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Shivpuri News: मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुआ थायराइड ग्रंथि का ऑपरेशन, 500 ग्राम की गांठ निकाली

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी Published by: शिवपुरी ब्यूरो Updated Sat, 18 Jan 2025 10:13 PM IST
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सार

शिवपुरी जिले के मेडिकल कॉलेज में पहली बार थायराइड ग्रंथि का ऑपरेशन हुआ। इस दौरान 500 ग्राम की गांठ निकाली गई।

shivpuri medical collage operation
ऑपरेशन किया गया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

शिवपुरी जिला मुख्यालय पर स्थित श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में पहली बार गले में थायराइड की गांठ होने पर थायराइड ग्रंथि को अधिष्ठाता डॉक्टर डी परमहंस द्वारा ऑपरेशन कर निकाला गया। मरीज के गले में थायराइड गांठ लगभग 500 ग्राम की बताई जा रही है। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने गांठ को बॉयोप्सी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की लैब में भेजा है।

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ईएनटी विभाग की डॉक्टर मेघा प्रभाकर ने बताया कि पिछले महीने मेडिकल कॉलेज में दिखाने आईं ग्राम नाहरई करैरा निवासी की एक महिला पिछले 5-6 साल से गले में थायराइड ग्रंथि के रोग से पीड़ा में थी। मरीज ने बताया कि इसके लिए उसने अन्य शहरों के कई बार चक्कर काटे। सारी जांचों के उपरांत हमने ऑपरेशन की सलाह दी। मरीज की थायराइड ग्रंथि के 10बाई 6बाई 3 सेंटीमीटर की गांठ थी।श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में शुक्रवार को ऑपरेशन के दौरान अधिष्ठाता डॉक्टर डी परमहंस के साथ एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉक्टर शिल्पा अग्रवाल, ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉक्टर धीरेंद्र त्रिपाठी की टीम डॉक्टर मेघा प्रभाकर, डॉक्टर मीनाक्षी गर्ग सहित ओटी इंचार्ज प्रियंका शुक्ला की टीम ने ऑपरेशन में सहयोग किया।
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मेजर ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ
मरीज को ऑब्जरवेशन के लिए रखा गया है, इस दौरान अधिष्ठाता डॉक्टर डी परमहंस का कहना था कि जब ईएनटी विभाग द्वारा मुझे थायराइड ग्रंथि गठान के बारे में बताया तो मैनें स्वयं ऑपरेशन करने को कहा और ऑपरेशन किया। ऑपरेशन पूर्ण रूप से सफल रहा और मरीज की आवाज व श्वास नली में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं पाई गई। ऐसे मेजर ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ है। हां देरी होने पर गले में थायराइड गांठ से श्वांस नली और आवाज जाने के साथ-साथ कैंसर का खतरा हो सकता था।

सफल ऑपरेशन के लिए परिजनों ने मेडिकल कॉलेज की टीम का आभार जताया। नाक कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि थाइरोडेक्टॉमी यानि थायराइड ग्रंथि को पूरा निकालना। यह मेजर ऑपरेशन था। गले से मस्तिष्क में जाने वाली सभी धमनियां, शिराएं और तंत्रिकाएं गुजरती है। गले मेंं थायराइड के ठीक नीचे आवाज तथा श्वास की नली होती है, उन्हें पूरी तरह से बचाकर ऑपरेशन करना होता है। थायराइड ग्रंथि को अधिष्ठाता डॉक्टर डी परमहंस द्वारा ऑपरेशन कर निकाला गया। मरीज को आब्जर्वेशन में रखा गया है।

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