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Twisha Sharma Case: गिरिबाला-समर्थ के वॉयस सैंपल और लैपटॉप पासवर्ड लेने की अनुमति, CBI की जांच तेजी से बढ़ेगी

Mon, 06 Jul 2026 11:15 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 06 Jul 2026 11:15 PM IST
सार

भोपाल के त्विषा शर्मा मौत मामले में जिला अदालत ने सीबीआई को आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने तथा समर्थ के लैपटॉप का पासवर्ड प्राप्त करने की अनुमति दी। कोर्ट ने बचाव पक्ष की सभी आपत्तियां और मीडिया ट्रायल रोकने की मांग भी खारिज कर दी।

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Twisha Sharma Case: Permission to take voice samples and laptop passwords of Giribala-Samarth
समर्थ, त्विषा, गिरिबाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और हाईप्रोफाइल त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सोमवार को जिला अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को बड़ी सफलता मिल गई। न्यायालय ने सीबीआई को मामले की आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने और समर्थ के लैपटॉप का पासवर्ड हासिल करने की इजाजत दे दी। इससे जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।
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सीबीआई के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि सीबीआई ने बीती 3 जुलाई को अदालत में दो अहम याचिकाएं दायर की थीं। सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए सीबीआई को मामले की वैज्ञानिक और डिजिटल जांच आगे बढ़ाने की हरी झंडी दे दी। दीक्षित ने मीडिया को बताया कि जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि आरोपी समर्थ सिंह का लैपटॉप पहले ही जब्त किया जा चुका है। हालांकि, पासवर्ड से सुरक्षित होने के कारण उसमें मौजूद महत्वपूर्ण डेटा को रिकवर नहीं किया जा सका था। डिजिटल साक्ष्यों को खंगालने और जांच को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए लैपटॉप का पासवर्ड मिलना बेहद जरूरी था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
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वॉयस सैंपल पर बचाव पक्ष की आपत्ति खारिज
अधिवक्ता दीक्षित के मुताबिक, सीबीआई ने मामले से जुड़े ऑडियो साक्ष्यों की पुष्टि के लिए दोनों आरोपियों (गिरिबाला और समर्थ) के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस पर बचाव पक्ष ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई। बचाव पक्ष का कहना था कि सीबीआई पहले यह स्पष्ट करे कि इन वॉयस सैंपल्स का मिलान किस रिकॉर्डिंग से किया जाएगा और संबंधित सामग्री को सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश किया जाए। न्यायालय ने बचाव पक्ष की इस आपत्ति को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मामले की जांच उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई को सौंपी गई है, इसलिए जांच की प्रक्रिया और दिशा तय करना पूरी तरह से जांच एजेंसी का अधिकार क्षेत्र है। अदालत ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करेगी, जो सीबीआई को वॉयस सैंपल से जुड़ी सामग्री पहले अदालत में पेश करने के लिए बाध्य करे।

मीडिया ट्रायल रोकने की मांग भी नामंजूर
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एक और याचिका दायर कर मांग की थी कि पीड़ित पक्ष और उनके अधिवक्ताओं द्वारा मीडिया में दिए जा रहे बयानों पर रोक लगाई जाए। अदालत ने इस मांग को भी नामंजूर कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि वह ऐसा कोई आदेश जारी नहीं करेगा जिससे किसी व्यक्ति को इस मामले में मीडिया से बातचीत करने या अपना पक्ष रखने के अधिकार से वंचित किया जाए। दीक्षित ने कोर्ट के इस फैसले को न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा बचाव पक्ष की सभी आपत्तियों को खारिज करने और सीबीआई के दोनों आवेदनों को मंजूरी देने से अब इस हाईप्रोफाइल मामले की फाॅरेंसिक और डिजिटल जांच तेजी से आगे बढ़ सकेगी।
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