MP: ये कौन है सोनीपत का घुमक्कड़ किसान रॉकी? जिसने ट्रैक्टर को बना डाला 14 लाख का चलता-फिरता घर; पेश की मिसा
युवा किसान रॉकी शाहपुरिया ने अपने ट्रैक्टर को चलता-फिरता घर बनाकर अनोखी मिसाल पेश की है। बेड, किचन और अन्य सुविधाओं से युक्त इस ट्रैक्टर से वे सियाचिन, लेह-लद्दाख, उमिंगला पास और चारधाम की यात्रा कर चुके हैं। चलिए जानते हैं कैसे 14 लाख रुपये में ये नवाचार कर दिखाया है इन्होंने?
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उज्जैन स्थित सोनीपत का क्षेत्र ट्रैक्टरों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है। अब शाहपुर तुर्क गांव के युवा किसान रॉकी शाहपुरिया ने अपने जीजा की एक सलाह को जुनून बना लिया। उन्होंने 10 लाख रुपये का एक ट्रैक्टर खरीदा और उसमें चार लाख रुपये खर्च कर उसे ऐसा चलता-फिरता घर बना दिया कि देखने वाले देखते रह जाएं। बेड, किचन, पंखा, सनरूफ, बैक कैमरा और 150 किलो का बंपर तक उसमें फिट कराया गया है। अब यही ट्रैक्टर उनकी सवारी भी है और आशियाना भी।
रॉकी का यह जुगाड़ कमाल का है। ऊपर बने केबिन में आठ लोग बैठ सकते हैं और पांच लोग आराम से सो सकते हैं। पीछे एक छोटा किचन सेट भी है। कहीं भी रुकिए, खाना बनाइए, खाइए और रात वहीं बिताइए। पहाड़ी इलाकों में संतुलन बनाए रखने के लिए आगे भारी बंपर लगाया गया है। यहां तक कि सफाई बनाए रखने के लिए डस्टबिन भी फिट किया गया है।
माइनस 25 डिग्री में कंबल ओढ़कर सोए
लोग सियाचिन जाते हैं तो स्लीपिंग बैग लेकर जाते हैं, लेकिन रॉकी अपने ट्रैक्टर वाले घर में सामान्य कंबल ओढ़कर सोए। वे लेह-लद्दाख, सियाचिन और भारत की सबसे ऊंची सड़क उमिंगला पास तक ट्रैक्टर लेकर पहुंच चुके हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा भी इसी ट्रैक्टर से पूरी की। जहां भी जाते हैं, वहां लोगों की भीड़ जुट जाती है और लोग उनके साथ सेल्फी लेते हैं।
27 घंटे नॉन-स्टॉप, 450 किमी का सफर
यात्रा के दौरान उज्जैन पहुंचे रॉकी ने बताया कि उन्होंने एक बार लगातार 27 घंटे ट्रैक्टर चलाकर 450 किलोमीटर का सफर तय किया। स्पीड भले ही कम हो, लेकिन सफर का मजा दोगुना हो जाता है। रास्ते के नजारों का आराम से आनंद लिया जा सकता है। अब वे इसी ट्रैक्टर पर अपने परिवार के साथ नेपाल यात्रा पर निकले हैं, जहां वे भगवान विष्णु मंदिर के दर्शन करेंगे।
जीजा ने दिया आइडिया, रॉकी ने बना दिया इतिहास
रॉकी को बचपन से घूमने का शौक था, लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। उनके जीजा ने कहा, “घूमना है तो ट्रैक्टर पर घूमो। यह हरियाणा की शान है, मजबूत है और हर रास्ते पर चल सकता है।” बस फिर क्या था, रॉकी ने ट्रैक्टर को ही अपना हमसफर बना लिया। आज वे हरियाणा से निकलकर देशभर की सड़कों पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
रॉकी का ट्रैवल रिकॉर्ड
सियाचिन - माइनस 25 डिग्री में ट्रैक्टर पर रात बिताई।
उमिंगला पास - भारत की सबसे ऊंची सड़क पर ट्रैक्टर पहुंचाया।
चारधाम - बद्रीनाथ और केदारनाथ तक की यात्रा की।
लेह-लद्दाख - बर्फीले रास्तों पर ट्रैक्टर चलाया।
नेपाल - वर्तमान में परिवार के साथ यात्रा जारी है।
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इसलिए खास है यह ट्रैक्टर यात्रा
• होटल का खर्च शून्य।
• जहां मन करे, वहीं रुक सकते हैं।
• पहाड़ों पर 4x4 की दमदार क्षमता।
• धीमी रफ्तार में नजारों का भरपूर आनंद।
• हरियाणा की पहचान को नई उड़ान।

परिवार के साथ ऐसे यात्रा कर रहा रॉकी

ट्रैक्टर पर किसान रॉकी।

परिवार के साथ एक समूह चित्र में रॉकी।
