Ujjain News: उज्जैन में शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या की तैयारियां तेज, त्रिवेणी घाट पर पहुंचा नर्मदा का जल
6 मई की शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या को लेकर प्रशासन ने शिप्रा नदी में नर्मदा जल छोड़ना शुरू कर दिया है। त्रिवेणी और प्रमुख घाटों पर जलस्तर बढ़ाया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को स्नान सुविधा मिल सके। प्रशासन सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सिंहस्थ-2028 निर्माण कार्यों की भी निगरानी कर रहा है।
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आगामी 16 मई को होने वाली शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या के स्नान पर्व के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नर्मदा का जल शिप्रा नदी में छोड़ना शुरू कर दिया गया है। नागफनी पाइपलाइन के जरिए यह पानी त्रिवेणी के घाटों पर तेजी से भरा जा रहा है, जिससे तपती गर्मी के बीच नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है।
शनि जयंती/शनिश्चरी अमावस्या (16 मई) से पहले शिप्रा नदी में नर्मदा का जल बढ़ने लगा है। इस दिन श्रद्धालुओं को नर्मदा-शिप्रा के संगम जल में स्नान कराने को स्थानीय प्रशासन के आग्रह पर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने शिप्रा नदी में नर्मदा का जल हरियाखेड़ी आउटलेट से छोड़ना प्रारंभ करवा दिया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पर्व स्नान से पहले त्रिवेणी सहित प्रमुख घाटों पर पर्याप्त जलस्तर बना रहे, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में किसी प्रकार की परेशानी न हो। 9 मई से शुरू हुई इस जलभराव की प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य शनि जयंती पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को शुद्ध जल में स्नान उपलब्ध कराना है। पाइपलाइन से आ रहा यह पानी त्रिवेणी के घाटों को भरने के बाद ओवरफ्लो होकर रामघाट की ओर बढ़ेगा। उम्मीद है कि यही जल 25 मई को गंगादशमी और शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के लिए भी उपलब्ध रहेगा। हालांकि, नदी में चल रहे पुल-पुलिया के निर्माण कार्यों को देखते हुए जलस्तर का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। पीएचई विभाग और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए और पानी का बहाव भी सुचारू रहे।
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जमीन सोख रही पानी
फिलहाल नदी के कई हिस्सों में जलस्तर कम है और घाटों के आसपास की जमीन सूखी होने के कारण शुरुआती पानी का बड़ा हिस्सा जमीन सोख रही है। यही वजह है कि पानी को आगे बढ़ने और घाटों तक स्थायी रूप से भराव बनने में चार से पांच दिन का समय लग सकता है। इसके बाद बैराज के गेट संचालन और ओवरफ्लो व्यवस्था के जरिए पानी रामघाट और आगे के क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा। प्रशासन की चिंता केवल स्नान व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों से जुड़े निर्माण कार्यों पर भी नजर रखी जा रही है। शिप्रा नदी के विभिन्न हिस्सों में पुल, पुलिया और घाट विस्तार के काम चल रहे हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जल प्रवाह बढ़ने से निर्माण कार्य प्रभावित न हों। जिन स्थानों पर पुलों के लिए कॉलम खड़े किए गए हैं, वहां जलधारा के दबाव और बहाव की दिशा पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
भीड़ प्रबंधन को लेकर तैयारी शुरू
घाटों पर सुरक्षा, साफ-सफाई और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी तैयारी शुरू हो चुकी है। प्रशासन का प्रयास है कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल, सुरक्षित स्नान और व्यवस्थित आवागमन की सुविधा मिल सके। धार्मिक आस्था, पर्व स्नान और आगामी सिंहस्थ की व्यवस्थाओं के बीच इस बार शिप्रा में बढ़ता नर्मदा जल केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि उज्जैन की धार्मिक और प्रशासनिक तैयारी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
2014 से ये व्यवस्था लागू
शिप्रा नदी में नर्मदा का जल भरकर श्रद्धालुओं को पर्व स्नान कराने की व्यवस्था वर्ष 2014 से लागू है। वर्ष 2018 तक नर्मदा का पानी प्राकृतिक प्रवाह से शिप्रा में छोड़ने की व्यवस्था रही मगर उसके बाद 2019 में 139 करोड़ रुपये खर्च कर पानी की पाइपलाइन बिछाकर हरियाखेड़ी गांव में आउटलेट बनाकर पानी छोड़ने की व्यवस्था बनाई और इसे लागू किया। बीते 14 वर्षों में 500 करोड़ रुपये से अधिक राशि का पानी शिप्रा नदी में नर्मदा का छोड़ा जा चुका है।
हजारों श्रद्धालु आएंगे
मालूम हो कि शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या पर उज्जैन में लाखों श्रद्धालु शनि मंदिरों के साथ शिप्रा के घाटों पर स्नान और दान-पुण्य के लिए पहुंचते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन, नगर निगम और सिंचाई विभाग ने संयुक्त रूप से जल प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों के अनुसार पाइपलाइन के माध्यम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे त्रिवेणी क्षेत्र में धीरे-धीरे जलभराव बढ़ रहा है।

मां शिप्रा का जल आया

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