हमेशा से एम्स दिल्ली में पढ़ने का था। आर्यमन ने हमारे दोनों सपने पूरे कर दिए। एक माता-पिता के रूप में और दूसरा डॉक्टर के रूप में। आज से बड़ा दिन हमारे लिए कोई और नहीं हो सकता।
जानें क्या बोले आर्यमन के पिता डॉ. फणींद्र
वहीं, आर्यमन के पिता डॉ. फणींद्र सोलंकी ने कहा मैं और मेरी पत्नी दोनों डॉक्टर हैं, और आर्यमन की बड़ी बहन तान्या सोलंकी भी डॉक्टर हैं। उन्होंने एमबीबीएस पूरा किया है। आर्यमन ने अपनी बहन को मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते देखा। कोविड काल के दौरान जब वह घर पर पढ़ाई करती थीं, तब आर्यमन कक्षा 7 या 8 में था। उन्हें देखकर ही उसने तय कर लिया कि उसे भी डॉक्टर बनना है।
ये भी पढ़ें- केन-बेतवा विस्थापन: मुआवजे से लेकर पुनर्वास तक कई सवाल, 10वें दिन भी अनशन जारी; बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई चिंता
डॉ. फणींद्र ने कहा कि जैसा कि आर्यमन ने भी कहा, 6 मई से हमने उसे मानसिक रूप से इस संभावना के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था कि शायद उसे दोबारा तैयारी करनी पड़े। हमें यह भी पता था कि यदि दोबारा परीक्षा होती है तो उसका प्रश्नपत्र पहले से अधिक कठिन होगा, क्योंकि जब भी री-नीट हुई है, पेपर अपेक्षाकृत कठिन रहा है। कठिन प्रश्नपत्र का फायदा उन छात्रों को मिलता है, जिन्होंने ईमानदारी और गंभीरता से तैयारी की होती है, क्योंकि वे ऐसे पेपर में भी अच्छा प्रदर्शन कर लेते हैं।
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इसके साथ ही वह मध्य प्रदेश के स्टेट टॉपर बने हैं। आर्यमन सिंह जबलपुर से हैं। इस सफलता के बाद उनको हर तरफ से बधाईयां मिल रही हैं। परिजन खुश हैं। चलिए जानते हैं इस बीच आर्यमन और उनके माता-पिता ने क्या-क्या बताया है?
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'मैं हर दिन लगभग 4 से 5 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करता था'
आर्यमन सिंह सोलंकी ने अपनी सफलता का मंत्र बताते हुए कहा कि मैंने नीट की गंभीर तैयारी कक्षा 11 से शुरू की थी। हालांकि, कक्षा 9 और 10 के दौरान ही मैंने 11वीं और 12वीं के कुछ विषय पढ़ लिए थे, लेकिन वास्तविक और गंभीर तैयारी 11वीं से ही शुरू हुई। मैं रोज 8 या 10 घंटे पढ़ाई नहीं करता था। मैं हर दिन लगभग 4 से 5 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई करता था। मेरी सफलता का सबसे बड़ा कारण यही निरंतरता (कंसिस्टेंसी) रही। एक दिन 10 घंटे पढ़कर अगले दिन बिल्कुल न पढ़ने से कोई फायदा नहीं होता। हर दिन लगातार और नियमित पढ़ाई करना ही सफलता की कुंजी है।
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'हमारा सपना हमेशा से एम्स दिल्ली में पढ़ने का था'
इस बीच उनकी मां डॉ. अनुपमा सोलंकी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जब आपके पास आर्यमन जैसा बच्चा हो तो माता-पिता का काम काफी आसान हो जाता है। वह शुरू से ही अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह केंद्रित था। सबसे बड़ी बात यह थी कि उसका उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था।
डॉ. अनुपमा कहती हैं कि हर माता-पिता का सपना होता है कि उनकी पहचान उनके बच्चे के नाम से हो, और आज हमारा वह सपना पूरा हो गया। इसके अलावा हम दोनों डॉक्टर हैं और हमारा सपना हमेशा से एम्स दिल्ली में पढ़ने का था। आर्यमन ने हमारे दोनों सपने पूरे कर दिए। एक माता-पिता के रूप में और दूसरा डॉक्टर के रूप में। आज से बड़ा दिन हमारे लिए कोई और नहीं हो सकता।
जानें क्या बोले आर्यमन के पिता डॉ. फणींद्र
वहीं, आर्यमन के पिता डॉ. फणींद्र सोलंकी ने कहा मैं और मेरी पत्नी दोनों डॉक्टर हैं, और आर्यमन की बड़ी बहन तान्या सोलंकी भी डॉक्टर हैं। उन्होंने एमबीबीएस पूरा किया है। आर्यमन ने अपनी बहन को मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते देखा। कोविड काल के दौरान जब वह घर पर पढ़ाई करती थीं, तब आर्यमन कक्षा 7 या 8 में था। उन्हें देखकर ही उसने तय कर लिया कि उसे भी डॉक्टर बनना है।
ये भी पढ़ें- केन-बेतवा विस्थापन: मुआवजे से लेकर पुनर्वास तक कई सवाल, 10वें दिन भी अनशन जारी; बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई चिंता
डॉ. फणींद्र ने कहा कि जैसा कि आर्यमन ने भी कहा, 6 मई से हमने उसे मानसिक रूप से इस संभावना के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था कि शायद उसे दोबारा तैयारी करनी पड़े। हमें यह भी पता था कि यदि दोबारा परीक्षा होती है तो उसका प्रश्नपत्र पहले से अधिक कठिन होगा, क्योंकि जब भी री-नीट हुई है, पेपर अपेक्षाकृत कठिन रहा है। कठिन प्रश्नपत्र का फायदा उन छात्रों को मिलता है, जिन्होंने ईमानदारी और गंभीरता से तैयारी की होती है, क्योंकि वे ऐसे पेपर में भी अच्छा प्रदर्शन कर लेते हैं।
