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Umaria News: अब रुकेगा मानव-हाथी संघर्ष! वनकर्मियों ने प. बंगाल में सीखी हाथी प्रबंधन की आधुनिक तकनीकें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2026 08:11 AM IST
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सार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मानव-हाथी संघर्ष कम करने के लिए मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 कर्मियों ने पश्चिम बंगाल में छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण में हाथी प्रबंधन, व्यवहार अध्ययन, मॉनिटरिंग और संघर्ष रोकथाम की आधुनिक तकनीकें सिखाई गईं। वन विभाग को उम्मीद है कि इससे हाथियों के बेहतर प्रबंधन और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
हाथी और मानव के संघर्ष को रोकने के लिए प्रशिक्षण दिया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी और उनसे जुड़े मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों के बीच वन विभाग ने प्रबंधन को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वन कर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर जंगली हाथी प्रबंधन एवं मानव-हाथी द्वंद्व रोकथाम की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का प्रतिनिधित्व वन रक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता एवं रवि कुमार वर्मा ने किया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान हाथियों के व्यवहार, उनके प्रबंधन और संघर्ष की परिस्थितियों से निपटने के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन किया। उत्तरी पश्चिम बंगाल देश के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे में वहां विकसित की गई प्रबंधन प्रणालियां और तकनीकें देशभर के वन विभागों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं। प्रशिक्षण के दौरान वन कर्मियों को हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने के ऑपरेशन, ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण के माध्यम से मॉनिटरिंग, हाथियों के व्यवहार की पहचान, कैम्प हाथियों के प्रबंधन और उनकी शारीरिक संरचना के आधार पर प्रोफाइलिंग जैसी महत्वपूर्ण विधियों का प्रायोगिक अनुभव दिया गया।
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प्रशिक्षण की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि प्रतिभागियों को गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के आईएफएस अधिकारियों, वन अमले, वाइल्डलाइफ स्क्वाड, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला। इस दौरान मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखने, स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले लगभग आठ वर्षों से जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है। अब यह क्षेत्र हाथियों के लिए एक स्थायी आवास के रूप में विकसित हो चुका है, जो यहां के स्वस्थ पारिस्थितिकीय तंत्र का संकेत माना जाता है। हालांकि हाथियों की बढ़ती गतिविधियों के कारण रिजर्व से लगे गांवों में फसल नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
वन विभाग का मानना है कि इस अंतरराज्यीय प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव और तकनीकी ज्ञान भविष्य में बांधवगढ़ क्षेत्र में हाथियों के बेहतर प्रबंधन, ग्रामीणों की सुरक्षा तथा मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।

हाथी और मानव के संघर्ष को रोकने के लिए प्रशिक्षण दिया गया।

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